लोकायुक्त ने बिछाया जाल: नामांतरण के बदले ₹15 हजार लेते तहसील का बाबू गिरफ्तार
₹15 हजार लेते बकस्वाहा तहसील का बाबू पकड़ा गया, लोकायुक्त की कार्रवाई से तहसील परिसर में मचा हड़कंप, ₹25 हजार की रिश्वत मांगने की मिली थी शिकायत
Bakswaha। जमीन के नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत पर Lokayukta Police ने Bakswaha Tehsil Office में कार्रवाई की है। टीम ने तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबू Rajendra Srivastava को कथित तौर पर 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा। कार्रवाई के बाद तहसील परिसर में काफी देर तक हड़कंप की स्थिति बनी रही। मामले में शिकायतकर्ता Krishna Kant Bilthare ने 25 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगाया था।
25 हजार रुपये मांगने की शिकायत
शिकायतकर्ता के अनुसार, जमीन के नामांतरण की प्रक्रिया पूरी करने के एवज में तहसील कार्यालय में पदस्थ बाबू ने 25 हजार रुपये की मांग की थी। शिकायत में बताया गया कि इस रकम में से 10 हजार रुपये पहले ही दिए जा चुके थे। इसके बाद बाकी 15 हजार रुपये देने की बात तय हुई थी।
शिकायतकर्ता ने इस संबंध में 10 अगस्त 2026 को Lokayukta Sagar में शिकायत की। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने मामले का सत्यापन कराया। शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच के बाद टीम ने रिश्वत की रकम लेते हुए संबंधित कर्मचारी को पकड़ने की योजना बनाई।
तय रकम लेकर तहसील कार्यालय पहुंचा फरियादी
Lokayukta Police की योजना के तहत शिकायतकर्ता को निर्धारित रकम के साथ तहसील कार्यालय भेजा गया। बताया गया कि रिश्वत की रकम पर विशेष रसायन लगाया गया था। फरियादी ने जैसे ही कथित तौर पर 15 हजार रुपये Rajendra Srivastava को दिए, पहले से निगरानी कर रही लोकायुक्त टीम ने मौके पर कार्रवाई कर दी।
टीम ने कथित रिश्वत की रकम बरामद करने के साथ ही मामले से जुड़े दस्तावेजों को भी जांच के लिए अपने कब्जे में लिया। कार्रवाई के दौरान तहसील कार्यालय में मौजूद कर्मचारियों और लोगों के बीच काफी देर तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही।
नामांतरण से जुड़ी दो फाइलों का मामला
मामले में अपना पक्ष रखते हुए Rajan Srivastava ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि इस मामले से जुड़ी दो फाइलें थीं। इनमें फाइल नंबर 187/A-6/2026-27 का आदेश 31 जुलाई 2026 को जारी हो चुका था और नामांतरण किया जा चुका है।
वहीं दूसरी फाइल नंबर 238/A-6/2026-27 के संबंध में उनका कहना है कि इसे 8 अगस्त 2026 को पहले ही खारिज किया जा चुका था। Rajan Srivastava ने कहा कि उन्हें दुर्भावना से फंसाया जा रहा है और वे निर्दोष हैं।
जांच के बाद स्पष्ट होगी स्थिति
Lokayukta Police की कार्रवाई के बाद मामले में आगे की जांच जारी है। टीम ने कथित रिश्वत की रकम और संबंधित दस्तावेजों को जांच का हिस्सा बनाया है। पुलिस द्वारा मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों की जांच चल रही है। Rajan Srivastava की ओर से लगाए गए बचाव के दावों और लोकायुक्त की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में होगी। अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
Varsha Shrivastava 
