महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल लोकसभा में गिरा, मोदी सरकार को नहीं मिला दो तिहाई बहुमत

महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान के 3 संशोधन बिल लोकसभा में 54 वोट से गिरा। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। मोदी सरकार पहली बार बिल पास कराने में नाकाम।

महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल लोकसभा में गिरा, मोदी सरकार को नहीं मिला दो तिहाई बहुमत

मोदी सरकार लोकसभा में महिला आरक्षण बिल से जुड़े संविधान के 3 संशोधन बिल पास नहीं करा पाई है। करीब 21 घंटे चली लंबी बहस के बाद जब संविधान (131वां) संशोधन विधेयक 2026 पर 17 अप्रैल शुक्रवार को वोटिंग हुई, तो सरकार को जरूरी दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल सका और बिल 54 वोट से गिर गया।

वोटिंग के दौरान कुल 528 सांसदों ने हिस्सा लिया, जिनमें से 298 ने बिल के पक्ष में और 230 ने विपक्ष में मतदान किया। हालांकि, इस बिल को पारित कराने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी। बहुमत से पीछे रह जाने के कारण यह विधेयक पास नहीं हो पाया। इस बिल में लोकसभा की सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान शामिल था, जिसे महिला आरक्षण और परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा था।

बिल गिरने के बाद सरकार ने अन्य दो संबंधित विधेयकों—परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026—पर वोटिंग नहीं कराने का फैसला लिया।

12 सालों में पहली बार बिल पास कराने में मोदी सरकार नाकाम

यह पिछले 12 सालों में पहला मौका है जब केंद्र की सरकार लोकसभा में कोई महत्वपूर्ण बिल पास कराने में असफल रही है। बहस के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यदि ये विधेयक पास नहीं होते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष पर होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में बाधा बन रहा है।

वहीं, विपक्ष ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि यह संविधान पर हमला था, जिसे विपक्ष ने मिलकर रोक दिया। वहीं, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी इसे लोकतंत्र और देश की एकता की जीत बताया।