मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश ने चीन नीति पर उठाए 4 सवाल
BRICS Summit 2026 में PM मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चीन नीति पर सवाल उठाए. लद्दाख, अरुणाचल, ऑपरेशन सिंदूर और व्यापार घाटे को लेकर सरकार से जवाब मांगा.
नई दिल्ली: 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार की चीन नीति पर सवाल खड़े किए हैं. कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चार सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि चीन के साथ संबंध सामान्य करने के नाम पर भारत अपने रणनीतिक हितों से समझौता कर रहा है.
दरअसल, 12 सितंबर को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच करीब 50 मिनट तक बातचीत हुई. बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों में हो रही प्रगति का स्वागत किया. पीएम मोदी ने कहा कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है.
जयराम रमेश ने पूछे ये चार सवाल
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में 19 जून 2020 को चीन को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के बयान का हवाला देते हुए सवाल किया कि क्या उस बयान से भारत की स्थिति कमजोर नहीं हुई? उन्होंने दूसरा सवाल लद्दाख और अरुणाचल प्रदेश से जुड़ा उठाया. रमेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने चीन को इन इलाकों में क्षेत्रीय बढ़त हासिल करने की अनुमति क्यों दी.
कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को चीन के कथित समर्थन को लेकर भारत का रुख नरम क्यों हुआ. उन्होंने 2025 में सैन्य अधिकारियों की ओर से चीन की भूमिका को लेकर दिए गए बयानों और अगस्त 2026 में पूर्व CDS जनरल अनिल चौहान के बयान के बीच अंतर का जिक्र किया.
अब जबकि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी द्विपक्षीय शिखर बैठक समाप्त हो चुकी है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ये चार अनुत्तरित सवाल हैं, जिनके जवाब भारत अब भी जानना चाहता है।
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) September 13, 2026
उन्होंने सीमा पर अतिक्रमण और ऑपरेशन सिंदूर में चीन की भूमिका को लेकर हमारी स्थिति को कमजोर क्यों किया… pic.twitter.com/CzMkQBVfoL
चीन के साथ व्यापार घाटे पर भी सवाल
जयराम रमेश ने भारत-चीन व्यापार घाटे को लेकर भी केंद्र सरकार को घेरा. उन्होंने दावा किया कि वित्त वर्ष 2025-26 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा रिकॉर्ड 112.6 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसका असर भारतीय उद्योग और खासकर MSME सेक्टर पर पड़ रहा है.
अरुणाचल और ब्रह्मपुत्र परियोजना का मुद्दा
कांग्रेस ने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश पर दावे और वहां के स्थानों के नाम बदलने की कोशिशों को लेकर भी चिंता जताई. रमेश ने ब्रह्मपुत्र नदी के 'ग्रेट बेंड' क्षेत्र में प्रस्तावित मेदोग परियोजना का जिक्र करते हुए इसे पूर्वोत्तर भारत की जल सुरक्षा से जोड़कर सवाल उठाया।
वहीं, मोदी-शी बैठक में दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया. चीन की ओर से भी भारत और चीन को साझेदार बताते हुए आर्थिक सहयोग, लोगों के बीच संपर्क और सीमा विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की बात कही गई. कांग्रेस ने इन मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगा है. हालांकि, जयराम रमेश के आरोपों पर केंद्र सरकार या बीजेपी की तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी.

