भोपाल में नगर निगम के खिलाफ सड़कों पर उतरे रहवासी, अवैध व्यवसायों पर कार्रवाई को बताया 'दिखावा'

भोपाल में संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति ने नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया। रहवासियों ने अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर दिखावटी कार्रवाई और प्रभावशाली लोगों को बचाने के आरोप लगाए।

भोपाल में नगर निगम के खिलाफ सड़कों पर उतरे रहवासी, अवैध व्यवसायों पर कार्रवाई को बताया 'दिखावा'

भोपाल: राजधानी भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में संचालित कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ रहवासियों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। रविवार को संयुक्त रहवासी संघर्ष समिति के बैनर तले गौतम नगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों ने पैदल मार्च निकालकर नगर निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि निगम ने अवैध दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ केवल दिखावटी कार्रवाई की है, जबकि अधिकांश संस्थान कुछ समय बाद फिर से संचालित होने लगे।

रहवासियों ने नगर निगम पर लगाए गंभीर आरोप

प्रदर्शन के दौरान गौतम नगर समिति के अध्यक्ष मोहन खरपते और सोमकांत उमलकर ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में अवैध होटल, हॉस्टल और चाय-सुट्टा बार संचालित हो रहे हैं। उनका कहना है कि देर रात तक संदिग्ध लोगों का जमावड़ा लगा रहता है, जिससे स्थानीय रहवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय निवासी आदित्य ने दावा किया कि उनके घर के सामने दिनभर धूम्रपान होने से परिवार के सदस्यों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है।

नेताओं को दी चुनावी चेतावनी

मार्च में शामिल रहवासियों ने राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई, तो आगामी चुनाव में ऐसे नेताओं का विरोध किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि भोपाल के अधिकांश मतदाता इस समस्या से प्रभावित हैं।

पूर्व IAS समेत कई कॉलोनियों के लोग हुए शामिल

प्रदर्शन में पूर्व आईएएस कविंद्र कियावत भी शामिल हुए। उन्होंने सभी रहवासियों से एकजुट होकर इस मुद्दे पर संघर्ष जारी रखने की अपील की। शाहपुरा समिति की अध्यक्ष शुभ्रा गोयल ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र में भी अवैध निर्माणों पर नगर निगम ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की है। इस मार्च में रचना नगर, शांति निकेतन, शाहपुरा, गुलमोहर, अरेरा कॉलोनी सहित कई क्षेत्रों के महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए।

'सीलिंग के दावे, लेकिन दुकानें फिर खुल गईं'

प्रयास संस्था की अध्यक्ष अपर्णा वाशिष्ट ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद नगर निगम ने जिन अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई का दावा किया, उनमें से अधिकांश को केवल नोटिस या पोस्टर लगाकर छोड़ दिया गया। उनका कहना है कि शाम होते-होते कई संस्थान दोबारा संचालित होने लगे।

रहवासी कमल राठी ने कहा कि यदि भवनों पर यह लिखा गया कि वहां व्यावसायिक गतिविधियां बंद कर दी गई हैं, तो यह स्वयं इस बात का प्रमाण है कि वहां पहले नियमों के विपरीत व्यवसाय संचालित हो रहा था।

सुप्रीम कोर्ट में रखे जाएंगे तथ्य

शिकायतकर्ताओं विवेक त्रिपाठी और लवनीश भाटी ने दावा किया कि नगर निगम की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले से जुड़े तथ्यों को 4 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में होने वाली अगली सुनवाई के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।

विवेक त्रिपाठी का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे आम नागरिकों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर हो रहा है।

आगे भी जारी रहेगा आंदोलन

रहवासी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में संचालित कथित अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई नहीं की, तो शहर के विभिन्न इलाकों में चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे और मामले को न्यायालय में भी मजबूती से उठाया जाएगा।