डिजिटल तकनीक से होगी स्वास्थ्य सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग, डिप्टी CM राजेंद्र शुक्ल ने दिए निर्देश
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध लैब सेवाओं एवं जांच प्रक्रियाओं को e-HMIS से इंटरकनेक्ट करने के निर्देश दिए।
भोपाल। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल (Deputy CM Rajendra Shukla) ने मंत्रालय में ई-एचएमआईएस (e-HMIS) की प्रगति एवं क्रियान्वयन की समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि e-HMIS को स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावी प्रबंधन का डिजिटल माध्यम बनाया जाए, जिससे मरीजों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलें और विभागीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रियल टाइम मॉनिटरिंग संभव हो सके।
आयुक्त लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा धनराजू एस. ने e-HMIS के वर्तमान क्रियान्वयन, विभिन्न मॉड्यूल्स की प्रगति, डिजिटल सेवाओं के एकीकरण और आगामी कार्ययोजना का प्रस्तुतिकरण दिया। बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा सुखवीर सिंह सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
मरीजों की डिजिटल केस हिस्ट्री हो उपलब्ध
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने निर्देश दिए कि e-HMIS में प्रत्येक मरीज का समुचित डिजिटल डेटाबेस और केस हिस्ट्री तैयार हो। मरीज के पूर्व उपचार, जांच, दवाओं और अन्य आवश्यक चिकित्सकीय जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहने से चिकित्सकों को उपचार संबंधी निर्णय लेने में सुविधा होगी और मरीज को बार-बार अपनी पिछली चिकित्सा जानकारी उपलब्ध कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड को इस प्रकार विकसित किया जाए कि मरीज के उपचार की निरंतरता बनी रहे और आवश्यकता के अनुसार अधिकृत चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं को संबंधित जानकारी समय पर उपलब्ध हो सके।
लैब सेवाओं को e-HMIS से जोड़ा जाए
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध लैब सेवाओं एवं जांच प्रक्रियाओं को e-HMIS से इंटरकनेक्ट करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीज की जांच के बाद रिपोर्ट तैयार होने की प्रक्रिया डिजिटल प्रणाली से जुड़ी हो, जिससे जांच रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध हो और चिकित्सक उसे उपचार के दौरान तत्काल देख सकें।
उन्होंने जांच रिपोर्ट की समयबद्धता, शुद्धता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया, जिससे विभिन्न स्वास्थ्य संस्थाओं में उपलब्ध जांच संबंधी जानकारी डिजिटल माध्यम से प्रभावी रूप से प्रबंधित की जा सके।

दवाओं की उपलब्धता और स्टॉक की रियल टाइम निगरानी
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने अस्पतालों एवं स्वास्थ्य संस्थाओं में दवाओं की उपलब्धता की समीक्षा के लिए e-HMIS को दवा वितरण एवं स्टॉक प्रबंधन प्रणाली से प्रभावी रूप से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, वितरण, खपत और स्टॉक की स्थिति की नियमित एवं रियल टाइम निगरानी हो, ताकि किसी भी स्वास्थ्य संस्था में आवश्यक दवाओं की कमी की स्थिति उत्पन्न न हो।
उन्होंने निर्देश दिए कि दवा स्टॉक की निगरानी के लिए डिजिटल डैशबोर्ड एवं आवश्यक अलर्ट आधारित व्यवस्था को प्रभावी बनाया जाए, जिससे वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक जानकारी समय पर प्राप्त हो सके और आवश्यकता के अनुसार तत्काल कार्रवाई की जा सके।
डेटा संकलन से आगे बढ़कर बने प्रबंधन का प्रभावी माध्यम
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि e-HMIS का उद्देश्य केवल डेटा संकलन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसका उपयोग स्वास्थ्य सेवाओं की योजना, निगरानी, विश्लेषण और बेहतर प्रबंधन के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वास्थ्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली, मरीजों को उपलब्ध सेवाओं, जांच, दवा वितरण सहित विभिन्न महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम स्थिति की जानकारी प्राप्त होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को आवश्यक सूचनाएं समय पर उपलब्ध हों, इसके लिए डैशबोर्ड आधारित मॉनिटरिंग व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाए। उपलब्ध डेटा के आधार पर कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई की जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो।

स्वास्थ्य संस्थाओं के बीच डिजिटल इंटरकनेक्टिविटी पर जोर
उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि e-HMIS के विभिन्न मॉड्यूल्स के बीच बेहतर इंटरकनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाए। मरीज का पंजीयन, उपचार, जांच, रिपोर्ट, दवा एवं अन्य संबंधित सेवाओं का डेटा एकीकृत डिजिटल प्रणाली में उपलब्ध होने से स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी। उन्होंने निर्देश दिए कि ई-एचएमआईएस के क्रियान्वयन में आने वाली तकनीकी एवं व्यावहारिक कठिनाइयों की पहचान कर उनका समयबद्ध समाधान किया जाए तथा स्वास्थ्य संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराया जाए।
रियल टाइम मॉनिटरिंग से बेहतर होगी जवाबदेही
उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि डिजिटल प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण लाभ रियल टाइम मॉनिटरिंग और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। स्वास्थ्य संस्थाओं से प्राप्त डिजिटल जानकारी के आधार पर अधिकारियों को सेवाओं की स्थिति का नियमित आकलन करने में सुविधा होनी चाहिए। इससे समस्याओं की पहचान और उनके समाधान की प्रक्रिया अधिक तेज होगी।
उन्होंने कहा कि e-HMIS के माध्यम से प्राप्त डेटा का उपयोग भविष्य की स्वास्थ्य योजनाओं एवं नीतिगत निर्णयों के लिए भी किया जाए, ताकि डेटा आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत किया जा सके। उन्होंने कहा कि e-HMIS को प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की डिजिटल रीढ़ के रूप में विकसित किया जाए, ताकि तकनीक के माध्यम से मरीजों को तेज, पारदर्शी, सुगम और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लक्ष्य को प्रभावी रूप से प्राप्त किया जा सके।

