मऊगंज में ताले में बंद मिला आंगनबाड़ी केंद्र, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों पर उठे सवाल
मऊगंज के नईगढ़ी क्षेत्र में आंगनबाड़ी केंद्र माड़ौ क्रमांक-1 बंद मिला. महिला एवं बाल विकास विभाग की मॉनिटरिंग पर सवाल उठे हैं. ग्रामीणों ने नियमित संचालन और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है.
राजेंद्र पयासी | मऊगंज
मऊगंज जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है. पब्लिक वाणी टीम की पड़ताल में सामने आया कि कई आंगनबाड़ी केंद्र समय पर संचालित नहीं हो रहे हैं, जबकि अधिकारियों की मॉनिटरिंग सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आ रही है.
बीते माह भी कई आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताले लटके मिले थे. उस समय परियोजना अधिकारी ने बंद केंद्रों के फोटो और वीडियो उपलब्ध कराने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था. इसके बावजूद 27 जुलाई को दोपहर करीब 1 बजे नईगढ़ी क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र माड़ौ क्रमांक-1 पर फिर ताला लगा मिला. केंद्र पर न तो बच्चे मौजूद थे और न ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा सहायिका दिखाई दीं.
सूत्रों के अनुसार जिले में महिला एवं बाल विकास विभाग के करीब 80 प्रतिशत सुपरवाइजर और कुछ परियोजना अधिकारी मुख्यालय पर निवास नहीं करते. कई अधिकारी दूसरे जिलों से आना-जाना करते हैं, जबकि नियमों के अनुसार मुख्यालय पर रहना अनिवार्य है. इससे फील्ड स्तर पर निरीक्षण और निगरानी प्रभावित हो रही है.
अनियमित संचालन का सीधा असर पोषण आहार, टीकाकरण, प्री-स्कूल शिक्षा और महिलाओं एवं बच्चों के लिए संचालित अन्य सरकारी योजनाओं पर पड़ रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है.
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी नईगढ़ी रवि शंकर पांडेय से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित निरीक्षण कराया जाए, मुख्यालय से अनुपस्थित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए तथा सभी केंद्रों का नियमित संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि महिलाओं और बच्चों को शासन की योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके.
Anubhav Dubey 
