Indore Noise Pollution : इंदौर में 29 क्षेत्र साइलेंट जोन घोषित, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन का कदम
Indore Noise Pollution : कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के 311 ऐप पर ध्वनि प्रदूषण की शिकायत दर्ज कराने का सीधा प्रावधान है।
Indore Noise Pollution : मध्य प्रदेश। इंदौर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की सख्ती के बाद जिला प्रशासन ने अब सख्त कदम उठाना शुरू कर दिया है। हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद प्रशासन ने शहर के 29 संवेदनशील क्षेत्रों को साइलेंट जोन घोषित किया है। इन क्षेत्रों में अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और न्यायालय परिसर शामिल हैं, जहां ध्वनि प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विशेष निगरानी और कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल, इंदौर जिला कलेक्टर शिवम वर्मा (Indore Collector Shivam Verma) ने आदेश जारी करते हुए शहर के 29 स्थानों 29 शांत क्षेत्र एमवाय अस्पताल, जिला अस्पताल, बॉम्बे अस्पताल, सीएचएल, भंडारी, अरबिंदो सांवेर रोड, मानसिक चिकित्सालय बाणगंगा, चोइथराम, गोकुलदास, चाचा नेहरू, डेंटल अस्पताल, यूनिक हॉस्पिटल दशहरा मैदान क्षेत्र, कोकिलाबेन निपानिया, बीमा नंदानगर, एमटीएच कोठारी मार्केट, अपोलो राजश्री विजय नगर, सुपर स्पेशिएलिटी, जूपिटर रिंग रोड और मेडिकेयर तिलक नगर सहित जिला कोर्ट और कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसर को साइलेंट जोन घोषित किया है।
कलेक्टर वर्मा ने बताया कि ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के 311 ऐप पर ध्वनि प्रदूषण की शिकायत दर्ज कराने का सीधा प्रावधान है। नागरिक कहीं भी अत्यधिक शोर होने की शिकायत इस ऐप के माध्यम से कर सकते हैं। शिकायत सीधे पुलिस तक पहुंचती है और उसके आधार पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।
कलेक्टर ने कहा कि हाल ही में अनंत चतुर्दशी के दौरान अखाड़ा और झांकी संचालकों के सहयोग से निर्धारित ध्वनि सीमाओं का बेहतर अनुपालन देखने को मिला। उन्होंने कहा कि शहर में न्यूसेंस कम करने और नागरिकों को राहत देने के लिए साइलेंट जोन घोषित करना महत्वपूर्ण कदम है। इन क्षेत्रों में नियमों का एनफोर्समेंट और बेहतर किया जाएगा तथा शिकायतों को प्राथमिकता से हल किया जाएगा।
गौरतलब है कि ध्वनि प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट इंदौर की डबल बैंच ने पिछली सुनवाई में प्रशासन को जवाब दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में जवाब नहीं देने पर इंदौर कलेक्टर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होना पड़ सकता है।

