मऊगंज के आंगनबाड़ी केंद्रों में लटक रहे ताले, बच्चों और गर्भवती महिलाओं तक नहीं पहुंच रहा पोषण आहार
मऊगंज में महिला एवं बाल विकास विभाग की पोल खोलती तस्वीर सामने आई है। जिले के मऊगंज, हनुमना और नईगढ़ी जनपद क्षेत्र के दर्जनों आंगनबाड़ी केंद्रों में ताले लटक रहे हैं। नौनिहालों को कुपोषण से बचाने और गर्भवती महिलाओं को पोषण देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना यहां कागजों में सिमट कर रह गई है। जिम्मेदार अधिकारी मॉनिटरिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति कर रहे हैं, जबकि जमीनी हकीकत बद से बदतर है।
रिपोर्टर: राजेंद्र पयासी
जिले के तीनों जनपद क्षेत्रों में स्थिति एक जैसी है, लेकिन नईगढ़ी ब्लॉक में हालात अत्यंत गंभीर हैं। ब्लॉक मुख्यालय से महज 8 से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित आंगनबाड़ी केंद्र बंद पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि केंद्रों पर न तो कार्यकर्ता आती हैं और न ही सहायिका। जो केंद्र खुले भी हैं, वे भगवान भरोसे चल रहे हैं। कहीं सिर्फ कार्यकर्ता तो कहीं अकेली सहायिका बच्चों को संभाल रही है। पंजीकृत बच्चों की संख्या के मुकाबले 20 प्रतिशत बच्चे भी केंद्र नहीं पहुंच रहे हैं।
निरीक्षण के नाम पर हो रहा बड़ा खेल
जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों की जमीनी हकीकत देखी जाए तो जिस तरह से अधिकतर केंद्रों में ताले लटक रहे हैं, कई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका तथा सुपरवाइजर शहरों से नौकरी कर रहे हैं। शासन की योजना का लाभ हितग्राहियों को नियम अनुसार नहीं मिल रहा है, जिससे जाहिर होता है कि अधिकारियों और समूह संचालकों के बीच गहरी साठगांठ चल रही है।
आरोप है कि जिले के नईगढ़ी विकासखंड में मॉनिटरिंग के नाम पर तथाकथित समूह संचालक का निजी वाहन सरकारी काम में लगा दिखाकर हर महीने हजारों रुपये का आहरण किया जा रहा है। बिल वाउचर में निरीक्षण दिखाया जाता है, लेकिन हकीकत में गाइडलाइन अनुसार कोई अधिकारी केंद्र तक पहुंचता ही नहीं।

नाम न छापने की शर्त पर एक कर्मचारी ने बताया, “साहब एवं सुपरवाइजर महीने में योजना अनुसार विजिट नहीं करते। ऊपर से नीचे तक सबको पता है कि केंद्र बंद हैं, लेकिन फर्जी रिपोर्ट बनाकर भेज दी जाती है।”
बच्चों की थाली में डाका, पोषण आहार में भारी अनियमितता
समूह संचालकों के आपसी समझौते के कारण हितग्राहियों को मिलने वाले नाश्ता और भोजन में बड़े पैमाने पर घपला हो रहा है। मेन्यू के अनुसार बच्चों को मूंग दाल की खिचड़ी, दूध, फल और अंडा मिलना चाहिए, लेकिन हकीकत में या तो घटिया क्वालिटी का खाना दिया जाता है या फिर रजिस्टर में एंट्री कर राशन की कालाबाजारी कर दी जाती है। गर्भवती महिलाओं को मिलने वाला टेक होम राशन भी सरकार की योजना अनुसार पूरा नहीं मिल रहा है।
जिम्मेदार ही नदारद, कौन ले सुध
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि विभाग के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी खुद मुख्यालय में निवास नहीं करते। अधिकतर सीडीपीओ से लेकर सुपरवाइजर तक औपचारिकता पूरी कर शहर चले जाते हैं। शायद इसी का फायदा उठाकर फील्ड का स्टाफ मनमानी कर रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने पर उल्टा धमकाया जाता है। “हम गरीब कहां जाएं? बच्चे को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार खाना दे रही है, पर वो भी इन लोगों ने खा लिया।” कई आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। कई जगह लोगों का अवैध कब्जा है, लेकिन विभाग के अधिकारी अपने कर्तव्य का पालन नहीं कर रहे हैं।
केंद्रों में लटकते ताले, अधिकारी ने कहा फोटो भेजो तो नोटिस देंगे
महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही चरम पर है। शासन की महत्वाकांक्षी योजना को जिम्मेदार अधिकारी खुद पलीता लगा रहे हैं। ताजा मामला जिले के नईगढ़ी विकासखंड के आंगनबाड़ी केंद्र बेलहा नानकार एवं आंगनबाड़ी केंद्र खर्रा-192 का है, जहां सोमवार को दिन के 11 से 2 बजे के बीच ताले लटकते मिले। ग्रामीणों की सूचना पर जब पब्लिक वाणी की टीम मौके पर पहुंची तो केंद्रों के बाहर सन्नाटा पसरा और केंद्र बंद मिला।
इस गंभीर लापरवाही को लेकर जब नईगढ़ी परियोजना अधिकारी से फोन पर बात की गई तो उन्होंने जवाबदेही लेने के बजाय गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया। परियोजना अधिकारी ने कहा, “आप बंद केंद्र की फोटो भेजें, हम संबंधित कार्यकर्ता को नोटिस देंगे।”
सवाल यह है कि मॉनिटरिंग करना किसकी जिम्मेदारी है? क्या अब मीडिया और आम जनता केंद्रों की निगरानी करेगी? विभाग हर महीने निरीक्षण के नाम पर वाहन बिल, टीए-डीए के हजारों रुपये आहरित कर रहा है। फिर भी अधिकारी को पता ही नहीं कि उसके ब्लॉक में कौन सा केंद्र खुला है और कौन सा बंद।
जब अधिकारी ही फोटो मांगकर कार्रवाई की बात कर रहे हैं, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि मॉनिटरिंग का स्तर क्या है और महिला बाल विकास की जमीनी हालत कैसे चल रही है।

