मऊगंज में किसानों का अनोखा कदम: सड़क निर्माण के विरोध में खेत में ही आमरण अनशन पर बैठे किसान
मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले के नईगढ़ी तहसील अंतर्गत ग्राम बूढ़ा में किसानों ने अपनी पट्टे की जमीन बचाने के लिए अनोखा आंदोलन शुरू कर दिया है। किसानों का आरोप है कि कुछ लोगों ने उनकी कृषि भूमि पर जबरन मुरुम डालकर सड़क निर्माण शुरू कर दिया।
संवाददाता: राजेंद्र पयासी
मऊगंज। मध्य प्रदेश के नवनिर्वाचित मऊगंज जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। जिले की नईगढ़ी तहसील क्षेत्र के ग्राम बूढ़ा में किसानों ने अपनी पट्टे की जमीन बचाने के लिए एक अनोखा कदम उठाया है। गाँव के ही कुछ तथाकथित रसूखदारों द्वारा जबरन किसानों की निजी पट्टे की जमीन पर मुरूम डालकर सड़क बनाने से आक्रोशित ग्रामीण सोमवार सुबह से खेत में ही आमरण अनशन पर बैठ गए हैं।
खेत ही बना 'अनशन स्थल'
आमतौर पर धरना-प्रदर्शन तहसील कार्यालय या कलेक्ट्रेट परिसर में देखने को मिलते हैं, लेकिन यहाँ किसानों ने विरोध का अलग रास्ता चुना। ब्लॉक कांग्रेस कमेटी नईगढ़ी के अध्यक्ष एडवोकेट अखिलेश पटेल के नेतृत्व में दर्जनों किसान सोमवार सुबह सीधे अपने खेतों में पहुँचे और वहीं दरी बिछाकर आमरण अनशन पर बैठ गए।
किसानों का साफ कहना है कि: "जब हमारी जमीन पर ही अन्याय हो रहा है, तो लड़ाई भी इसी जमीन से लड़ी जाएगी।"
क्या है पूरा मामला..
ग्राम बूढ़ा के निवासियों का आरोप है कि कुछ लोगों ने कब्जे की नीयत से उनकी कीमती कृषि भूमि पर बिना किसी सूचना और सहमति के जबरन मुरूम डाल दिया और सड़क निर्माण शुरू कर दिया। इस अवैध निर्माण से किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि पूरी तरह बर्बाद हो रही है। किसानों का यह भी आरोप है कि इस संबंध में कई बार शिकायत करने के बाद भी प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जिससे तंग आकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
आंदोलनकारी किसानों की मुख्य माँगें...
1.पट्टे की जमीन से अवैध मुरूम और निर्माण तुरंत हटाया जाए।
2.किसानों की सहमति के बिना जमीन बर्बाद करने वाले दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
3.पीड़ित किसानों को सुरक्षा और न्याय का आश्वासन मिले।
इन किसानों ने संभाला मोर्चा..
भूमि स्वामी सुरेश मिश्रा, रामजनी तिवारी, विजय मिश्रा, राजीव लोचन मिश्रा, कन्हैया लाल मिश्रा, राजीव मिश्रा, भागवत प्रसाद मिश्रा, और हृदय लाल मिश्रा समेत दर्जनों किसान अनशन पर डटे हुए हैं।
एडवोकेट अखिलेश पटेल (अध्यक्ष, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी नईगढ़ी) ने कहा: "यह गरीब किसानों की रोजी-रोटी का सवाल है। किसी की निजी पट्टे की जमीन पर जबरन कब्जा करना सरासर आपराधिक कृत्य है। प्रशासन को इस संवेदनशील मामले को तुरंत संज्ञान में लेना चाहिए।"
प्रशासन की चुप्पी से बढ़ा आक्रोश..
हैरानी की बात यह है कि समाचार लिखे जाने तक कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या राजस्व अमला किसानों की सुध लेने मौके पर नहीं पहुँचा था। अनशन पर बैठे किसानों ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी सुनवाई नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और भी उग्र रूप अख्तियार करेगा।
गौरतलब है कि मऊगंज जिले में भूमि विवाद को लेकर पहले भी कई टकराव और आंदोलन सामने आ चुके हैं, लेकिन खेत को ही अनशन स्थल बना देने का यह जिला मुख्यालय में पहला अनोखा मामला है।

