सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई : भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने का रास्ता साफ, सीलिंग पर नगर निगम-रहवासियों का पक्ष

Supreme Court Hearing : भोपाल में 21 साल पेंडिंग मास्टर प्लान का ड्रॉफ्ट सरकार जारी कर सकेगी। रहवासी इलाकों में कारोबार के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई और मास्टर प्लान को लेकर सरकार को हरी झंडी दी गई।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई : भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने का रास्ता साफ, सीलिंग पर नगर निगम-रहवासियों का पक्ष

Supreme Court Hearing : मध्य प्रदेशराजधानी भोपाल में 21 साल से पेंडिंग मास्टर प्लान का ड्राफ्ट सरकार जारी कर सकेगी। रहवासी इलाकों में कारोबार के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने मास्टर प्लान ड्राफ्ट जारी करने को हरी झंडी दे दी। हालांकि फाइनल प्रकाशन सुप्रीम कोर्ट को बताते हुए करना होगा। सीलिंग की कार्रवाई जारी रहेगी। अगली सुनवाई 23 नवंबर को होगी जिसमें नगर निगम और सरकार को अपनी रिपोर्ट पेश करनी होगी।

लंबी सुनवाई और सख्त आदेश

मामले में दोपहर 2 बजे से सुनवाई शुरू हुई जो 5 बजे बाद तक चली। कोर्ट ने सीलिंग की कार्रवाई में लापरवाही पर नाराजगी जताई और सख्ती से पालन करने के आदेश दिए। सरकार की तरफ से एडवोकेट ने भोपाल मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करने की बात रखी। इस पर कोर्ट ने मंजूरी दे दी। वर्तमान में साल 2005 के मास्टर प्लान के हिसाब से ही शहर में विकास कार्य हो रहे हैं। 21 साल में भी नया मास्टर प्लान लागू नहीं हो पाया है।

सील दुकानें दोबारा खुलने की शिकायत

सुनवाई से पहले रहवासियों की तरफ से 10 शिकायतें दर्ज कराई गई थीं। इनमें बताया गया कि नगर निगम ने अगस्त में जिन प्रतिष्ठानों को सील किया उनमें से अधिकांश सुबह बंद रहते हैं लेकिन शाम को खुल जाते हैं। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताई और आगे से ऐसा नहीं होने के सख्त आदेश दिए। सीलिंग मामले में अब कोई नई कमेटी नहीं बनाई जाएगी। पहले बनाई गई कमेटी को सुप्रीम कोर्ट ने भंग कर दिया था।

नोटिस और सीलिंग का सिलसिला

5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नगर निगम ने पूरे शहर में आवासीय क्षेत्र में चल रहे प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए थे। करीब 15 दिन तक नोटिस देने का दौर चला। लिस्टेड 62 हजार 500 में से 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए। फिर तीन दिन तक 190 प्रतिष्ठान बंद किए गए। व्यापारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रोक दी गई थी। पिछले 22 दिन से कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। रहवासी निगम पर पक्षपात का आरोप लगा रहे हैं।

दोनों पक्षों की मुख्य मांगें

रहवासी चाहते हैं कि रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां बंद की जाएं क्योंकि इससे शोर, भीड़, सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा की समस्याएं बढ़ रही हैं। व्यापारी मांग कर रहे हैं कि मास्टर प्लान जल्द लागू हो, मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान हो और लंबे समय से चल रहे कारोबार व रोजगार को बचाया जाए। सुनवाई पर नगर निगम और नगरीय प्रशासन के अधिकारी भी नजर रखे हुए थे।