इंदौर में मृतकों का आंकड़ा पहुंचा 28: दूषित पानी से कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष की मौत, महू में 24 बच्चों को पीलिया, उल्टी–दस्त

इंदौर में दूषित पानी से 28वीं मौत हुई। राजाराम बौरासी (75) बौरासी कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष थे। महू में भी घरों तक गंदा पानी सप्लाई। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित।

इंदौर में मृतकों का आंकड़ा पहुंचा 28: दूषित पानी से कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष की मौत, महू में 24 बच्चों को पीलिया, उल्टी–दस्त

इंदौर। दूषित पानी पीने से मरने वाली की संख्या थमने का नाम नहीं ले रही है। अब तक शहर में 28 लोगों की मौत हो चुकी है। भागीरथपुरा निवासी राजाराम बौरासी (75) ने रविवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। वर्तमान में सरकारी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 10 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 4 को आईसीयू में रखा गया है। इनमें एक महिला और एक पुरुष की हालत चिंताजनक बनी हुई है।

दूषित पानी से कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष की मौत

इंदौर में दूषित पानी से 28वीं मौतें हो गई है, जबकि कई मरीज गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती हैं। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र भागीरथपुरा है, जहां लगातार उल्टी-दस्त, पीलिया और डिहाइड्रेशन के मामले सामने आ रहे हैं। रविवार को भागीरथपुरा निवासी रिटायर्ड शिक्षक और कांग्रेस के वार्ड अध्यक्ष रहे 75 वर्षीय राजाराम बौरासी की इलाज के दौरान मौत हो गई।

परिजनों के अनुसार शुक्रवार को उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। पहले स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर शनिवार को उन्हें सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में भर्ती किया गया, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। वहीं स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों के अनुसार वे पहले से हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित थे और उल्टी-दस्त की पुष्टि नहीं होती। इसको लेकर परिजनों और प्रशासन के बीच मतभेद बना हुआ है।

महू में भी दूषित पानी का संकट, हालात बेहद खराब

इंदौर के बाद अब महू (अंबेडकर नगर) में भी दूषित पानी का संकट गहराता जा रहा है। यहां पत्ती बाजार क्षेत्र के चंदर मार्ग में हालात बेहद खराब हैं। करीब 30 लोग बीमार पड़े हैं, जिनमें 24 बच्चे शामिल हैं। बच्चों में पीलिया, उल्टी-दस्त के लक्षण तेजी से फैल रहे हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि इमरजेंसी के लिए एक दो मंजिला मकान को अस्थायी अस्पताल में तब्दील करना पड़ा। जांच में सामने आया है कि चंदर मार्ग की एक गली में पेयजल की पाइपलाइन नाली के अंदर से गुजर रही थी और उसमें लीकेज था। इसी लीकेज के कारण नाली का दूषित पानी पीने के पानी में मिल गया और घरों तक पहुंचता रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पाइपलाइन करीब 10 साल पुरानी है और लंबे समय से इसका रखरखाव नहीं किया गया। महू में पानी सप्लाई और सफाई की जिम्मेदारी छावनी परिषद की है, जिसके चलते मामला और संवेदनशील हो गया है। लोगों की मांग है कि प्रभावित इलाकों में तुरंत सुरक्षित पानी की व्यवस्था की जाए, पुरानी पाइपलाइनों को बदला जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाए।