धोती-कुर्ता बना तलाक की वजह! भोपाल में सब-इंस्पेक्टर पत्नी का पति से अलग होने का फैसला
भोपाल में सब-इंस्पेक्टर बनी महिला ने पति के पहनावे और सामाजिक पहचान से असहजता के चलते तलाक की मांग की है, जबकि मामला कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग के दौर से गुजर रहा है।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से रिश्तों को झकझोर देने वाला एक अनोखा मामला सामने आया है। पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत एक महिला ने अपने पति से तलाक की अर्जी दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह विवाद न तो दहेज से जुड़ा है और न ही घरेलू हिंसा से, बल्कि पति के पहनावे और उसकी सामाजिक पहचान को इसकी वजह बताया गया है।यह मामला अब भोपाल के कुटुंब न्यायालय में विचाराधीन है, जहां काउंसलिंग के दौरान भी पत्नी अपने निर्णय पर अडिग नजर आई और तलाक की मांग पर कायम रही।
पति के रहन-सहन पर पत्नि को आपत्ति
गोपनीयता बनाए रखने के लिए बदले गए नामों के अनुसार, पत्नी नीलम (परिवर्तित नाम) पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर है, जबकि पति अमन (परिवर्तित नाम) पारंपरिक रूप से पुरोहिताई का कार्य करता है। पत्नी का कहना है कि पति धोती-कुर्ता पहनता है और शिखा रखता है, जिसके कारण उसे सार्वजनिक स्थानों पर उसके साथ जाना असहज लगता है। उसका आरोप है कि पति की जीवनशैली और सामाजिक स्थिति उसके पद और कार्यक्षेत्र के अनुरूप नहीं है।काउंसलिंग के दौरान पत्नी ने यह भी कहा कि पति उसकी वर्तमान हैसियत से मेल नहीं खाता और वह उसके साथ खुद को सहज महसूस नहीं कर पाती।
पति ने दिया पत्नी का हर कदम पर साथ
दूसरी ओर, पति ने न्यायालय के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त की। उसने बताया कि विवाह के समय पत्नी बेरोजगार थी। उसने पुरोहिताई कर घर की जिम्मेदारी संभाली और पत्नी की पढ़ाई, स्नातक शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में पूरा सहयोग दिया।पति का कहना है कि पत्नी के सब-इंस्पेक्टर बनने के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आ गया और अब उसे पति के साथ रहना अपमानजनक लगने लगा है। इसके बावजूद वह छह साल पुराने वैवाहिक रिश्ते को बचाने की आखिरी कोशिश कर रहा है।
फैमिली कोर्ट में सुनवाई जारी
फिलहाल यह मामला कुटुंब न्यायालय में लंबित है। काउंसलिंग के माध्यम से समझौते के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन पत्नी तलाक के अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं है। यह मामला समाज में बदलते रिश्तों, सामाजिक पहचान और पद के प्रभाव को लेकर कई सवाल खड़े करता है—जहां व्यक्तिगत उपलब्धियां कई बार रिश्तों की नींव को चुनौती देती नजर आती हैं।
sanjay patidar 
