पब्लिकवाणी की खबर का असर: अवैध कॉलोनियों पर आखिर चला प्रशासन का डंडा

रीवा में अवैध कॉलोनियां बनाने वालों पर कलेक्टर ने सख्त कार्रवाई करते हुए FIR के आदेश दिए हैं। यह कदम पब्लिकवाणी द्वारा लगातार उठाए गए मुद्दे के बाद लिया गया है।

पब्लिकवाणी की खबर का असर: अवैध कॉलोनियों पर आखिर चला प्रशासन का डंडा
पब्लिकवाणी

रीवा। शहर और आसपास के इलाकों में लंबे समय से बन रही अवैध कॉलोनियों पर अब आखिरकार प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। मंगलवार को कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी प्रतिभा पाल ने दो अलग-अलग मामलों में कॉलोनी बनाने वालों पर FIR दर्ज करने के आदेश दिए हैं।

इस बड़ी कार्रवाई के पीछे पब्लिकवाणी की लगातार उठाई गई आवाज है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए पब्लिकवाणी ने बार-बार अवैध कॉलोनियों और अतिक्रमण को उजागर किया और अधिकारियों के साथ-साथ आम लोगों तक इसकी खबर पहुंचाई।

कौन हैं आरोपी?

जांच में पता चला कि उपेन्द्र सिंह (शांति इंफ्रास्ट्रक्चर और शांति विलास इंफ्रा प्रोजेक्ट) और शाहीन बेगम तथा अमरीन अंसारी ने बिना लाइसेंस और अनुमति के कॉलोनियां बनाई और प्लॉट बेचे। साथ ही बीहर नदी के किनारे मिट्टी और मलबा डालकर पानी के बहाव में बाधा डाली गई और आसपास के नालों को संकरा किया गया।

कलेक्टर ने FIR दर्ज कराने के आदेश दिए हैं। यदि दोषी पाए जाते हैं, तो भू राजस्व संहिता 1959 के तहत उन्हें 3 से 7 साल जेल और 10 हजार रुपए तक जुर्माना हो सकता है।

चुपचाप बन रही थीं कॉलोनियां

शहर और आसपास के इलाकों में बिना अनुमति कॉलोनियां धीरे-धीरे बनती रहीं। लोग प्लॉट खरीद रहे थे और मकान बन रहे थे, लेकिन इन सबके पीछे कोई वैध अनुमति नहीं थी। नियमों की अनदेखी होती रही और जिम्मेदार विभाग लंबे समय तक चुप रहा। 

नदी और नालों तक को नहीं छोड़ा

सबसे बड़ी चिंता यह थी कि कॉलोनियां बसाने के लिए बीहर नदी के किनारे मलबा डाल दिया गया। नालों को संकरा कर दिया गया, जिससे पानी का बहाव प्रभावित हुआ।

पिछले साल बरसात में यही वजह थी कि आधा शहर पानी में डूबने की कगार पर आ गया। रीवा शहर में बाढ़ आने की सबसे बड़ी वजह इन अवैध कॉलोनियों का लगातार बढ़ता निर्माण है।

बरसात में पब्लिकवाणी ने उठाया मुद्दा

जब बारिश के समय लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी हुई, तब पब्लिकवाणी ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया। गली-मोहल्लों में भरे पानी, खराब नालियों और अवैध कॉलोनियों की वजह से हो रही दिक्कतों को लगातार दिखाया गया। लोगों की परेशानियों को सामने लाकर ही यह मामला प्रशासन तक पहुंचा।

अब प्रशासन सख्त 

लगातार खबरें और खुलासे होने के बाद प्रशासन ने जांच कराई। साफ हुआ कि बिना लाइसेंस और अनुमति कॉलोनियां बनाई जा रही थीं। इसके बाद कलेक्टर ने सख्त कदम उठाते हुए FIR के आदेश दे दिए। 

नियम क्या कहते हैं

  • निर्माण के लिए कलेक्टर या सक्षम अधिकारी की अनुमति जरूरी है।
  • बिना लाइसेंस कॉलोनी या प्लॉट बनाना अवैध है।
  • नदी के किनारे मिट्टी या मलबा डालना भी मना है, इससे पानी का रास्ता बंद होता है और बाढ़ या नाले की समस्या बढ़ती है।

नदी किनारे बिना अनुमति निर्माण करना नियमों का उल्लंघन है। दोषी पाए जाने पर 3 से 7 साल जेल और जुर्माना लगाया जा सकता है।