जल्द सामने आएगा इंदौर अग्निकांड का सच! पीड़ित परिवार के सदस्य ने बताया काली रात का खौफनाक सच
इंदौर अग्निकांड में 8 मौतों के बाद जांच तेज, फायर ब्रिगेड की देरी और वायरल वीडियो पर उठे सवाल
अग्निकांड मामले की जांच, सील किया घर खोलकर जुटाए साक्ष्य
इंदौर में हुए भीषण अग्निकांड मामले में मुख्यमंत्री से परिजनों ने शिकायत की थी। इसके बाद जिला प्रशासन, फायर ऑफिसर, पुलिस और विद्युत मंडल का जांच दल घटना स्थल पर पहुंचा और आग लगने के संभावित कारणों की जांच की।

बता दें, बुधवार को इंदौर के बंगाली चौराहा स्थित अल सुबह बृजेश्वरी एन एक्स कॉलोनी में रहने वाले मनोज पुगलिया के घर में भीषण अग्निकांड हुआ था। इस अग्निकांड में मनोज पुगलिया उनकी बहुत सिमरन सहित कल आठ लोगों की अग्निकांड में जलने से मौत हो गई थी। इस घटनाक्रम पर जहां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया था। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव खुद गुरुवार को इंदौर पहुंचे और उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात करते हुए शोक भी व्यक्त किया था। इस दौरान मृतक मनोज पुगलिया के बड़े बेटे सौरभ ने घटनाक्रम को लेकर मुख्यमंत्री के सामने कई शिकायत की थी।

सौरभ ने मुख्यमंत्री यादव को बताया था कि फायर ब्रिगेड की गाड़ी लेट पहुंची थी और जो टैंकर आया था वह भी आधा खाली था। इसके अलावा ये भी दावा किया कि आज ईवी कार में नहीं बल्कि बिजली के तारों में लगी थी, जिसके कारण यह पूरा भीषण अग्निकांड हुआ था। मुख्यमंत्री यादव ने इस पूरी घटना पर जांच करवाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद शुक्रवार को मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के अधिकारियों के साथ फायर ब्रिगेड, जिला प्रशासन और पुलिस का बल मौके पर पहुंचा और सील किए गए घर को खोलकर बारीकी से सभी पहलुओं पर जांच की।

जांच के दौरान उन्होंने कई साक्ष्य भी इकट्ठा किए है, जिसके आधार पर टेक्निकल तरीके से घटना का रिक्रिएशन किया जा सकता है। क्षेत्रीय तिलक नगर थाने के थाना प्रभारी मनीष लोधा ने बताया कि इन्हीं साक्ष्यों के आधार और सभी पहलुओं पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाई जाएगी।
सौरभ पुगलिया ने साझा की हादसे की रात की आपबीती
इधर, आगजनी की घटना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। अब पीड़ित परिवार के सदस्य सौरभ पुगलिया ने उस खौफनाक रात की पूरी आपबीती साझा की है। घटना को याद करते हुए सौरभ ने बताया कि हादसे वाली रात पूरा परिवार खुश था और लंबे समय बाद सभी ने एक साथ वक्त बिताया था। रात करीब एक बजे सभी अपने-अपने कमरों में सोने चले गए। लेकिन रात करीब तीन बजे अचानक घर के बाहर से शोर सुनाई दिया। इसी दौरान उनके माता-पिता आग लगने की बात कहते हुए उसे बुझाने के लिए आवाजें लगाने लगे। जब सौरभ और उनके भाइयों ने बाहर आकर देखा तो आग नीचे के फ्लोर से फैल चुकी थी और पूरा घर धुएं से भर गया था। तभी जान बचाने के लिए सौरभ ने बालकनी से पड़ोसियों को आवाज लगाई।
पड़ोसियों की मदद से जाली तोड़कर सीढ़ी लगाई गई, जिसके जरिए उनकी मां और भाई नीचे उतरने में सफल रहे। हालांकि, सौरभ जब अपने पिता और पत्नी को बचाने के लिए दोबारा घर के अंदर गए, तो अत्यधिक धुएं और ऑक्सीजन की कमी के कारण उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी और उन्हें बाहर निकलना पड़ा। इस दौरान उनकी पत्नी सिमरन भी बाहर आ गई थीं, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों को बचाने के लिए वह फिर से अंदर चली गईं और बाहर नहीं आ सकीं। आग पर काबू पाने के बाद जब सौरभ घर के अंदर पहुंचे, तो उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी और पिता के शव घर के अंदर ही पड़े थे। सिमरन चैनल गेट पकड़कर बैठी हुई जली हुई अवस्था में मिलीं, जबकि उनके पास ही उनके पिता का शव भी पड़ा था। फिलहाल आग लगने के कारणों और फायर ब्रिगेड के रिस्पॉन्स को लेकर जांच जारी है। वहीं, परिवार ने सौरभ को मीडिया से ज्यादा बातचीत करने से भी रोक दिया है। लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर से सुरक्षा इंतजामों और आपातकालीन व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि आखिर इतनी बड़ी त्रासदी कैसे हुई।
वायरल वीडियो के दावे को फायर ब्रिगेड अधिकारी ने किया खारिज
वहीं, दर्दनाक हादसे का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि हादसे से पहले पड़ोसियों ने फायर ब्रिगेड को फोन किया था, लेकिन कंट्रोल रूम से कोई जवाब नहीं मिला। वीडियो वायरल होने के बाद फायर ब्रिगेड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, गांधी हॉल फायर स्टेशन के एएसआई सुशील कुमार दुबे ने इन सभी आरोपों का खंडन किया है।

उन्होंने बताया कि उन्हें कंट्रोल रूम से सुबह 4 बजकर 1 मिनट पर आग लगने की सूचना मिली थी। इसके तुरंत बाद 4 बजकर 2 मिनट पर गांधी हॉल फायर स्टेशन से दमकल की एक गाड़ी कर्मचारियों के साथ रवाना कर दी गई थी। जिसमें दमकल की टीम 4 बजकर 19 मिनट पर मौके पर पहुंची। आग की गंभीरता को देखते हुए 4 बजकर 20 मिनट पर दूसरी फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी बुला ली गई। इसके बाद लगातार कड़ी मशक्कत के बाद सुबह करीब 7 बजकर 55 मिनट पर आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया और इसकी सूचना कंट्रोल रूम को दे दी गई।

एएसआई सुशील कुमार दुबे ने कहा कि यह वीडियो कब का है और किसके द्वारा वायरल किया गया है इसकी जानकारी तो उन्हें नहीं है, लेकिन वीडियो में जो दावा किया जा रहा है कि फायर ब्रिगेड की तरफ से सही तरीके से जवाब नहीं दिया गया, वह पूरी तरीके से गलत है। फिलहाल, वायरल वीडियो और आधिकारिक बयान के बीच सच्चाई क्या है, इसकी जांच की मांग उठ रही है।
अग्निकांड के बाद प्रशासन बिल्डिंगों में फायर NOC को लेकर सख्त
इंदौर अग्निकांड के बाद शहर में बिल्डिंगों में फायर एनओसी को लेकर एक बार फिर सख्ती देखने को मिल सकती है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शहर में फायर एनओसी को लेकर जागरूकता अभियान शुरू करने की बात कही है। दरअसल, इंदौर आगजनी मामले में शहर की बड़ी बिल्डिंगों, शॉपिंग मॉल्स और रहवासी सोसायटियों की फायर एनओसी पर सवालिया निशान उठने लगे हैं।

डेढ़ साल पहले इंदौर नगर निगम के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने तत्कालीन निगमायुक्त और वर्तमान कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देशन में विशेष टीम बनाकर शहर के विभिन्न बड़ी बिल्डिंगों, शॉपिंग मॉल्स और रहवासी सोसायटियों की फायर एनओसी की जांच पड़ताल शुरू की थी। शहर के करीब सौ से अधिक बिल्डिंग और मॉल्स पर चालानी कार्रवाई के साथ फायर सेफ्टी से जुड़े नियमों के तहत इक्यूपमेंट ठीक भी करवाए थे। इस दौरान जांच में कई जगहों पर फायर सेफ्टी के नाम पर सीज फायर खाली पाए गए थे, जिन पर भारी जुर्माना भी लगाया गया था। अब ब्रजेश्वरी एन एक्स की घटना के बाद शहर के बड़े भवनों की जांच पड़ताल शुरु की जा सकती है।

महपौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा है कि शहर में फायर एनओसी को लेकर अभियान पहले भी चलाया गया था लेकिन इस घटना के बाद फायर सेफ्टी पर फिर से ध्यान दिया जाना आवश्यक है, लिहाजा शहर में सभी स्थानों पर चेकिंग की जाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि शहर में आग बुझाने के साधनों को बढ़ाने के लिए नए उपकरण खरीदने के टेंडर जारी किए जा चुके हैं और एक आग बुझाने का रोबोट भी खरीदा गया है जो आने वाले दिनों में शहर में आग बुझाने के दौरान काम में लिया जाएगा। साथ ही बढ़ते हुए शहर के देखते हुए इंदौर में चार नए स्थानों का चयन किया गया है, जहां नए फायर स्टेशन बनाने को स्वीकृति दी गई है।
Varsha Shrivastava 
