29 January 2026: एलिवेटेड ब्रिज कॉरिडोर को लेकर बैठक, सवर्ण समाज ने किया SC के फैसले का स्वागत, पढ़ें इंदौर की आज की खबरें
इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज को अंतरिम राहत, डांसिंग कॉप रंजीत सिंह का डिमोशन, इंजीनियर युवती 4 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट और ठगे 6 लाख
इंदौर। शहर के नवलखा से एलआईजी चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज कॉरिडोर को लेकर रेसीडेंसी कोठी में बड़ी बैठक हुई। UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, फैसले का सवर्ण समाज ने स्वागत किया। इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज को बड़ी राहत देते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कलेक्टर के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई। इंदौर के डांसिंग कॉप रंजीत सिंह को प्रधान आरक्षक से आरक्षक बनाया गया। पढ़ें आज की इंदौर की 10 बड़ी खबरें-
एलिवेटेड ब्रिज कॉरिडोर को लेकर बड़ी बैठक
नवलखा से एलआईजी चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड ब्रिज कॉरिडोर को लेकर रेसीडेंसी कोठी में बड़ी बैठक हुई। जिसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, पूर्व लोकसभा सभापति सुमित्रा महाजन, सांसद शंकर लालवानी, विधायक मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया, गोलू शुक्ला सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने प्रोजेक्ट पर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान एक्रोपोलिस कॉलेज के सर्वे और 25 फीट फ्लाईओवर की ऊंचाई और चौड़ाई पर भी आपत्तियां उठाई गई। वहीं, PWD के 2019 के सर्वे पर भी सवाल उठे।

विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि पूरी कॉरिडोर की जगह प्रत्येक चौराहे पर ब्रिज या बेहतर ट्रैफिक मॉड्यूल लागू किए जाए। वहीं, मेट्रो अधिकारियों ने चेताया कि एलिवेटेड ब्रिज बनने के बाद एबी रोड पर मेट्रो लाना मुश्किल हो जाएगा। नगर निगम ने बताया कि यूटिलिटी लाइन बदलने से कम से कम 10 करोड़ का अतिरिक्त खर्च आएगा।

जहां पूर्व लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि शहर को 25–40 साल आगे की जरूरतों को ध्यान में रखकर सिग्नल-लेस प्लानिंग करनी होगी। वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 300 करोड़ के बजट पर सवाल उठाए, जिस पर PWD ने 370 करोड़ में काम पूरा करने का भरोसा दिया। इस विषय पर सभी एक्सपर्ट्स द्वारा आठ दिन बाद रिपोर्ट कमिश्नर सुदाम खाड़े को सौंपी जाएगी और अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक
यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक का इंदौर में सवर्ण समाज ने जोरदार स्वागत किया है। इस फैसले से खुश होकर स्वर्ण समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने राजवाड़ा पर जश्न मनाया, आतिशबाजी की और मिठाइयां बांटी। समाज के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का आभार व्यक्त किया। इस पूरे मामले में अब अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी के नए नियमों पर रोक लगाए जाने के बाद इंदौर में सवर्ण समाज में खुशी की लहर देखने को मिली। राजवाड़ा पर स्वर्ण समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी और समाजजन एकत्र हुए और जमकर आतिशबाजी की। इस मौके पर एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की गई। सवर्ण समाज के लोगों का कहना है कि यह फैसला उनके हित में है और लंबे समय से उठाई जा रही मांगों को न्याय मिला है। समाज के पदाधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
सवर्ण समाज ने खोला मोर्चा, सड़कों पर भारी आक्रोश
इससे पहले इंदौर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों में संभावित बदलावों के विरोध में सवर्ण समाज ने मोर्चा खोल दिया था। गुरुवार को इंदौर शहर की सड़कों पर भारी आक्रोश देखने को मिला, जहां विभिन्न सवर्ण संगठनों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार और यूजीसी के खिलाफ प्रदर्शन किया और राष्ट्रपति के नाम संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपा। इस विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से ब्राह्मण, कायस्थ, ठाकुर, जैन और अग्रवाल समाज के प्रतिनिधियों परशुराम सेना सहित करनी सेना के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए।

प्रदर्शनकारियों का मानना है कि नियमों में प्रस्तावित बदलावों से सामान्य वर्ग के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस आंदोलन की शुरुआत ऐतिहासिक गांधी हॉल से हुई। जहां से सैकड़ों की तादाद में लोग रैली के रूप में निकले। हाथों में तख्तियां और नारे लगाते हुए यह रैली संभागायुक्त कार्यालय पहुंची। जहां सभी संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों और आपत्तियों को लेकर संभागायुक्त को ज्ञापन सौंपा।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि यूजीसी ने नियमों में सवर्ण हितों की अनदेखी की, तो यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेगा। इंदौर के इस प्रदर्शन ने शासन-प्रशासन के सामने सवर्ण समाज की नाराजगी को मजबूती से दर्ज कराया है। फिलहाल, प्रशासन ने ज्ञापन स्वीकार कर इसे संबंधित मंत्रालय तक भेजने का आश्वासन दिया है। फिलहाल, नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
कलेक्टर के आदेश पर HC की नजर, इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज को राहत
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज को बड़ी राहत देते हुए कलेक्टर के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने न सिर्फ कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाए हैं, बल्कि आदेश की तारीख को लेकर भी गंभीर टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने कॉलेज की याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया कलेक्टर की कार्यवाही पर संदेह जताया। कॉलेज की ओर से दलील दी गई कि संस्था मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 181 और 182 के तहत भूमिस्वामी की श्रेणी में नहीं आती, इसके बावजूद कलेक्टर ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश पारित किया।

इस मामले में सबसे अहम पहलू आदेश की तारीख को लेकर सामने आया। रिकॉर्ड के मुताबिक कलेक्टर के समक्ष प्रकरण 23 जनवरी 2026 को अंतिम आदेश के लिए सूचीबद्ध था, लेकिन आदेश 12 जनवरी 2026 को ही पारित कर दिया गया। इसी दौरान अतिरिक्त आयुक्त द्वारा 19 जनवरी 2026 को यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश भी जारी किए जा चुके थे। याचिका में आशंका जताई गई कि इन निर्देशों को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से कलेक्टर का आदेश एंटी-डेटेड हो सकता है। फिलहाल हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद कलेक्टर का फैसला प्रभावहीन हो गया ह, और मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनी रहेगी।
डांसिंग कॉप रंजीत सिंह पर गिरी गाज, प्रधान आरक्षक से हुआ डिमोशन
इंदौर पुलिस विभाग में चर्चित रहे डांसिंग सुपरकॉप रंजीत सिंह पर आखिरकार विभागीय कार्रवाई हो गई है। सोशल मीडिया पर एक महिला से कथित अश्लील चैटिंग के मामले में जांच पूरी होने के बाद पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने रंजीत सिंह को प्रधान आरक्षक के पद से डिमोशन कर आरक्षक बना दिया गया है। पुलिस कमिश्नर का स्पष्ट संदेश है कि पुलिस विभाग में अनुशासन सर्वोपरि है और सोशल मीडिया या निजी आचरण में की गई किसी भी तरह की गलत हरकत पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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जब ये मामला सामने आया था तब रंजीत सिंह को ऑफिस अटैच कर दिया गया था। पुलिस विभाग ने पूरे प्रकरण की विभागीय जांच कराई, जिसमें आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। बता दें, रंजीत सिंह सोशल मीडिया पर अपने डांस वीडियो को लेकर काफी चर्चित रहे हैं, जिसके चलते उन्हें डांसिंग सुपरकॉप के नाम से पहचान मिली थी। कुछ साल पहले ही उन्हें प्रधान आरक्षक का प्रभार सौंपा गया था, लेकिन अब अनुशासनहीनता के चलते उनका पद घटा दिया गया है।
व्यक्ति से 64 लाख रुपये इन्वेस्ट करवा कर की धोखाधड़ी
इंदौर में एक पिग बुचरिंग स्कैम सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति से 64 लाख रुपये इन्वेस्ट करवा कर धोखाधड़ी की गई है। फरयादी एक मेट्रोमोनियल साइट पर युवती से संपर्क में आया था। जिसके बाद युवती ने जान पहचान बढ़ाई और 64 लाख इन्वेस्ट करवा लिए। जब व्यक्ति को ठगी का अहसास हुआ तो वह शिकायत करने क्राइम ब्रांच पहुंचा। व्यक्ति के साथ पिग बुचरींग स्कैम हुआ है, क्राइम ब्रांच पूरे मामले में जांच में जुटी हुई है।
फरयादी ने पुलिस को बताया कि उसने एक मेट्रोमोनियल साइट पर अकाउंट बनाया था। यहीं पर उसकी बातचीत एक युवती से हुई थी, फिर धीरे-धीरे बातचीत बढ़ती गई। बातचीत में युवती ने बताया कि वह एक इन्वेस्टमेंट एडवाइजर है और व्यक्ति को शेयर मार्केट में मुनाफा करवा सकती है। युवती की बातों में आकर व्यक्ति ने अलग-अलग प्रकार से पैसे बताई गई वेबसाइट में निवेश करना शुरू कर दिए।
फरयादी को भरोसा दिलाने के लिए अकाउंट में फायदा दिखाया गया। इसके बाद जब फरयादी ने पैसे निकालने का प्रयास किया तो पता चला कि उसके साथ धोखाधड़ी की वारदात हो गई है। जिसके बाद व्यक्ति क्राइम ब्रांच पहुंचा और शिकायत दर्ज करवाई। जांच में सामने आया कि यह पिग बुचरींग स्कैम है, जिसे लेकर पहले भी गृह मंत्रालय एडवाइजरी जारी कर चुका है।
टेरर फंडिंग का डर ठगों ने युवती को 4 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट
इंदौर के टीसीएस में कार्यरत एक इंजीनियर युवती को टेरर फंडिंग का डर दिखाकर साइबर ठगों ने 4 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा और 6 लाख रुपए ठग लिए। ठगों ने युवती पर इतना दबाव बनाया था कि ऑफिस जाने और खाना बनाने तक का उसे समय दिया गया और यह डराया गया कि सादी वर्दी में लोग घर और आसपास पर नजर रखे हुए हैं। शिकायत पर पुलिस ने मामले में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले की शिकायत क्राइम ब्रांच में की गई प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल के खातों में यह पैसा गया है।
साइबर ठगों ने इंजिनियर युवती को फोन कर खुद को मुंबई का पुलिस अधिकारी बताया और कहा कि टेरर फंडिंग में उसके खाते से रुपए ट्रांसफर हुए हैं। इसके बाद युवती को अलग-अलग प्रकार से डरा कर उसे चार दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। इस दौरान युवती को खाना बनाने और ऑफिस जाने तक का समय दिया गया। अलग-अलग तरीके से युवती ने इस पूरे मामले में 6 लाख रूपए साइबर ठगो को ट्रांसफर कर दिए। जब युवती के परिचितों को मामले की जानकारी लगी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी, इसके बाद पुलिस ने परिवार को समझाया।
मारपीट में फरार आरोपी को गिरफ्तार कर पुलिस ने निकाला जुलुस
शहर में अपराधों पर लगाम कसने के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। इसके साथ ही लगातार गुंडे बदमाशों को सबक़ भी सिखा रही है। इसी कड़ी में मारपीट के मामले में फ़रार चल रहे एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ़्तार कर उसका जुलूस निकाला। मामला खजराना थाना क्षेत्र का है, जहां पिछले दिनों एक मारपीट की घटना सामने आई थी।
बदमाश ने एक व्यक्ति के साथ मारपीट कर उसे घायल कर दिया था। इस मामले में बदमाश फ़रार था। पुलिस ने कड़ी मशक़्क़त के बाद बदमाश को गिरफ़्तार किया और उसे वहीं मौक़े पर ले जाकर घटना की तफ़्तीश की गई। आरोपी को घटना स्थल पर ही उठक बैठक लगवाई गई और उसका क्षेत्र में जुलूस निकाला गया। एडिशनल DCP ने बताया कि पुलिस पूरे मामले में आरोपी से पूछताछ करने में जुटी है।
सॉफ्टवेयर कंसल्टेंसी का काम करने वाले के साथ 93 लाख की ठगी
सॉफ्टवेयर कंसल्टेंसी का काम करने वाले एक व्यक्ति को साइबर ठगों ने लाखों रुपया का चूना लगा दिया। मामला भंवरकुआ थाना क्षेत्र का है। जहां सचिन बंसल को काम करते समय फ़ेसबुक पर एक लिंक मिली। एप्लीकेशन डाउनलोड करने के बाद शख्स ने इनवेस्टमेंट के नाम पर लालच में आकर क़रीब 93 लाख रुपये लगा दिए और जब पैसे निकालने की कोशिश की ठगी का एहसास हुआ।
इस पूरे मामले में एडिशनल DCP ने बताया कि सचिन बंसल की शिकायत पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है। जब जांच की गई तो 5 से 6 अकाउंट सामने आए हैं, जिसमें पूरा पैसा गया है। जल्द ही आरोपियों को इस मामले में गिरफ़्तार किया जाएगा। वहींं, पुलिस ने 1 बार फिर लोगों से अपील की है कि इस तरीक़े से झांसे में ना आएं।
फर्जी कागज तैयार कर लाखों का लोन लेने वाले ठग गिरफ्तार
एक महिला डॉक्टर के नाम के फ़र्ज़ी काग़ज़ात तैयार कर और उनके प्लॉट को बैंक में गिरवी रख लाखों रुपये की ठगी की गई थी। इस मामले में पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मुक़दमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ़्तार कर लिया है। मामला लसूड़िया थाना क्षेत्र का है। डॉक्टर राज रानी खरे ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि बैंक से फ़ोन आ रहे हैं। उन्होंने लाखों रुपये का प्लॉट बैंक में गिरवी रख के लोन लिया है।

जब जांच की गई तो पता चला कि ना ही उनके यह कागज़ात ओरिजनल है और न ही उन्होंने किसी प्रकार का लोन लिया है। पुलिस ने जांच के बाद तो पता चला कि मोहमद रहीस और उसके बेटे जुनेद सलमा बी और उसके अन्य साथियों ने वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए दोनों बाप बेटों को गिरफ़्तार किया है और पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुटी है।
Varsha Shrivastava 
