10वीं की जिला टॉपर हुमेरा ने जिला प्रशासन से लगाई मदद की गुहार

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के मोमिनपुरा वार्ड की रहने वाली हुमेरा नूर अंसारी ने अपनी मेधा से यह साबित कर दिया कि हौसला हो तो दिव्यांगता को भी मात दी जा सकती है। हाल ही में घोषित एमपी बोर्ड कक्षा 10वीं के परिणामों में हुमेरा ने जिला स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर इतिहास रच दिया है।

10वीं की जिला टॉपर हुमेरा ने जिला प्रशासन से लगाई मदद की गुहार
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हुमेरा जन्म से ही श्रवणबाधित हैं, यानी सुनने में असमर्थ हैं। उनके जीवन की खामोशी को एक डिजिटल मशीन ने आवाज दी थी, जिसके सहारे उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। इसी मशीन की मदद से उन्होंने शिक्षकों के व्याख्यान सुने और दिन-रात मेहनत कर मध्य प्रदेश बोर्ड की परीक्षा में जिले की टॉपर बनने का गौरव हासिल किया। यह उपलब्धि केवल एक छात्रा की नहीं, बल्कि उस जीवटता की है, जिसने विपरीत परिस्थितियों को अपने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

सपनों के आगे ‘महंगी मशीन’ की दीवार
कहानी जितनी प्रेरणादायी है, उसका अगला पड़ाव उतना ही मार्मिक है। जिस मशीन के दम पर हुमेरा ने यह मुकाम हासिल किया, वह अब पूरी तरह खराब हो चुकी है। मुंबई के विशेषज्ञों के अनुसार, हुमेरा को अब एक उन्नत आधुनिक मशीन की आवश्यकता है, जिसकी कीमत 3.50 लाख रुपये से अधिक है।

हुमेरा का सपना एक डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना है, लेकिन उनके और परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी सुदृढ़ नहीं है कि वे इतनी बड़ी राशि का प्रबंध कर सकें। हुमेरा के पापा आपसी विवाद के चलते घर छोड़कर चले गए। हुमेरा अपनी माता रोशनआरा अंसारी और एक छोटी बहन के साथ चाचा के घर रहती हैं।

रोशनआरा अंसारी (हुमेरा की माता) ने कहा, “मेरी बेटी डॉक्टर बनना चाहती है। उसने बिना सुने ही जिले में नाम रोशन कर दिया। अगर उसे मशीन मिल जाए, तो वह दुनिया जीत सकती है। हमारी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं कि हम साढ़े तीन लाख की मशीन ला सकें। पढ़ाई में काफी दिक्कत हो रही है। दसवीं कक्षा में मेरी बेटी हुमेरा अंसारी ने टॉप किया है। उसका सपना है कि वह आगे पढ़ाई करे और डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करे। मुंबई से कोटेशन भी मिला है, जिसमें लिखा है कि मशीन 3 लाख 50 हजार की आएगी और डायरेक्ट उनके खाते में पेमेंट जाएगा।”

कलेक्ट्रेट पहुंची ‘बुरहानपुर की बेटी’
मंगलवार को हुमेरा अपनी मां और स्थानीय पार्षद के साथ जिला कलेक्टर हर्ष सिंह के पास पहुंचीं। अपनी उपलब्धियों के प्रमाण पत्र और खराब मशीन को लेकर उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। हुमेरा की आंखों में डॉक्टर बनने की चमक तो है, लेकिन कानों तक आवाज न पहुंचने की बेबसी भी साफ झलकती है।

बुरहानपुर जिले की टॉपर हुमेरा अंसारी ने बताया, “मैं सेवा सदन स्कूल में पढ़ाई करती हूं। दसवीं कक्षा में मैं टॉप आई हूं। एमपी बोर्ड में 97.8% अंक प्राप्त हुए हैं। मेरे कान की मशीन खराब हो चुकी है, जिसके कारण मुझे सुनाई देने में काफी परेशानी हो रही है। इसलिए मैं कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर प्रशासन से मदद मांगने आई हूं। मुंबई से एक लेटर भी आया है कि मशीन 3 लाख 50 हजार की आ रही है।

पढ़ाई में काफी परेशानी होती है, सुनाई नहीं देता। स्कूल में जो टीचर पढ़ाते हैं, समझ नहीं आता। मशीन खराब होने के कारण आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर है कि परिवार वाले मशीन नहीं खरीद सकते। अगर मुझे मशीन मिल जाएगी, तो बहुत मेहनत करके अपने जिले का नाम रोशन करूंगी। मेरी आगे की पढ़ाई भी अच्छी होगी और मेरा भविष्य बनेगा। मैं एक डॉक्टर बनना चाहती हूं।”

स्थानीय वार्ड पार्षद ने बताया कि हुमेरा ने न केवल अपने वार्ड, बल्कि पूरे जिले को गौरवान्वित किया है। प्रशासन और शासन को एक ऐसी मेधावी छात्रा की मदद के लिए तत्काल आगे आना चाहिए, जो तकनीकी बाधा के कारण अपनी प्रतिभा को खोने की कगार पर है।

प्रशासन से उम्मीद
बुरहानपुर की जनता और हुमेरा के परिवार को अब जिला प्रशासन और मुख्यमंत्री सहायता कोष से उम्मीद है। यदि समय रहते मदद मिलती है, तो हुमेरा की खामोश दुनिया फिर से ध्वनियों से भर जाएगी और वह कल की एक सफल डॉक्टर बनकर देश की सेवा कर सकेगी।

हुमेरा की कहानी भारत की उस युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करती है, जो अभावों के बीच भी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना जानती है। यह खबर एक आह्वान है—

  • सरकार के लिए कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और ‘दिव्यांग सशक्तिकरण’ जैसे अभियान हुमेरा जैसी बेटियों के लिए संजीवनी बनें।
  • समाज के लिए कि यदि हम साथ आएं, तो साढ़े तीन लाख रुपये की एक मशीन एक भविष्य के डॉक्टर को बचा सकती है।
  • युवाओं के लिए कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन हों, मेहनत का कोई विकल्प नहीं है।