दतिया उपचुनाव: क्यों डॉ. नरोत्तम मिश्रा भाजपा की सबसे मजबूत पसंद माने जा रहे हैं?
दतिया उपचुनाव 2026 में भाजपा उम्मीदवार को लेकर चर्चा तेज है। जानिए क्यों डॉ. नरोत्तम मिश्रा को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।
दतिया विधानसभा उपचुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। 30 जुलाई को मतदान होना है और अब सबसे बड़ी उत्सुकता भाजपा के उम्मीदवार को लेकर है। पार्टी ने अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों, संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच सबसे अधिक जिस नाम की चर्चा है, वह पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का है।
इसके पीछे कई राजनीतिक कारण बताए जा रहे हैं।
सबसे पहला कारण है दतिया में उनकी मजबूत राजनीतिक पकड़। डॉ. नरोत्तम मिश्रा कई बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वर्षों तक उन्होंने क्षेत्र में संगठन खड़ा किया और कार्यकर्ताओं का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया। भाजपा के बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से लेकर वरिष्ठ नेताओं तक उनकी स्वीकार्यता मानी जाती है।
दूसरा बड़ा कारण है उनका प्रशासनिक अनुभव। प्रदेश के गृह मंत्री के रूप में उन्होंने लंबे समय तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई। उनके समर्थकों का मानना है कि उनके कार्यकाल में दतिया में सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, धार्मिक पर्यटन और अन्य विकास कार्यों को गति मिली, जिससे उनकी राजनीतिक पहचान और मजबूत हुई।
तीसरा कारण है 2023 की हार के बाद भी उनकी सक्रियता। विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद डॉ. मिश्रा ने दतिया से दूरी नहीं बनाई। वे लगातार सामाजिक, धार्मिक और संगठनात्मक कार्यक्रमों में शामिल होते रहे। यही वजह है कि भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच आज भी उन्हें सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिना जाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा इस उपचुनाव को केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के अवसर के रूप में देख रही है। ऐसे में पार्टी किसी नए चेहरे की बजाय ऐसे नेता को प्राथमिकता दे सकती है, जिसके पास अनुभव, संगठन पर पकड़ और चुनावी प्रबंधन—तीनों की क्षमता हो। इसी संदर्भ में डॉ. नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे प्रमुखता से लिया जा रहा है।
हालांकि अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा और उम्मीदवार की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। लेकिन यदि पार्टी डॉ. नरोत्तम मिश्रा को टिकट देती है, तो यह मुकाबला केवल दतिया तक सीमित नहीं रहेगा। इसे प्रदेश की राजनीति में उनकी वापसी और भाजपा की रणनीतिक परीक्षा के रूप में भी देखा जाएगा।
फिलहाल दतिया में एक ही सवाल सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है—क्या भाजपा फिर से अपने अनुभवी रणनीतिकार डॉ. नरोत्तम मिश्रा पर भरोसा जताएगी? इसका जवाब उम्मीदवारों की सूची आने के साथ मिल जाएगा।
Anubhav Dubey 
