Barrier-Free Toll Plaza : भोपाल-देवास रोड पर बिना रुके कटेगा टोल, फंदा प्लाजा पर बैरियर-लेस सिस्टम का ट्रायल
Barrier-Free Toll Plaza : बैरियर-लेस सिस्टम में फास्टैग रीडर के साथ कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं। ये उपकरण वाहन के गुजरते ही उसकी पहचान करेंगे।
Barrier-Free Toll Plaza : मध्य प्रदेश। भोपाल- देवास रोड पर अब वाहन बिना रुके टोल पार कर सकेंगे। मध्य प्रदेश में पहली बार बैरियर-लेस टोल सिस्टम का ट्रायल शुरू किया गया है। फिलहाल यह सुविधा फंदा टोल प्लाजा की एक लेन में शुरू हुई है। वाहन करीब 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भी गुजर सकेंगे। मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन यानी MPRDC के अनुसार, ट्रायल सफल रहा तो 1 जनवरी 2027 से तीनों टोल प्लाजा की सभी लेनों में यह व्यवस्था लागू की जा सकती है।
न बैरियर न रुकने की जरूरत
नई व्यवस्था में टोल लेन पर बूम बैरियर नहीं लगाया जाएगा। वाहनों को टोल कर्मचारी के पास रुकने की जरूरत नहीं होगी। गाड़ी के गुजरते ही सिस्टम उसकी पहचान कर लेगा। इसके बाद फास्टैग से टोल की राशि अपने आप कट जाएगी। इससे वाहन चालकों को रुकने और बार-बार ब्रेक लगाने से राहत मिलेगी। इससे समय और ईंधन की बचत होने की उम्मीद है।
कैमरे और सेंसर करेंगे वाहन की पहचान
बैरियर-लेस सिस्टम में फास्टैग रीडर के साथ कैमरे और सेंसर लगाए गए हैं। ये उपकरण वाहन के गुजरते ही उसकी पहचान करेंगे। कैमरे वाहन का नंबर और उसकी श्रेणी की जानकारी जुटाएंगे। इसके आधार पर टोल राशि तय होगी। भुगतान फास्टैग के जरिए अपने आप हो जाएगा। ANPR यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक भी इसमें मदद करेगी।
फास्टैग में पैसा नहीं तो ई-चालान
अगर किसी वाहन के फास्टैग में पर्याप्त राशि नहीं है, तो टोल तुरंत नहीं कट पाएगा। वाहन नंबर गलत दर्ज होने या तकनीकी समस्या की स्थिति में भी भुगतान अटक सकता है। ऐसे मामलों में वाहन मालिक को ई-चालान भेजा जाएगा। टोल राशि तीन दिन के भीतर जमा करनी होगी। समय पर भुगतान नहीं करने पर जुर्माने के साथ राशि वसूली जा सकती है।
वाहन चालकों को मिलेगा बड़ा फायदा
इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा टोल प्लाजा पर लगने वाली कतार से राहत होगा। वाहनों को बैरियर खुलने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। तेज गति से गुजरते समय भी टोल भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो सकेगी। बार-बार ब्रेक लगाने से बचने पर ईंधन की खपत भी कम हो सकती है। ट्रैफिक का दबाव घटने से यात्रा ज्यादा सुगम होने की उम्मीद है।
MPRDC की भी घटेगी लागत
बैरियर-लेस टोल सिस्टम से MPRDC को भी फायदा होगा। टोल वसूली में मानवीय हस्तक्षेप कम होगा। इससे कर्मचारियों और संचालन पर होने वाला खर्च घट सकता है। वाहनों की ऑटोमैटिक पहचान से टोल कलेक्शन को ज्यादा पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। FASTag और ANPR के इस्तेमाल से टोल चोरी और गलत वसूली पर भी नियंत्रण की उम्मीद है।
कई देशों में पहले से इस्तेमाल हो रही तकनीक
बैरियर-लेस टोलिंग तकनीक यूरोप और जर्मनी समेत कई देशों में पहले से इस्तेमाल की जा रही है। भारत में भी कुछ एक्सप्रेसवे और टोल प्लाजा पर इस तरह की व्यवस्था लागू की जा रही है। गुजरात, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान के कई टोल प्लाजा पर इसका इस्तेमाल शुरू हो चुका है। कई अन्य राज्यों में भी नए प्लाजा को इस तकनीक से जोड़ने की तैयारी चल रही है।
कई राज्यों में बढ़ रहा दायरा
गुजरात में NH-48 के कुछ टोल प्लाजा पर यह व्यवस्था लागू की गई है। दिल्ली के मुंडका, हरियाणा के घरौंडा और राजस्थान के दौलतपुरा, मनोहरपुरा तथा शाहजहांपुर टोल प्लाजा भी इस व्यवस्था से जुड़े हैं। गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और असम के कई अन्य टोल प्लाजा पर भी बैरियर-लेस सिस्टम लागू करने की तैयारी चल रही है।
तकनीक से बेहतर सड़क बनाने पर जोर
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने भोपाल में सीएसआईआर-एम्प्री का दौरा किया। उन्होंने कहा कि संस्थान की आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल लोक निर्माण विभाग की परियोजनाओं में बढ़ाया जाएगा। उन्होंने संस्थान को PWD का तकनीकी साझेदार बनाने की दिशा में काम करने की बात कही। मंत्री के अनुसार, नई तकनीक की मदद से मजबूत और टिकाऊ सड़कें तैयार करना विभाग की प्राथमिकता है।

