दिल्ली के पालम में भीषण आग: एक ही परिवार के 9 लोगों की दर्दनाक मौत, कई घायल
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में स्थित बहुमंजिला इमारत में भीषण आग। दमकल ने 10 लोगों का रेक्स्यू किया। दो ने छलांग लगाकर बचाई अपनी जान।
दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार सुबह एक दिल दहला देने वाला हादसा सामने आया, जब एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लग गई। इस हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 3 मासूम बच्चियां भी शामिल हैं। आग इतनी भयानक थी कि कुछ लोगों को अपनी जान बचाने के लिए इमारत से कूदना पड़ा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत-बचाव कार्य के लिए दमकल की कई गाड़ियां मौके पर भेजी गईं।
सुबह के समय लगी आग, लोग अंदर ही फंसे
जानकारी के अनुसार, यह आग सुबह करीब 7 बजे पालम के साध नगर इलाके में स्थित एक बहुमंजिला इमारत में लगी। प्रारंभिक रिपोर्ट्स में इमारत को 3 से 5 मंजिला बताया गया है, जिसमें बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और ऊपर की मंजिलें शामिल थीं। आग लगते ही धुआं तेजी से पूरी इमारत में फैल गया, जिससे अंदर मौजूद लोग बाहर निकलने का मौका नहीं पा सके।
बताया जा रहा है कि इमारत में करीब 22 लोगों का एक ही परिवार रहता था, जिनमें से कुछ सदस्य उस समय घर पर नहीं थे क्योंकि वे बाहर घूमने गए हुए थे। लेकिन जो लोग घर में मौजूद थे, वे आग की चपेट में आ गए और कई लोग अंदर ही फंस गए।

दमकल विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की करीब 30 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया गया। दमकल कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काफी हद तक काबू पाया और इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया।
राहत कार्य के दौरान करीब 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया, लेकिन उनमें से कई गंभीर रूप से झुलस चुके थे। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने कई लोगों को मृत घोषित कर दिया।

मृतकों में तीन मासूम बच्चियां शामिल
इस दर्दनाक हादसे में जिन लोगों की जान गई, उनमें 35 वर्षीय प्रवेश, 40 वर्षीय कमल और 32 वर्षीय आशु शामिल हैं। इसके अलावा 12 साल, 6 साल और 5 साल की तीन नाबालिग बच्चियों की भी मौत हो गई। इन सभी को अस्पताल ले जाया गया था, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
इसके अलावा एक लगभग 38 वर्षीय महिला को भी मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया, जबकि अन्य घायलों का इलाज जारी है। एक 19 वर्षीय युवक करीब 25 प्रतिशत तक झुलस गया है और अस्पताल में भर्ती है।
जान बचाने के लिए इमारत से कूदे लोग
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दो लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगा दी। हालांकि इस दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं और उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया। कई अन्य लोग भी धुएं और आग की लपटों के कारण अंदर ही फंसे रह गए।

इमारत में नीचे दुकानें, ऊपर रह रहे थे लोग
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इमारत के बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल का उपयोग कपड़ों और कॉस्मेटिक सामान के स्टोरेज के लिए किया जा रहा था। वहीं दूसरी और तीसरी मंजिल पर परिवार के सदस्य रहते थे। नीचे ज्वलनशील सामान होने के कारण आग तेजी से फैल गई और ऊपर की मंजिलों तक पहुंच गई।
इमारत की संरचना और संकरी गलियों के कारण राहत कार्य में भी काफी दिक्कतें आईं। एंबुलेंस को भी मौके तक पहुंचने में परेशानी हुई, जिससे घायलों को अस्पताल पहुंचाने में समय लगा।
आग लगने के कारणों की जांच जारी
फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि शुरुआती आशंका शॉर्ट सर्किट की जताई जा रही है। पुलिस और दमकल विभाग के अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और पूरे मामले की जांच कर रहे हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इमारत को पूरी तरह ठंडा करने के बाद ही अंदर दोबारा तलाशी अभियान चलाया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और व्यक्ति अंदर फंसा न हो।

सुरक्षा पर उठे सवाल, प्रशासन पर बढ़ा दबाव
इस हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। एक ही परिवार के इतने लोगों की मौत से स्थानीय लोग भी सदमे में हैं। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली में इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था और अग्निशमन उपायों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में कई इमारतों में बिना सुरक्षा मानकों के स्टोरेज और आवासीय उपयोग एक साथ किया जा रहा है, जो इस तरह की घटनाओं को न्योता देता है।
इस दर्दनाक हादसे के बाद प्रशासन पर सख्त कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है। लोगों की मांग है कि ऐसे अवैध निर्माण और सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। फिलहाल राहत और बचाव कार्य जारी है, जबकि जांच एजेंसियां आग के कारणों का पता लगाने में जुटी हैं। यह हादसा एक बड़ी चेतावनी है कि लापरवाही और सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है।
Varsha Shrivastava 
