'ब्राह्मणों के बिना BJP का विस्तार संभव नहीं', फिर आज उपेक्षा क्यों? BJP पर बरसे ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा

भाजपा के राज्यसभा चयन पर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा का बयान- "ब्राह्मणों के बिना भाजपा का विस्तार संभव नहीं था, फिर आज उपेक्षा क्यों?" "राज्यसभा में फिर नहीं मिला स्थान, ब्राह्मण समाज ने भाजपा से मांगा जवाब"

'ब्राह्मणों के बिना BJP का विस्तार संभव नहीं', फिर आज उपेक्षा क्यों? BJP पर बरसे ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा
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मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूची ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया है कि पार्टी ने ब्राह्मण समाज को पूरी तरह से हाशिए पर धकेलने का मन बना लिया है। जिस समाज ने जनसंघ से लेकर भाजपा को खड़ा करने, विस्तार देने और सत्ता तक पहुंचाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, आज उसी समाज की लगातार उपेक्षा की जा रही है।

क्या ब्राह्मण राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के योग्य नहीं हैं?

हम यह प्रश्न पूछना चाहते हैं कि आखिर मध्यप्रदेश भाजपा में ऐसा कौन-सा अपराध ब्राह्मण समाज ने कर दिया है कि पिछले एक दशक से उसे राज्यसभा में प्रतिनिधित्व के योग्य नहीं समझा जा रहा? अटल बिहारी वाजपेयी, लक्ष्मीनारायण शर्मा, रघुनंदन शर्मा, प्रभात झा और शिवप्रताप चिंपुरिया जैसे नेताओं की परंपरा वाले समाज को आज राजनीतिक रूप से अप्रासंगिक मान लिया गया है।

हमें आश्चर्य है कि डॉ. नरोत्तम मिश्रा जैसे राष्ट्रीय स्तर के नेता, अनूप मिश्रा जैसे अनुभवी जनप्रतिनिधि और सुरेश पचौरी जैसे वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्तित्व पार्टी को राज्यसभा के योग्य नहीं लगे। क्या भाजपा नेतृत्व के पास इस प्रश्न का कोई उत्तर है?

ब्राह्मणों को नजरअंदाज किया जा रहा है

भाजपा लंबे समय तक ब्राह्मण और वैश्य समाज के समन्वय की पार्टी कहलाती रही है, लेकिन आज स्थिति यह बन गई है कि ब्राह्मण समाज को केवल वोट देने और पार्टी के लिए काम करने तक सीमित कर दिया गया है। सम्मान और प्रतिनिधित्व के समय उसे लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।

हम स्पष्ट कहना चाहते हैं कि ब्राह्मण समाज किसी पद का भूखा नहीं है, लेकिन लगातार अपमान और उपेक्षा को भी अनंत काल तक सहन नहीं करेगा। समाज के स्वाभिमान की भी एक सीमा होती है। यदि पार्टी नेतृत्व को लगता है कि ब्राह्मण समाज की कोई राजनीतिक उपयोगिता नहीं रह गई है, तो उसे इस विषय पर स्पष्ट घोषणा कर देनी चाहिए।

घटते प्रतिनिधित्व पर जताई नाराजगी

अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज भाजपा नेतृत्व से मांग करता है कि वह प्रदेश में ब्राह्मण समाज के घटते राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर अपना पक्ष स्पष्ट करे और भविष्य में इस ऐतिहासिक अन्याय को समाप्त करने के लिए ठोस कदम उठाए।

ब्राह्मण समाज ने हमेशा राष्ट्रहित और विचारधारा को दलगत स्वार्थ से ऊपर रखा है, लेकिन किसी भी समाज की उपेक्षा और अपमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वीकार्य नहीं हो सकता।