मध्यप्रदेश में राइस मिलर्स संकट में: हजारों करोड़ की धान सड़ने का खतरा, मिलिंग कार्य ठप
मध्यप्रदेश में राइस मिलर्स की समस्याओं के कारण धान की मिलिंग प्रभावित, ओपन कैप में रखी हजारों करोड़ की धान सड़ने का खतरा, सरकार को भारी आर्थिक नुकसान.
भोपाल। मध्यप्रदेश में राइस मिलर्स की समस्याओं का निराकरण नहीं होने से प्रदेश में बड़ा खाद्य संकट खड़ा होता नजर आ रहा है. मिलिंग कार्य ठप होने से हजारों करोड़ की धान ओपन कैप में रखी है, जिस पर आगामी बारिश में सड़ने का खतरा मंडरा रहा है.
मिलर्स का कहना है कि वर्ष 2024-25 की मिलिंग नीति में भारतीय खाद्य निगम (भारतीय खाद्य निगम) में चावल जमा करने पर अपग्रेडेशन राशि देने का प्रावधान किया गया था, लेकिन अब तक इस संबंध में आदेश जारी नहीं किए गए हैं. इसके चलते मिलर्स की आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है और कई मिलर्स बैंक डिफॉल्टर होने की कगार पर पहुंच गए हैं.
इसी वजह से वर्ष 2025-26 में उपार्जित धान की मिलिंग में मिलर्स रुचि नहीं ले रहे हैं. इसका सीधा असर शासन पर पड़ रहा है, जहां हर महीने करीब 200 करोड़ का अतिरिक्त ब्याज, भंडारण शुल्क और सूखत का नुकसान हो रहा है.
मिलर्स ने यह भी बताया कि वर्ष 2023-24 और 2024-25 में जमा बारदाने पर प्रति नग 2.68 रुपये की राज्यांश राशि देने का आदेश भी अब तक जारी नहीं हुआ है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और खराब हो रही है. हाल ही में मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर खंडपीठ ने सिवनी, रीवा, कटनी और सतना के करीब 100 मिलर्स को 67 प्रतिशत के बजाय 55 प्रतिशत चावल जमा करने के निर्देश दिए हैं. ऐसे में मिलर्स की मांग है कि पूरे प्रदेश में इसी अनुपात को लागू किया जाए या फिर अपग्रेडेशन राशि का आदेश जल्द जारी किया जाए.
मिलर्स के अनुसार, पिछले वर्ष अप्रैल तक करीब 60 प्रतिशत धान की मिलिंग हो चुकी थी, जबकि इस वर्ष अब तक केवल 5 प्रतिशत मिलिंग ही हो पाई है. इससे सरकार को अरबों रुपये का नुकसान होने की आशंका है. आने वाले दिनों में गेहूं उपार्जन शुरू होने वाला है. ऐसे में यदि मिलर्स की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वेयरहाउस में धान भरे होने के कारण गेहूं भंडारण में भी गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है.
मिलर्स ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया, तो जो मिलर्स अभी मिलिंग कार्य कर रहे हैं, वे भी नुकसान के चलते काम बंद करने को मजबूर हो जाएंगे.
shivendra 
