Raja Raghuvanshi Murder Case: SC ने Sonam Raghuvanshi को दी सरेंडर की सलाह, 23 जुलाई को जमानत पर फैसला

Supreme Court ने Sonam Raghuvanshi से पूछा- गिरफ्तारी पर पहले क्यों नहीं उठाया सवाल, Meghalaya Government ने जमानत का किया विरोध

Raja Raghuvanshi Murder Case: SC ने Sonam Raghuvanshi को दी सरेंडर की सलाह, 23 जुलाई को जमानत पर फैसला

New Delhi: चर्चित Raja Raghuvanshi Murder Case में आरोपी पत्नी Sonam Raghuvanshi की जमानत को लेकर Supreme Court में अहम सुनवाई हुई। अदालत ने सोनम को फिलहाल सरेंडर करने की सलाह देते हुए कहा कि जांच एजेंसियों को उससे पूछताछ का अवसर मिलना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसके पास दो विकल्प हैं। पहला, अदालत Meghalaya Government की अपील पर अंतिम आदेश पारित करे और दूसरा, सोनम पहले आत्मसमर्पण कर जांच में सहयोग करे, जिसके बाद जमानत के मुद्दे पर विचार किया जा सकता है।

23 जुलाई को जमानत पर होगा फैसला

मामले की अगली सुनवाई 23 जुलाई को निर्धारित की गई है। उसी दिन यह तय हो सकता है कि Sonam Raghuvanshi को मिली जमानत बरकरार रहेगी या उसे जेल जाना होगा। इससे पहले Meghalaya High Court ने 26 अप्रैल को Sonam को जमानत दी थी। इस फैसले को चुनौती देते हुए Meghalaya Government ने Supreme Court का दरवाजा खटखटाया है।

सुनवाई टलने के बाद राजा के परिवार में निराशा

इधर, सुनवाई टलने के बाद मृतक राजा रघुवंशी के परिवार में निराशा बढ़ गई है। राजा के भाई विपिन रघुवंशी ने कहा कि बार-बार तारीख मिलने से परिवार का भरोसा टूटता जा रहा है और उनके भाई को अब तक न्याय नहीं मिल सका है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जल्द निर्णय लेने की अपील करते हुए कहा कि जितने दिन सोनम जेल से बाहर रहेगी, उतनी ही आशंका सबूतों के प्रभावित या नष्ट होने की रहेगी।

विपिन ने भावुक होकर कहा कि राजा को न्याय मिलने की उम्मीद में अब 24 घंटे भी 24 साल जैसे लगते हैं। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया कि मामले में एक निश्चित तारीख तय कर जल्द सुनवाई पूरी की जाए। परिवार का कहना है कि लगातार टल रही सुनवाई से उनका हौसला, उम्मीद और न्याय व्यवस्था पर विश्वास धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है।

गिरफ्तारी पर उठाए गए कानूनी सवाल

सुनवाई के दौरान Supreme Court ने सोनम के कानूनी तर्कों पर भी सवाल उठाए। अदालत ने पूछा कि यदि गिरफ्तारी के समय कारण नहीं बताए गए थे, तो यह मुद्दा पहले क्यों नहीं उठाया गया। इस पर सोनम के वकील ने अदालत से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा और कहा कि वे अगली सुनवाई तक अपना पक्ष स्पष्ट करेंगे।

Meghalaya सरकार ने किया जमानत का विरोध

Meghalaya Government की ओर से पेश Solicitor General Tushar Mehta ने Sonam की जमानत का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत को बताया कि Sonam ने स्वयं पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। ऐसे में बाद में यह कहना कि गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए गए, कानूनी रूप से स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ्तारी मेमो में यदि कोई कमी है तो वह केवल एक क्लेरिकल त्रुटि है, जिससे पूरी गिरफ्तारी प्रक्रिया अवैध नहीं हो जाती।

अब Supreme Court के फैसले पर नजर

सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि कानून के अनुसार यदि कोई व्यक्ति रंगे हाथों पकड़ा जाता है या स्वयं पुलिस के सामने सरेंडर करता है, तो हर स्थिति में गिरफ्तारी के कारण अलग से बताना आवश्यक नहीं होता। अब इस बहुचर्चित मामले में सभी की नजर 23 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर टिकी है, जब Supreme Court यह तय करेगा कि Sonam Raghuvanshi की जमानत जारी रहेगी या उसे सरेंडर कर न्यायिक हिरासत में जाना होगा।