इंदौर कोर्ट का बड़ा फैसला: व्यापम स्कैम में 12 ‘मुन्ना भाइयों’ को 5-5 साल की सजा, PMT भर्ती परीक्षा में किया था घोटाला
व्यापम घोटाले से जुड़े एक अहम मामले में इंदौर की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। पीएमटी भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मामले में अदालत ने 12 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक को 5-5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
इंदौर। व्यापम घोटाले से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इंदौर की विशेष अदालत ने बड़ा और कड़ा फैसला सुनाया है। पीएमटी (प्री-मेडिकल टेस्ट) भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े के मामले में अदालत ने 12 आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 5-5 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही सभी दोषियों पर एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है।
यह मामला वर्ष 2011 की पीएमटी भर्ती परीक्षा से संबंधित है। जांच में यह सामने आया था कि परीक्षा में वास्तविक अभ्यर्थियों की जगह फर्जी परीक्षार्थियों, जिन्हें आमतौर पर ‘मुन्ना भाई’ कहा जाता है, से परीक्षा दिलवाई गई थी। इस संगठित घोटाले में असली अभ्यर्थी, उनकी जगह परीक्षा देने वाले फर्जी परीक्षार्थी और पूरी प्रक्रिया को संचालित करने वाले बिचौलिये शामिल थे।
न्यायाधीश शुभ्रा सिंह ने सभी पक्षों की दलीलें सुनी
इंदौर की विशेष अदालत की माननीय न्यायाधीश शुभ्रा सिंह ने मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर 12 आरोपियों को दोषी ठहराया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार का अपराध न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि उन मेहनती और योग्य अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ भी गंभीर अन्याय है, जो ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी करते हैं।
फैसला सुनाए जाने के बाद सभी दोषियों को जेल भेज दिया गया। दोषी ठहराए गए 12 आरोपियों में चार मध्यप्रदेश के निवासी हैं, जबकि शेष आरोपी उत्तर प्रदेश से संबंधित हैं। वहीं, इस मामले में एक अन्य आरोपी नाबालिग था, जिसके प्रकरण की सुनवाई पहले ही अलग से की जा चुकी है।
इस मामले में आरोपियों के नाम आशीष यादव, सतेंद्र वर्मा, धीरेन्द्र तिवारी, ब्रजेश जायसवाल, दुर्गाप्रसाद यादव, राकेश कुर्मी, नरेंद्र चौरसिया, अभिलाष यादव, खूबचंद राजपूत, पवन राजपूत, लखन धनगर, सुंदर लाल धनगर है।
गौरतलब है कि व्यापम घोटाला देश के सबसे बड़े भर्ती और परीक्षा घोटालों में से एक माना जाता है। इस घोटाले से जुड़े कई मामलों में अब तक अदालतों द्वारा दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है। यह फैसला एक बार फिर यह संदेश देता है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कानून सख्ती से कार्रवाई करेगा।
Varsha Shrivastava 
