रायसेन कृषि मेले में जाने की जीतू पटवारी को नहीं मिली अनुमति, पूर्व CM दिग्विजय से मुलाकात की बताई वजह
11 अप्रैल से रायसेन जिले में आयोजित तीन दिवसीय कृषि मेले का आज समापन। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को मेले में जाने से रोका गया।
मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित कृषि मेले को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को मेले में जाने से रोके जाने के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। यह मेला केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में आयोजित किया गया था, जिसके समापन कार्यक्रम केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मौजूद रहें।
मेले में जाने से पहले ही रोक दिए गए पटवारी
रायसेन जिले के दशहरा मैदान में 11 अप्रैल से तीन दिवसीय राष्ट्रीय उन्नत कृषि महोत्सव एवं प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है, जिसका आज समापन है। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने पहले ही ऐलान किया था कि वे रायसेन कृषि मेले में शामिल होकर किसानों की समस्याओं को उठाना चाहते हैं। उन्होंने कहा था कि वे अनुमति मिलने के बाद ही मेले में जाएंगे और इसके लिए उन्होंने प्रशासन को पत्र भी लिखा था। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि अनुमति नहीं मिलेगी, तो वे मेले के अंतिम दिन वहां पहुंचेंगे।

हालांकि, जब वे रायसेन के लिए रवाना हुए, तो पुलिस ने रास्ते में ही उन्हें रोक लिया। बताया जा रहा है कि उनके निवास से लेकर रायसेन तक कई जगहों पर बैरिकेडिंग की गई थी और भारी पुलिस बल तैनात था। काफी देर तक पुलिस अधिकारियों से बातचीत और बहस के बाद भी उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई, जिसके बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा।
सरकार नहीं चाहती कि मैं जाऊं – जीतू पटवारी
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर उन्हें मेले में जाने से रोका। उन्होंने कहा कि उन्हें एक पुलिस अधिकारी का फोन आया था, जिसमें साफ कहा गया कि सरकार नहीं चाहती कि वे इस कार्यक्रम में शामिल हों।

पीसीसी चीफ ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं था, बल्कि वे संवाद के माध्यम से किसानों की समस्याओं को सामने रखना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि वे मेले में जाकर आधुनिक कृषि तकनीकों को देखना और समझना चाहते थे, लेकिन सरकार विपक्ष की उपस्थिति से डर गई।
किसानों के मुद्दे पर प्रदेश सरकार को घेरा
कृषि मेले के मुद्दे के साथ-साथ पटवारी ने प्रदेश के किसानों की स्थिति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मंडियों में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है।पटवारी के अनुसार, किसान अपनी गेहूं की फसल 2000 रुपये प्रति क्विंटल से भी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, तब बड़े-बड़े आयोजनों का क्या औचित्य है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार किसानों के मुद्दों को उठाती रही है और आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा।
दिग्विजय सिंह से मुलाकात, राज्यसभा पर चर्चा
इस घटनाक्रम के बीच जीतू पटवारी ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से भी मुलाकात की। इस मुलाकात को लेकर उन्होंने कहा कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से समय-समय पर मार्गदर्शन लेते रहते हैं।

उन्होंने बताया कि इस दौरान राज्यसभा चुनाव, संगठनात्मक रणनीति और पार्टी की मजबूती जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। राज्यसभा चुनाव को लेकर पटवारी ने आत्मविश्वास जताते हुए कहा कि हमारा उम्मीदवार पूरी मजबूती के साथ जीतेगा और इसे लेकर उन्होंने “5 लाख परसेंट” का दावा भी किया।
Varsha Shrivastava 
