इंदौर: कांग्रेस का BJP और नगर निगम पर बड़ा हमला, 11 जनवरी को ‘न्याय यात्रा’ का ऐलान

इंदौर शहर में पेयजल संकट, स्वच्छता व्यवस्था और हालिया हादसों को लेकर कांग्रेस ने नगर निगम पर जोरदार हमला बोला। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य सरकार पर भी गंभीर आरोप लगाए।

इंदौर: कांग्रेस का BJP और नगर निगम पर बड़ा हमला, 11 जनवरी को ‘न्याय यात्रा’ का ऐलान
MP Congress Nyay Yatra

इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहरों में गिने जाने वाले इंदौर में आज हालात इसके ठीक उलट नजर आ रहे हैं। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद अब यह मामला पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। कांग्रेस ने इस घटना को हादसा नहीं, बल्कि प्रशासन की लापरवाही और भ्रष्ट व्यवस्था का नतीजा बताया है। मंगलवार को इंदौर में हुई एक बड़ी प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने भाजपा शासित नगर निगम, राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए और इसे “सरकारी हत्या” तक करार दिया।

शहर स्वच्छता में नंबर-1 पर नगर निगम फेल

इस प्रेस वार्ता में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी, एआईसीसी प्रभारी उषा नायडू, जिला कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और पूर्व मंत्री सज्जन वर्मा मौजूद रहे। नेताओं ने एक सुर में कहा कि इंदौर में पानी, स्वच्छता और सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर नगर निगम पूरी तरह विफल हो चुका है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि इंदौर नगर निगम लंबे समय से जनता को गीले और सूखे कचरे के नाम पर परेशान कर रहा है, लेकिन असली मुद्दों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि कभी स्वच्छता में नंबर-1 रहने वाला इंदौर आज जहरीले पानी के कारण बदनाम हो रहा है। पटवारी ने भागीरथपुरा में हुई मौतों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रशासन मृतकों की संख्या छिपा रहा है। उनके अनुसार यह आंकड़ा 6 या 10 नहीं, बल्कि 20 से ज्यादा हो सकता है।

पटवारी ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन इलाके में पहरा देकर मीडिया और विपक्ष को सच्चाई सामने लाने से रोक रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी और भ्रष्टाचार का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट मांग की कि इस घटना के लिए जिम्मेदार महापौर, नगर निगम कमिश्नर और संबंधित इंजीनियरों पर गैर-इरादतन हत्या की धारा 304 के तहत मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

पुष्यमित्र भार्गव इतिहास के सबसे असफल महापौर

प्रेस वार्ता के दौरान जीतू पटवारी ने इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें इंदौर के इतिहास का “सबसे असफल महापौर” बताया। उन्होंने कहा कि महापौर के कार्यकाल में शहर की छवि देश और दुनिया में खराब हुई है। पटवारी ने आरोप लगाया कि संगठित अपराध, हादसे और अव्यवस्था अब इंदौर की पहचान बनते जा रहे हैं। उन्होंने बावड़ी कांड, चूहा कांड और अन्य हादसों का जिक्र करते हुए कहा कि यह सब प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है।

कांग्रेस नेताओं ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर भी निशाना साधा और उन्हें अहंकारी बताते हुए नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर आरोप लगाया गया कि वे इंदौर के प्रति गंभीर नहीं हैं और केवल औपचारिक दौरों तक सीमित हैं। पटवारी ने यह भी कहा कि इंदौर कलेक्टर द्वारा संघ कार्यालय जाने का मामला बेहद गंभीर है और इसकी शिकायत की जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या प्रशासन अब जनता के प्रति जवाबदेह है या किसी खास संगठन के प्रति।

जीतू पटवारी ने नगर निगम के बजट और खर्चों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017-18 में नगर निगम का बजट करीब 56 हजार करोड़ रुपये था, जिसमें से 3700 करोड़ रुपये ड्रेनेज के लिए स्वीकृत किए गए थे। उनके अनुसार पिछले 25 वर्षों में भाजपा सरकार ने इंदौर नगर निगम में करीब 1 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, लेकिन आज तक जनता के सामने इसका स्पष्ट हिसाब नहीं रखा गया।

भागीरथपुरा हादसे को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवाल उठाए। नेताओं ने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर ट्वीट करने वाले प्रधानमंत्री ने अब तक इस गंभीर घटना पर कोई संज्ञान नहीं लिया। कांग्रेस ने मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराई जाए, पानी की सप्लाई का रियल टाइम ऑडिट हो और नगर निगम में पानी से जुड़ी घटनाओं पर नजर रखने के लिए अलग विभाग बनाया जाए।

‘गैर-राजनैतिक न्याय यात्रा’ निकालने का ऐलान

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस ने 11 जनवरी को इंदौर में एक विशाल ‘गैर-राजनैतिक न्याय यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह यात्रा किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि उन परिवारों को न्याय दिलाने के लिए है जिन्होंने दूषित पानी के कारण अपने प्रियजनों को खोया है। कांग्रेस ने सरकार द्वारा मृतक परिवारों को दी जा रही 2 लाख रुपये की सहायता राशि को नाकाफी बताते हुए प्रत्येक परिवार को 1 करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग भी की है।

वहीं, मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने प्रेस वार्ता में केंद्र सरकार पर मनरेगा को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नई योजनाओं के नाम पर गरीब और मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे हैं। चौधरी के अनुसार, यह नीतियां गरीब विरोधी हैं और कांग्रेस इसका पुरजोर विरोध करेगी।