छिंदवाड़ा नगर निगम का ईवी टेंडर विवादों में
छिंदवाड़ा नगर निगम ने जारी किए गए ईवी (इलेक्ट्रिक) कचरा वाहन टेंडर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.
छिंदवाड़ा नगर निगम ने जारी किए गए ईवी (इलेक्ट्रिक) कचरा वाहन टेंडर पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि पूरी टेंडर प्रक्रिया इस तरह डिजाइन की गई है कि इसमें केवल एक ही कंपनी भाग ले सके. सूत्रों के मुताबिक, टेंडर में शामिल तकनीकी स्पेसिफिकेशन कथित रूप से टाटा इलेक्ट्रिक व्हीकल के अनुरूप बनाए गए हैं, जिससे अन्य कंपनियों की एंट्री लगभग बंद हो गई है. कई कंपनियों ने स्पेसिफिकेशन में बदलाव की मांग की, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया.
कीमत में बड़ा अंतर
जहां बाजार में समान इलेक्ट्रिक वाहन 8 से 9 लाख रुपये में उपलब्ध बताए जा रहे हैं, वहीं नगर निगम ने प्रति वाहन कीमत लगभग 12 लाख रुपये तय की गई है.
करोड़ों का खेल?
नगर निगम द्वारा करीब 80 वाहनों की खरीदी प्रस्तावित है. यदि बाजार दर (8 लाख रुपये प्रति वाहन) के हिसाब से गणना की जाए, तो कुल लागत लगभग 6.5 करोड़ बैठती है. लेकिन टेंडर की कुल लागत 9.5 से 10 करोड़ रुपये के बीच रखी गई है. यानी करीब 3 से 3.5 करोड़ रुपये का अंतर, जिस पर अब सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय कनेक्शन पर भी सवाल
चर्चाओं के अनुसार, छिंदवाड़ा में टाटा ईवी की एजेंसी कृष्णा मोटर्स के पास है, जो कथित रूप से क्षेत्र के एक सांसद से जुड़ी बताई जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अंदरूनी मिलीभगत के आरोप
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम के एक कर्मचारी अभिनव तिवारी का नाम भी इस पूरे मामले में सामने आ रहा है। हालांकि, इस पर भी अभी तक कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं की गई है.
जवाब का इंतजार
इन सभी गंभीर आरोपों के बीच अब तक संबंधित विभाग या अधिकारियों की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

