दिग्विजय सिंह के बयान ने कांग्रेस में खींची दो धड़े की रेखा, RSS की तारीफ से पार्टी में माहौल गर्म
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने BJP और RSS की तारीफ करते हुए परोक्ष रूप से कांग्रेस संगठन पर तंज कसा है. जिसके बाद पार्टी दो धड़ों में बट गई. एक गुट दिग्विजय सिंह के साथ खड़ा नजर आया तो दूसरा गुट उनके विरोध में. हालांकि उनके इस पोस्ट के बाद से संगठन में बदलाव की आवाजें उठने लगीं हैं.
कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के RSS और BJP संगठन की तारीफ के कांग्रेस में सियासत तेज हो गई है. कांग्रेस में ही दो गुट हो गए हैं. एक दिग्विजय सिंह के साथ है तो दूसरा उनके खिलाफ. शशि थरूर जैसे नेता उनके पक्ष में खड़े हुए नजर आ रहे हैं तो. सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा जैसे नेता खुलकर उनके विरोध में उतर गए हैं.
दिग्विजय सिंह ने भले ही संध की तारीफ करके अपनी ही पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा कर दी है. लेकिन उनके इस बयान से पार्टी के अंदर संगठनात्मक बदलाव की चर्चा होने लगी है. कहीं न कहीं दिग्विजय सिंह ने संध और BJP के संगठन की तारीफ करके कांग्रेस के संगठन पर तंज कसा है.
दिग्विजय सिंह के बयान से कांग्रेस दो धड़ों में बंटी
दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस में पवन खेड़ा, सलमान खुर्शीद, मणिक्कम टैगोर जैसे नेताओं ने विरोध किया तो शशि थरूर साथ खड़े नजर आए. यानी कांग्रेस के भीतर स्पष्ट दो फाड़ साफतौर पर दिख रही है. एक पक्ष जो आत्मनिरीशक्षण की बात कर रहा है. और दूसरा जो इसे वैचारिक समझौता मान रहा है.
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पार्टी के 140वें स्थापना दिवस के दौरान शशि थरूर ने अपने पार्टी सहयोगी दिग्विजय सिंह के विचारों का समर्थन किया. थरूर ने कहा कि संगठन को मजबूत किया जाना चाहिए. शशि थरूर ने कहा कि हमारा 140 साल का इतिहास है, और हम इससे बहुत कुछ सीख सकते हैं. उन्होंने कहा कि हम खुद से भी सीख सकते हैं. उन्होंने आगे कहा कि हमारे संगठन में अनुशासन होना चाहिए.
दिग्विजय के विरोध में खड़े खुर्शीद-खेड़ा और टैगोर
पूर्व विदेश मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और पवन खेड़ा ने दिग्विजय सिंह के रूख से अलग राय रखी. RSS पर निशाना साधते हुए पवन खेड़ा ने कहा- संघ को 1948 में महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे से जोड़ा. कहा- संघ से कुछ नहीं सीखा जा सकता. गोडसे के लिए कुख्यात संगठन गांधी के बनाए संगठन गांधी के बनाए संगठन को क्या सिखा सकता है. सलमान खुर्शीद ने कहा कि एक डाकू भी ताकतवर होता है. तो क्या आप अपने बच्चे से कहेंगे कि तुम भी डाकू बन जाओ? उन्होंने कहा कि हम (कांग्रेस) उस तरह से खुद को मजबूत नहीं करना चाहते जिस तरह से RSS मजबूत है. उन्होंने कहा कि हम RSS के विरोधी हैं. दिग्विजय सिंह और राहुल गांधी भी संघ का विरोध करते हैं. संघ की जगह हम एक ऐसा समाज और संगठन बनाना चाहते हैं, जिसमें वे कमियां न हों जो हमें लगता है कि RSS में हैं.
कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने दिग्विजय सिंह के RSS की संगठनात्मक ताकत की तारीफ करने की आलोचना करते हुए कहा- इसे एक मशहूर सेल्फ-गोल बताया. टैगोर ने RSS की तुलना अल-कायदा से की, यह कहते हुए कि दोनों नफरत फैलाते हैं. और इस बात पर जोर दिया कि कांग्रेस पार्टी, अपने 140 साल के इतिहास के साथ, एकता और जन आंदोलन के लिए एक मॉडल होनी चाहिए, और इसके लिए उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा पार्टी में किए गए बदलावों का उदाहरण दिया.
कांग्रेस के संगठन में बदलाव की उठी आवाज
दिग्विजय सिंह बयानों ने कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के भीतर केंद्रीकरण और संगठन की कमजोरी जैसी स्थिति को सार्वजनिक कर दिया है. इसके बाद से कांग्रेस संगठन में बदलाव की मांग तेज होती नजर आ रही है. कांग्रेस जहां संघ को अपनी मुख्य वैचारिक चुनौती मानती है, जिसके चलते कुछ लोग उसके तरह संगठन बनाने के पक्ष में नहीं है, लेकिन संगठन में बदलाव की बात जरूर करते नजर आ रहे हैं. वहीं, पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं अगर संघ के 'संगठन मॉडल' के संबंध में एक सुर मिलाते हैं. इससे कार्यकर्ताओं में नेगेटिव मैसेज जाता है. यही वजह है कि दिग्विजय सिंह को अपने बयान पर सफाई देनी पड़ी है. हालांकि, कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव की बहस फिर से एक बार जन्म दे दिया है. निश्चित रूप से कांग्रेस हाई कमान पर सुधार का दबाव बढ़ेगा.
कांग्रेस संगठन में बदलाव की मांग क्यों उठी?
कांग्रेस का सियासी आधार लगातार सिमटता जा रहा है. 2014 के बाद से कांग्रेस एक के बाद एक राज्य की सत्ता से बेदखल होती जा रही है. कांग्रेस लगातार तीन लोकसभा चुनाव हार चुकी है और मौजूदा समय में सिर्फ तीन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है. उत्तर भारत से पार्टी पूरी तरह से साफ है, उसके पीछे बड़ी वजह कांग्रेस संगठन का जमीनी स्तर पर ना होना.कांग्रेस के अंदर संगठनात्मक बदलाव की मांग यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने संगठनात्मक बदलाव की मांग की है. आठ दिसंबर में ओडिशा के पूर्व विधायक मोहम्मद मोकिम ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर पार्टी में 'ओपन-हार्ट सर्जरी' की मांग की थी. सोनिया गांधी को लिखे पत्र में मोहम्मद मोकिम ने ओडिशा में लगातार छह और लोकसभा में तीन चुनावों में हार पर अपनी बात रखी थी.
जी-23 ने उठाई थी कांग्रेस में बदलाव की मांग
नवंबर 2025 में बिहार विधानसभा चुनावों से पहले भी इसी तरह की चिंताएं उठाई गई थीं, जहां सीट बंटवारे की बातचीत के दौरान नेतृत्व' और कार्यकर्ताओं के बीच की दूरी साफ दिखाई दे रही थी. 2020 की शुरुआत में, पार्टी के 23 सीनियर नेताओं के एक ग्रुप, ने सोनिया को एक लेटर लिखकर पार्टी में 'सामूहिक और सबको साथ लेकर चलने वाली लीडरशिप' की मांग की थी.
कांग्रेस संगठन में बदलाव की मांग करने वाले इस ग्रुप को जी-23 का नाम दिया गया है. जी-23 से कुछ असंतुष्टों को पार्टी से निकाल दिया गया तो कुछ ने खुद ही पार्टी छोड़ दी. कांग्रेस के काम करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं आया. ऐसे में फिर से एक बार पार्टी में बदलाव की मांग दिग्विजय ने इशारों-इशारों में उठा दी है.राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दिग्विजय सिंह कांग्रेस के सबसे अनुभवी रणनीतिकारों में से एक हैं. इसके अलावा मध्य प्रदेश की राजनीति में उनकी पैठ मजबूत है. वहीं, शशि थरूर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पार्टी का एक बौद्धिक चेहरा हैं. शशि थरूर कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ चुके हैं और इसके अलावा पार्टी के भीतर लोकतंत्र की पैरवी करते रहे हैं.कांग्रेस संगठन को मजबूत करने के दिशा में राहुल गांधी ने पहल भी किया है. गुजरात से लेकर मध्य प्रदेश तक कांग्रेस में जमीनी कार्यकर्ताओं को जिला अध्यक्ष बनाया गया है ताकि जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत किया जा सके.
shivendra 
