IGNTU हॉस्टल आवंटन में 'धर्मांतरण' का दबाव? छात्रों का आरोप- 'प्रभु के मार्ग' पर चलने वालों को प्राथमिकता

IGNTU अमरकंटक में हॉस्टल आवंटन को लेकर छिड़ा बड़ा विवाद। छात्रों ने वार्डन डॉ. चार्ल्स वर्गीज़ पर लगाया धर्मांतरण के दबाव और भेदभाव का आरोप। भाजपा जिला अध्यक्ष ने पोस्ट कर उठाए गंभीर सवाल। जानें क्या है 'प्रभु के मार्ग' पर चलने की शर्त का पूरा मामला।

IGNTU हॉस्टल आवंटन में 'धर्मांतरण' का दबाव? छात्रों का आरोप- 'प्रभु के मार्ग' पर चलने वालों को प्राथमिकता

अमरकंटक: मध्य प्रदेश के पवित्र तीर्थ स्थल अमरकंटक में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) इस समय विवादों के केंद्र में है। विश्वविद्यालय के 'सोन रिसर्च हॉस्टल' में कमरों के आवंटन को लेकर छात्रों ने प्रशासन और एक वार्डन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्रों का दावा है कि हॉस्टल आवंटन में न केवल भेदभाव किया जा रहा है, बल्कि उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए भी उकसाया जा रहा है।

विवाद की जड़:
रद्द हुए आवंटन और नया पैनल, मामले की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई, जब पूर्व मुख्य वार्डन के निर्देशानुसार कई शोधार्थियों ने बैंक चालान के माध्यम से शुल्क जमा कर हॉस्टल में कमरे प्राप्त किए थे। लेकिन, प्रशासन द्वारा वार्डनों के पैनल का पुनर्गठन होते ही स्थिति पूरी तरह बदल गई।

छात्रों द्वारा लगाए गए प्रमुख आरोप:

  • सीटों का गणित
    आरोप है कि हॉस्टल की कुल 56 सीटों में से केवल 5 सीटें ही सामान्य और ओबीसी (OBC) वर्ग के शोधार्थियों को दी गईं।

  • नस्लीय/सामुदायिक भेदभाव:
    शोधार्थियों का कहना है कि उन्हें यह कहकर कमरे खाली करने को मजबूर किया गया कि वे एक 'विशेष समुदाय' से संबंध नहीं रखते।

  • चुनिंदा कार्रवाई:
    छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि जिन छात्रों ने 'हिंदू नव वर्ष' की रैली में हिस्सा लिया था, उन्हें चिह्नित कर परेशान किया जा रहा है।

सबसे गंभीर आरोप:
'ईसाई धर्म अपनाओ, हॉस्टल पाओ'
हॉस्टल के प्रशासनिक वार्डन डॉ. चार्ल्स वर्गीज़ पर लगे आरोपों ने इस मामले को तूल दे दिया है। प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि डॉ. वर्गीज़ ने संकेत दिया कि "यदि छात्र ईसाई धर्म स्वीकार करने और 'प्रभु के मार्ग' का अनुसरण करने के लिए तैयार हों, तो उन्हें हॉस्टल आवंटन में प्राथमिकता दी जा सकती है।" इन आरोपों ने विश्वविद्यालय परिसर में 'मिशनरी गतिविधियों' और 'धर्मांतरण के प्रयासों' की चर्चा को तेज कर दिया है।

छात्रों का अनूठा विरोध:
हनुमान चालीसा का पाठ, प्रशासनिक रवैये से नाराज छात्रों ने अपना विरोध दर्ज कराने के लिए अधीक्षक आवास का घेराव किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने हनुमान चालीसा का पाठ किया और निष्पक्ष जांच की मांग की। छात्रों का कहना है कि एक सरकारी संस्थान में धर्मनिरपेक्षता और समानता के सिद्धांतों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

संवैधानिक मूल्यों पर खतरा:
यह मामला केवल हॉस्टल के कमरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) और धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का भी संकेत देता है। जनजातीय क्षेत्रों में स्थित इस विश्वविद्यालय का उद्देश्य आदिवासियों और पिछड़े वर्गों का उत्थान है, लेकिन यदि वहां इस तरह के पक्षपातपूर्ण आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह संस्थान की साख पर गहरा धक्का होगा।

आगे क्या:
फिलहाल विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से डॉ. चार्ल्स वर्गीज़ के खिलाफ लगे आरोपों पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण आना बाकी है। छात्र अब शिक्षा मंत्रालय और उच्च अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं ताकि शैक्षणिक माहौल को 'धार्मिक एजेंडे' से मुक्त रखा जा सके।

भाजपा जिला अध्यक्ष का सोशल मीडिया पोस्ट:
प्रशासन पर सीधा हमला, भाजपा जिला अध्यक्ष ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से इस मुद्दे पर पोस्ट करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।

उनके पोस्ट के मुख्य बिंदु:
जिला अध्यक्ष ने कहा कि एक केंद्रीय विश्वविद्यालय में "प्रभु के मार्ग" पर चलने की शर्त रखना संवैधानिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्षता का खुला उल्लंघन है।

कड़ी कार्रवाई की मांग:
उन्होंने स्पष्ट किया कि जनजातीय क्षेत्र में किसी भी प्रकार की मिशनरी गतिविधियों या धर्मांतरण के प्रयासों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। "शिक्षा के मंदिर में इस प्रकार का धार्मिक तुष्टिकरण और भेदभाव दुर्भाग्यपूर्ण है। छात्रों को धर्म के आधार पर डराना या प्रलोभन देना अक्षम्य अपराध है।"