MP में छोटी दुकानों से लेकर बड़े रेस्टोरेंट तक सबकी होगी जियो टैगिंग
MP में छोटी दुकानों से लेकर बड़े रेस्टोरेंट तक सबकी होगी जियो टैगिंग, फूड लाइसेंस के लिए जरुरी
MP में खाने-पीने की दुकानों को फूड लाइसेंस लेने के लिए जियो टैगिंग कराना जरूरी होगी। भोपाल से इसकी शुरुआत हो रही है। अधिकारी ऐप से दुकान की फोटो और लोकेशन सेव की जाएगी। फर्जी लाइसेंस पर रोक लगेगी और दुकानदारों को दफ्तर नहीं जाना होगा।
5 प्वाइंट में समझिए पूरा मामला
MP में खाद्य दुकानों को अब जियो टैगिंग के बाद ही लाइसेंस मिलेगा
फूड सेफ्टी अधिकारी ऐप से दुकान की फोटो और सटीक लोकेशन की जाएगी सेव
पहले बिना दुकान के भी कागजों पर मिल जाता था लाइसेंस, अब होगा बंद
भोपाल जिले से होगी नई व्यवस्था की शुरुआत
दुकानदार को ऑफिस के नहीं काटने होंगे चक्कर, सब कुछ होगा डिजिटल
क्या होती है जियो टैगिंग
जियो टैगिंग में दुकान की सटीक भौगोलिक लोकेशन एक डिजिटल सिस्टम में फीड की जाती है। जब फूड सेफ्टी अधिकारी आपकी दुकान पर आएगा, तो वह एक खास ऐप से दुकान की फोटो खींचेगा। उसी वक्त दुकान की GPS (Global Positioning System) लोकेशन अपने आप सिस्टम में सेव हो जाएगी।
खास बात यह है कि यह ऐप तभी काम करेगा जब अधिकारी उस दुकान के आसपास मौजूद होगा। यानी ऑफिस में बैठकर या किसी दूसरी लोकेशन से यह काम नहीं किया जा सकेगा।
फर्जी लाइसेंस पर लगेगी लगाम
अभी जो व्यवस्था लागू है उसमें कई लोग कागजों पर किसी पते का लाइसेंस ले लेते थे, जबकि उस जगह कोई दुकान होती ही नहीं थी। भोपाल के खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला अधिकारी पंकज श्रीवास्तव (फूड सेफ्टी ऑफिसर) के मुताबिक, "खाद्य सुरक्षा को डिजिटली और हाईटेक तरीकों से बेहतर बनाने की कोशिश जारी है।" विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि जियो टैगिंग से दुकानों के नाम पर होता फर्जीवाड़ा पूरी तरह रुक जाएगा। अब केवल वही दुकानदार FSSAI का लाइसेंस पा सकेगा जिसकी दुकान वास्तव में उस पते पर मौजूद है।
दुकानदार को नहीं काटने होंगे ऑफिस के चक्कर
नई व्यवस्था में दुकानदार के लिए भी राहत है। पहले लाइसेंस के लिए डाक्यूमेंट लेकर ऑफिस के चक्कर काटने पड़ते थे। अब सभी डाक्यूमेंट स्कैन करके ऑनलाइन अपलोड किए जा सकेंगे। आधार कार्ड के जरिए व्यापारी का डिजिटल वेरिफिकेशन किया जाएगा।
FSSAI के पोर्टल पर एक क्लिक में किसी भी दुकान की पूरी जानकारी मिल जाएगी। इससे आम उपभोक्ता भी यह जान सकेगा कि उसके इलाके में कौन सी दुकान लाइसेंसधारी है।
पूरे शहर का बनेगा डिजिटल मैप
इस नए सिस्टम का का एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि सरकार के पास पूरे शहर का एक डिजिटल फूड मैप तैयार हो जाएगा। प्रशासन को पता होगा कि किस इलाके में कितने रेस्टोरेंट, डेयरी, राशन की दुकानें या खाने-पीने के अन्य ठिकाने हैं। इससे निगरानी आसान होगी और खाद्य सुरक्षा जांच को बेहतर तरीके से टारगेट किया जा सकेगा। यह सुविधा उपभोक्ताओं के लिए भी अहम है। अगर कोई शिकायत आती है, तो अधिकारी तुरंत लोकेशन ट्रैक करके जांच के लिए पहुंच सकेंगे।
MP में फूड लाइसेंस के लिए जियो टैगिंग क्यों की गई जरूरी
पहले कई दुकानदार बिना असली दुकान के भी कागजों पर किसी पते का फूड लाइसेंस ले लेते थे। इससे खाद्य सुरक्षा की निगरानी कमजोर होती थी और फर्जीवाड़ा होता था। जियो टैगिंग से यह सुनिश्चित होगा कि लाइसेंस केवल उस दुकान को मिले जो वास्तव में उस जगह मौजूद है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी मौके पर जाकर ऐप से फोटो और लोकेशन सेव करेगा, तभी लाइसेंस प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
जियो टैगिंग से दुकानदार को क्या फायदा होगा
दुकानदार को अब लाइसेंस के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड होंगे और आधार कार्ड से डिजिटल सत्यापन हो जाएगा। FSSAI के पोर्टल पर सारी जानकारी एक जगह उपलब्ध रहेगी। इससे समय और पैसे दोनों की बचत होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।
क्या पूरे मध्यप्रदेश में एक साथ जियो टैगिंग की व्यवस्था लागू होगी
फिलहाल इस नई डिजिटल व्यवस्था की शुरुआत भोपाल जिले से की जा रही है। यहां सफलतापूर्वक लागू होने के बाद इसे पूरे प्रदेश में विस्तार दिया जा सकता है। खाद्य एवं सुरक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह प्रणाली खाद्य सुरक्षा को डिजिटल और हाईटेक तरीके से बेहतर बनाने की बड़ी कोशिश का हिस्सा है।

