संसद में आज पेश होगा पेपर लीक की रोकथाम से जुड़ा बिल, 2024 के कानून में होंगे बड़े बदलाव
आरोपियों पर बढ़ेगी सजा और जुर्माना, Fast Track Courts बनाने का भी प्रावधान
नई दिल्ली: देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आए Paper Leak मामलों के बाद केंद्र सरकार कानून को और सख्त बनाने जा रही है। Lok Sabha में सोमवार को केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh 'Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Amendment Bill, 2026' पेश करेंगे। इस संशोधन विधेयक के जरिए साल 2024 में लागू किए गए कानून को और मजबूत बनाया जाएगा। सरकार का कहना है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक और परीक्षा में होने वाली धांधली पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
यह विधेयक ऐसे समय में संसद में लाया जा रहा है, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan के इस्तीफे और छात्रों के आंदोलन समाप्त होने के दो दिन बाद परीक्षा सुधार को लेकर सरकार बड़ा कदम उठा रही है। प्रस्तावित संशोधन में दोषियों के लिए अधिक कठोर सजा, भारी जुर्माना और मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष Fast Track Courts की व्यवस्था शामिल है। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को ऐसी अदालतें गठित करने का अधिकार दिया जाएगा, जहां इन मामलों की रोजाना सुनवाई हो सकेगी।
PM Modi ने किया था सख्त कानून का ऐलान
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 23 जुलाई को जारी अपने वीडियो संदेश में कहा था कि Paper Leak कोई सामान्य अपराध नहीं है। इससे लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने भरोसा दिलाया था कि सरकार इस समस्या पर कठोर कार्रवाई करेगी और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। उसी घोषणा के बाद अब संशोधन विधेयक संसद में पेश किया जा रहा है।
क्या है मौजूदा कानून?
जून 2024 तक देश में Paper Leak को लेकर कोई एक समान केंद्रीय कानून नहीं था। ऐसे मामलों में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी जैसी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती थी। कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर नकल-विरोधी कानून बनाए थे, जबकि उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में गंभीर मामलों में Gangster Act तक लगाया गया।
NEET-UG और UGC परीक्षाओं में अनियमितताओं के बाद केंद्र सरकार ने 21 जून 2024 को Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Act लागू किया। इस कानून में पेपर लीक, OMR Sheet हासिल करना, नकल करवाना, फर्जी परीक्षा वेबसाइट बनाना और परीक्षकों को धमकाने जैसे अपराधों को गैर-जमानती बनाया गया।
वर्तमान कानून के तहत पेपर लीक जैसे अपराधों में 3 से 5 साल तक की जेल और ₹10 लाख तक जुर्माने का प्रावधान है। वहीं परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था या एजेंसी के निदेशक अथवा प्रबंधन के दोषी पाए जाने पर 3 से 10 साल तक की कैद और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। अब सरकार संशोधन के जरिए इन दंडों को और कड़ा बनाने की तैयारी में है।
Varsha Shrivastava 
