2 बच्चे ही अच्छे, इससे ज्यादा पर नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी, MP में नया नियम हो रहा तैयार
एमपी सरकार अब सरकारी नौकरी के लिए नया नियम लेकर आ रही है। उसका ड्राफ्ट तैयार हो गया है। दो से अधिक बच्चे पर अब सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।
भोपाल: MP सरकार नौकरी के लिए नया नियम लेकर आ रही है। नए नियम का ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। अब दो से ज्यादा बच्चे वाले लोगों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। वहीं, दूसरी संतान अगर जुड़वां बच्चे है तो उसमें छूट मिलेगी। इसे लेकर एमपी सरकार ने सेवा की सामान्य शर्तें नियम-2026 का ड्राफ्ट जारी कर दिया है।
दो से अधिक बच्चों पर सरकारी नौकरी नहीं
दरअसल, मध्य प्रदेश में यह नियम पहले से लागू है कि दो से अधिक बच्चों पर सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। यह 25 साल पहले लागू किया गया था। नए ड्राफ्ट में भी इसे वैसे ही रखा गया है। नए नियम के अनुसार 26 जनवरी 2001 के बाद अगर दो से अधिक संतानें हैं तो उम्मीदवार को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।
15 जून तक मांगे गए हैं सुझाव
वहीं, ड्राफ्ट पर आमलोगों से भी सुझाव मांगे गए हैं। आम जनता से 15 जून तक सुझाव मांगे गए हैं। प्राप्त सुझावों के बाद उसमें संशोधन भी हो सकता है। इसके बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति 15 जून 2026 तक सुझाव दे सकता है। sogad1@mp.gov.in और gad.mp.gov.in पर लोग सुझाव दे सकते हैं। वहीं, 15 जून के बाद आए सुझावों पर कोई विचार नहीं किया जाएगा।
एक बार में ही हो जाएंगे स्थायी
नए नियम के हिसाब से सीधी भर्ती से नियुक्ति कर्मचारी एक बार में ही स्थायी हो जाएगा। वह पूरी सेवा अवधि के दौरान मान्य रहेगा। अभी प्रमोशन के बाद अलग से हर बार स्थायीकरण के आदेश जारी होते हैं। कर्मचारियों के प्रोबेशन की अवधि छह माह होती है। ऐसे में छह माह के अंदर ही निर्णय लेना होगा कि वह स्थायी होगा या नहीं।
रैंक से तय होगी वरिष्ठता
इसके साथ ही सीधी भर्ती के जरिए नियुक्त कर्मचारियों की वरिष्ठता जॉइनिंग की तारीख से नहीं, बल्कि चयन सूची में रैंक के आधार पर तय होगी। वहीं, किसी कर्मचारी ने अगर प्रोबेशन अवधि में परीक्षा पास नहीं की तो वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे चला जाएगा।
NOC है जरूरी
वहीं, अगर व्यक्ति पहले से किसी सरकारी विभाग, निगम, मंडल या सार्वजिनक उपक्रम में कार्यरत है। उसे दस्तावेज सत्यापन के समय नियोक्ता की एनओसी देनी होगी। ऐसा नहीं होने पर अयोग्य माना जाएगा। साथ ही कोई आपराधिक मामला है तो अंतिम निर्णय तक लंबित रहेगी।

