13 साल से कम बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट पर लग सकती है रोक! संसद में SHIELD Bill, पैरेंट्स की मंजूरी होगी जरूरी
SHIELD Bill में 13 साल से कम बच्चों के सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग अकाउंट के लिए सत्यापित पैरेंटल कंसेंट अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। बिल में बच्चों के डेटा की सुरक्षा और नियम तोड़ने वाले प्लेटफॉर्म पर ₹10 करोड़ तक जुर्माने का प्रावधान सुझाया गया है, लेकिन अभी यह कानून नहीं बना है।
नई दिल्ली। बच्चों को सोशल मीडिया, ऑनलाइन गेमिंग और इंटरनेट के खतरों से बचाने के लिए संसद में एक अहम निजी सदस्य विधेयक लाने की तैयारी की गई है। BJP सांसद बैजयंत पांडा द्वारा प्रस्तावित Safeguarding Healthy Internet Environments for Little Digital-Natives (SHIELD) Bill, 2025 में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाने के लिए सत्यापित माता-पिता की सहमति अनिवार्य करने का प्रस्ताव है।
हालांकि, यह बिल शुक्रवार को संसद में पेश नहीं हो सका। सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित होने के कारण इसे लिया नहीं जा सका। यह एक Private Member's Bill है, यानी सरकार द्वारा नहीं बल्कि किसी सांसद द्वारा निजी तौर पर पेश किया जाने वाला विधेयक।

13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्या प्रस्ताव है?
SHIELD Bill में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कई बड़े प्रावधान सुझाए गए हैं। इसके तहत 13 साल से कम उम्र के बच्चे माता-पिता की सत्यापित अनुमति के बिना सोशल मीडिया और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर अकाउंट नहीं बना सकेंगे।
वहीं, नाबालिगों तक पहुंच रखने वाले प्लेटफॉर्म के लिए अनिवार्य Age Verification System लागू करने का प्रस्ताव है।
पैरेंट्स को मिलेगा कंट्रोल
प्रस्तावित कानून में Parental Control Dashboard की व्यवस्था भी सुझाई गई है। इसके जरिए माता-पिता बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रख सकेंगे, प्राइवेसी सेटिंग्स नियंत्रित कर सकेंगे और स्क्रीन टाइम सीमित कर सकेंगे। यानी माता-पिता के पास बच्चों की डिजिटल गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एक अलग व्यवस्था उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।

बच्चों को नहीं दिखेंगे पर्सनलाइज्ड विज्ञापन?
बिल का एक अहम प्रावधान ऑनलाइन प्लेटफॉर्म द्वारा बच्चों के डेटा के इस्तेमाल से जुड़ा है।
प्रस्ताव के मुताबिक प्लेटफॉर्म बच्चों को ट्रैक, प्रोफाइल या पर्सनलाइज्ड विज्ञापन नहीं दिखा सकेंगे। इसका उद्देश्य बच्चों के डेटा के व्यावसायिक इस्तेमाल को सीमित करना है।
पोर्न, जुआ और हिंसक कंटेंट पर भी रोक
SHIELD Bill में प्लेटफॉर्म्स को बच्चों को पोर्नोग्राफी, जुआ, सट्टेबाजी या simulated betting, हिंसक या चरमपंथी सामग्री और ड्रग्स से संबंधित कंटेंट से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाने की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव है।
यानी कानून सिर्फ सोशल मीडिया अकाउंट की उम्र सीमा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों को इंटरनेट पर मिलने वाले खतरनाक कंटेंट से बचाने के लिए प्लेटफॉर्म्स पर भी जिम्मेदारी तय करने की कोशिश की गई है।

उल्लंघन किया तो ₹10 करोड़ तक जुर्माना
प्रस्तावित बिल में नियमों का उल्लंघन करने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना लगाने का प्रावधान सुझाया गया है।
अगर कोई प्लेटफॉर्म जानबूझकर या बार-बार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई और सेवा को अस्थायी रूप से निलंबित या ब्लॉक करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
लेकिन अभी कानून नहीं बना है
यह बात सबसे महत्वपूर्ण है—SHIELD Bill अभी कानून नहीं है। यह एक Private Member's Bill है और इसे संसद में पेश भी नहीं किया जा सका। निजी सदस्य विधेयकों का कानून बनना बेहद दुर्लभ है। स्वतंत्रता के बाद अब तक केवल बहुत कम निजी सदस्य विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित होकर कानून बन पाए हैं। इसलिए फिलहाल 13 साल से कम बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बंद होने का कोई नया केंद्रीय कानून लागू नहीं हुआ है।

बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर बड़ी बहस
SHIELD Bill के जरिए एक बड़ा सवाल संसद के सामने लाने की कोशिश हुई है—बच्चों को इंटरनेट की आजादी और डिजिटल सुविधाएं देते हुए उन्हें ऑनलाइन खतरों से कैसे बचाया जाए?
अगर इस तरह के प्रावधान भविष्य में कानून का रूप लेते हैं तो सोशल मीडिया कंपनियों और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म को बच्चों की उम्र की पुष्टि, डेटा सुरक्षा, पैरेंटल कंट्रोल और कंटेंट मॉडरेशन के लिए कहीं ज्यादा जिम्मेदारी उठानी पड़ सकती है।
फिलहाल यह एक प्रस्ताव है, कानून नहीं। लेकिन 13 साल की उम्र सीमा, पैरेंटल कंसेंट, बच्चों के डेटा पर रोक और ₹10 करोड़ तक के जुर्माने वाले प्रावधानों ने डिजिटल दुनिया में बच्चों की सुरक्षा को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

