द्वितीय सिंधी फिल्म महोत्सव-2 का धमाकेदार आगाज

सिंधु यूथ विंग द्वारा चेटी चंद महोत्सव 2026 के अवसर पर रीवा में आयोजित द्वितीय सिंधी फिल्म महोत्सव-2 का शानदार शुभारंभ हुआ।

द्वितीय सिंधी फिल्म महोत्सव-2 का धमाकेदार आगाज

रीवा: सिंधु यूथ विंग की ओर से चेटी चंद महोत्सव के अवसर पर आयोजित द्वितीय सिंधी फिल्म महोत्सव-2 (Second Sindhi Film Mahotsav Part-2) का शानदार शुभारंभ हो गया है। यह तीन दिवसीय फिल्म फेस्टिवल सिंधी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भाषा, रीति-रिवाज और सामाजिक संदेशों को नई ऊर्जा देने का एक अनूठा प्रयास है।

रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा के मुख्य आतिथ्य में समदड़िया सिनेमा गोल्ड में प्रीमियर शो की शुरुआत हुई, जहां सिनेमा की रोशनी ने समाज की जड़ों को और मजबूत किया। यह आयोजन न सिर्फ मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि सिंधी समाज की एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक गौरव को जीवंत कर दिया।

फिल्मों की खासियत:
इस महोत्सव में दो हृदयस्पर्शी सिंधी फिल्में प्रदर्शित की जा रही हैं ।
फाथो आ भगवान: 
आस्था, भावनाओं और परिवार की मजबूत कहानी वाली यह फिल्म दर्शकों को गहराई से छूती है।
बयो छा खपे: 
दोस्ती, प्यार, ड्रामा और कॉमेडी से भरपूर यह मनोरंजक कृति हंसी-मजाक के साथ जीवन के सबक सिखाती है। ये फिल्में सिंधी बोली और सिंधियत को बढ़ावा देने वाली हैं, जो धर्म, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों पर आधारित हैं। दर्शक मंत्रमुग्ध होकर इनकी कहानी में खो गए।

भव्य उद्घाटन के प्रमुख अतिथि:

मुख्य अतिथि:
 रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा
विशिष्ट अतिथि: 
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. नरेश बजाज और सिंधी सेंट्रल पंचायत के अध्यक्ष दादा प्रहलाद सिंह
उपस्थित रहे: 
विंध्य क्षेत्र (रीवा, सीधी, सतना, मैहर, नागौद, जैतवारा) से समाज के वरिष्ठजन, युवा, विभिन्न संस्थाओं के पदाधिकारी और समाजसेवी।

फूलों की मालाओं और उत्साह से सजा यह मंच एक परिवार की तरह एकजुट हुआ, जहां सामाजिक समरसता का मार्मिक संदेश फैला, एक परिवार, एक धड़कन, अनंत बंधन।

आगे का कार्यक्रम:
आयोजन समिति ने सभी भाई-बहनों से अपील की है कि 9 मार्च और 11 मार्च 2026 को परिवार सहित इन प्रेरणादायक फिल्मों को जरूर देखें। यह सिर्फ फिल्में नहीं, बल्कि सिंधी संस्कृति को संजोने और नई पीढ़ी को जागरूक बनाने का संकल्प है।

सिंधु यूथ विंग हमेशा की तरह समाज की आकांक्षाओं को साकार करने में आगे है। यह महोत्सव सिंधी समाज के लिए गर्व का क्षण है, जहां संस्कृति जीवित रहती है, भाषा फलती-फूलती है और एकता की मिसाल कायम होती है।