इंदौर में म्यूल अकाउंट गैंग का खुलासा : 6 गिरफ्तार, करोड़ों के ट्रांजेक्शन- 200 साइबर फ्रॉड से जुड़े तार

Indore Cyber Fraud : बैंक डिटेल और KYC की जांच की गई तो सूरज जेसवाल के खाते में करीब 3 करोड़ 42 लाख रुपए, जबकि अमन चौहान के खाते में करीब साढ़े 17 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन मिला।

इंदौर में म्यूल अकाउंट गैंग का खुलासा :  6 गिरफ्तार, करोड़ों के ट्रांजेक्शन- 200 साइबर फ्रॉड से जुड़े तार

Indore Cyber Fraud : मध्य प्रदेश। इंदौर में साइबर ठगी के खिलाफ चलाए जा रहे ऑपरेशन मैट्रिक्स के तहत एरोड्रम थाना पुलिस ने म्यूल अकाउंट उपलब्ध कराने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए का ट्रांजेक्शन हुआ है और इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेनदेन में किया जा रहा था। जांच में इन खातों से जुड़े करीब 200 साइबर फ्रॉड के मामले सामने आए हैं। 

एरोड्रम थाने में एक लाख 44 हजार रुपए की साइबर ठगी की FIR दर्ज हुई थी। जांच में ठगी की रकम जिन बैंक खातों में पहुंची, उनमें सूरज जेसवाल और अमन चौहान के खाते सामने आए। बैंक डिटेल और KYC की जांच की गई तो सूरज जायसवाल के खाते में करीब 3 करोड़ 42 लाख रुपए, जबकि अमन चौहान के खाते में करीब साढ़े 17 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन मिला। इसके बाद पुलिस ने सूरज जेसवाल को गिरफ्तार कर पूछताछ की। पूछताछ में संगठित गिरोह का खुलासा हुआ और MIG क्षेत्र में दबिश देकर अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। 

पुलिस के मुताबिक इस गिरोह का मास्टरमाइंड हर्ष है, जो अलग-अलग लोगों से चार से पांच हजार रुपए में बैंक खाते किराए पर लेता था और फिर उनकी चेकबुक, ATM कार्ड और सिम का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जाता था।  

गिरफ्तार आरोपियों में सूरज, हर्ष, संदीप उर्फ सौरभ, उमन उर्फ पवन, हरिओम और आयुष शामिल हैं, जबकि अमन चौहान फरार बताया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से अलग- अलग बैंकों के 34 ATM/डेबिट कार्ड, 12 पासबुक, 24 चेकबुक, एक वाई-फाई राउटर, 8 मोबाइल फोन, 1 लाख 8 हजार रुपए नकद और एक डायरी जब्त की है।  

पुलिस के मुताबिक इन खातों के खिलाफ देशभर में करीब 200 FIR दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि करोड़ों रुपए की रकम किन राज्यों और किन लोगों से आई और आगे कहां ट्रांसफर हुई।

साथ ही इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन-कौन से मास्टरमाइंड हैं, इसकी भी जांच की जा रही है।  मामले में संगठित अपराध की धारा 112 BNS भी बढ़ाई गई है। पुलिस अब बैंक कर्मचारियों की भूमिका और बैंकिंग सिस्टम में हुए करोड़ों के ट्रांजेक्शन की भी जांच करेगी। 

पुलिस के मुताबिक यह सिर्फ बैंक खाते उपलब्ध कराने वाला नेटवर्क नहीं, बल्कि साइबर ठगी के लिए म्यूल अकाउंट तैयार करने वाला संगठित गिरोह है। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को उम्मीद है कि फाइनेंशियल इन्वेस्टिगेशन के जरिए साइबर ठगी के इस पूरे नेटवर्क की अगली कड़ी तक पहुंचा जा सकेगा।