गोंड चित्रकला को मिलेगा वैश्विक मंच, अमेज़न ई-कारीगर से जुड़ेंगे डिंडौरी के जनजातीय कलाकार

डिंडौरी की प्रसिद्ध गोंड चित्रकला को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने के लिए अमेज़न ई-कारीगर मंच से जोड़ा जाएगा। आजीविका ग्राम संगठन और डॉट्स एंड डैशेज के बीच एमओयू, कलाकारों की आय में 10 गुना वृद्धि का लक्ष्य।

गोंड चित्रकला को मिलेगा वैश्विक मंच, अमेज़न ई-कारीगर से जुड़ेंगे डिंडौरी के जनजातीय कलाकार

डिंडौरी। मध्यप्रदेश की पारंपरिक गोंड चित्रकला को अब वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि गोंड चित्रकला जनजातीय समाज की प्राचीन, गौरवशाली और सांस्कृतिक विरासत है, जिसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जाएगा।

डिंडौरी जिले के कलेक्ट्रेट ऑडिटोरियम में आयोजित ‘अमेज़न ई-कारीगर’ मंच के शुभारंभ एवं समझौता ज्ञापन (एमओयू) हस्ताक्षर समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि गोंडी कला आधारित उत्पादों को अमेज़न ई-कारीगर सहित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सूचीबद्ध किए जाने से कलाकारों को उनकी कला का उचित मूल्य और वैश्विक पहचान मिलेगी। उन्होंने गोंड चित्रकला को भौगोलिक संकेतक (GI Tag) दिलाने के लिए भी आवश्यक प्रयास किए जाने की बात कही।

गोंड कला संरक्षण के लिए हुआ एमओयू

कार्यक्रम में डिंडौरी जिले के प्रसिद्ध गोंडी कला केंद्र पाटनगढ़ स्थित "आजीविका ग्राम संगठन" और "डॉट्स एंड डैशेज" संस्था के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक गोंडी कला का संरक्षण, संवर्धन और उसके बाजार का विस्तार करना है।

पाटनगढ़ ग्राम के 157 परिवार प्रत्यक्ष रूप से गोंड चित्रकला से जुड़े हुए हैं, जिनमें 85 महिला और 72 पुरुष कलाकार शामिल हैं। नई साझेदारी के माध्यम से इन कलाकारों को विपणन, ब्रांडिंग और ऑनलाइन बिक्री के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।

कलाकारों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम

प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि यह समझौता कलाकारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। ‘डॉट्स एंड डैशेज’ के सहयोग से पहले ही चित्रकार परिवारों की औसत वार्षिक आय लगभग 35 हजार रुपये से बढ़कर 70 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। अब अमेज़न ई-कारीगर और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उत्पादों की बिक्री शुरू होने से वैश्विक बाजार तक पहुंच बनेगी और आने वाले समय में कलाकारों की आय में 10 गुना तक वृद्धि की संभावना है।

उन्होंने कहा कि यह पहल न केवल जनजातीय कलाकारों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाएगी, बल्कि डिंडौरी जिले को कला आधारित ग्रामीण उद्यमिता के सफल मॉडल के रूप में स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कार्यक्रम में पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री राधा सिंह सहित विभागीय अधिकारी और जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।