नितिन नबीन से मिले नरोत्तम मिश्रा: भोपाल का कार्यक्रम छोड़ अचानक पहुंचे दिल्ली, दतिया जिलाध्यक्ष पर अब भी सस्पेंस

नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली में बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की। भोपाल में पार्टी नेताओं से मुलाकात के बाद दिल्ली पहुंचने से सियासी अटकलें तेज हैं। वहीं दतिया जिला संगठन भंग होने के करीब एक महीने बाद भी नए जिलाध्यक्ष का फैसला नहीं हुआ है।

नितिन नबीन से मिले नरोत्तम मिश्रा: भोपाल का कार्यक्रम छोड़ अचानक पहुंचे दिल्ली, दतिया जिलाध्यक्ष पर अब भी सस्पेंस

भोपाल। मध्यप्रदेश की सियासत में पूर्व गृह मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर चर्चा में हैं। भोपाल में पार्टी नेताओं से मुलाकातों के बाद नरोत्तम मिश्रा अचानक दिल्ली पहुंचे और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए नितिन नबीन का मार्गदर्शन मिलने की बात कही है।

नरोत्तम मिश्रा की दिल्ली में हुई इस मुलाकात को दतिया उपचुनाव के बाद बीजेपी में चल रही संगठनात्मक हलचल से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि दिल्ली रवाना होने से पहले भोपाल में नरोत्तम मिश्रा के आवास पर बीजेपी के कई बड़े नेताओं की आवाजाही रही।

भोपाल में नेताओं से मुलाकात, फिर दिल्ली रवाना

नरोत्तम मिश्रा के भोपाल स्थित आवास पर पिछले दो दिनों में पार्टी के कई बड़े नेताओं ने पहुंचकर उनसे मुलाकात की। एक सितंबर को क्षेत्रीय संगठन मंत्री अजय जामवाल और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय उनके घर पहुंचे थे। इसके अगले दिन मंत्री विजय शाह ने भी नरोत्तम मिश्रा से मुलाकात की। इन मुलाकातों के बाद अब नरोत्तम मिश्रा का दिल्ली जाकर नितिन नवीन से मिलना सियासी तौर पर अहम माना जा रहा है।

मुलाकातों के बीच नरोत्तम मिश्रा की अगली राजनीतिक भूमिका को लेकर भी अटकलें तेज हैं। हालांकि, पार्टी की तरफ से अभी तक उनकी नई जिम्मेदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

दतिया हार के बाद बदला समीकरण

नरोत्तम मिश्रा के लिए दतिया का सियासी घटनाक्रम काफी अहम रहा है। 2023 के विधानसभा चुनाव में वे दतिया सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बाद दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया और आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया।

टिकट नहीं मिलने के बाद दतिया में नरोत्तम समर्थकों ने विरोध किया था। बीजेपी के तत्कालीन जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाहा समेत जिला संगठन के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था।

उपचुनाव के नतीजे आने के बाद बीजेपी ने दतिया की पूरी जिला इकाई को भंग कर दिया। अब करीब एक महीने बाद भी नए जिलाध्यक्ष का नाम तय नहीं हो पाया है।

दतिया जिलाध्यक्ष का फैसला क्यों अहम?

दतिया में बीजेपी के नए जिलाध्यक्ष की नियुक्ति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां संगठन को नए सिरे से खड़ा करने की चुनौती है। उपचुनाव से पहले टिकट को लेकर हुए विवाद और इसके बाद पार्टी की हार ने संगठन के भीतर कई सवाल खड़े किए हैं।

ऐसे में पार्टी किसे जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी देती है, इस पर सबकी नजर है। माना जा रहा है कि नए जिलाध्यक्ष के चयन में स्थानीय समीकरणों के साथ-साथ संगठन के भीतर अलग-अलग नेताओं के प्रभाव को भी ध्यान में रखा जाएगा।

यही वजह है कि नरोत्तम मिश्रा की दिल्ली में नितिन नवीन से मुलाकात को दतिया के संगठनात्मक फैसले से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि बैठक में दतिया जिलाध्यक्ष के नाम पर कोई अंतिम चर्चा या फैसला हुआ है।

नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता बढ़ी

दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी से नाराजगी से इनकार किया था। उन्होंने खुद को बीजेपी का समर्पित कार्यकर्ता बताया था। बाद में उपचुनाव में बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में भी वे सक्रिय रहे।

अब दतिया में पार्टी की हार और जिला संगठन भंग होने के बाद नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक सक्रियता फिर बढ़ती दिखाई दे रही है। भोपाल में लगातार पार्टी नेताओं से मुलाकात और उसके बाद दिल्ली में राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।

सियासी गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नरोत्तम मिश्रा को संगठन में कोई नई जिम्मेदारी मिलेगी या फिर पार्टी उन्हें किसी दूसरे रोल में इस्तेमाल करेगी?

फिलहाल बीजेपी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन दतिया के नए जिलाध्यक्ष का फैसला और नरोत्तम मिश्रा की अगली भूमिका, दोनों ही मध्यप्रदेश बीजेपी की आगे की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।