Mahakal Raksha Bandhan 2026 : रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी, सवा लाख लड्डुओं का महाभोग

Mahakal Raksha Bandhan 2026 : महाकाल मंदिर में तड़के करीब 3 बजे हुई भस्म आरती के दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को राखी अर्पित की।

Mahakal Raksha Bandhan 2026 : रक्षाबंधन पर सबसे पहले महाकाल को बांधी राखी,  सवा लाख लड्डुओं का महाभोग

Mahakal Raksha Bandhan 2026 : मध्य प्रदेश। रक्षाबंधन पर्व पर देश की पहली राखी भगवान महाकाल को बांधी गई। उज्जैन के महाकाल मंदिर में 28 अगस्त शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे भस्म आरती हुई। इसी दौरान पुजारी परिवार की महिलाओं ने बाबा महाकाल को विशेष राखी अर्पित की। धार्मिक मान्यता है कि हिंदू रीति-रिवाजों से मनाए जाने वाले कई प्रमुख पर्वों की शुरुआत भगवान महाकाल के आंगन से होती है। इसी परंपरा के तहत सबसे पहले बाबा महाकाल को राखी बांधी गई।

सावनभर व्रत रखकर तैयार की राखी

भगवान महाकाल के लिए राखी तैयार करने वाली पुजारी परिवार की महिलाओं ने पूरे सावन महीने में व्रत और उपवास रखा। इसके बाद करीब एक सप्ताह तक मेहनत करके उन्होंने अपने हाथों से विशेष राखी तैयार की। 

राखी को बाबा महाकाल के स्वरूप और उनके प्रिय प्रतीकों को ध्यान में रखकर बनाया गया। इस बार करीब 2 फीट लंबी विशाल राखी तैयार की गई। इसे भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को अर्पित किया गया।

सवा लाख लड्डुओं का लगाया भोग

रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान महाकाल को सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया गया। इसके बाद भगवान की आरती की गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त पूरे श्रावण महीने में व्रत और उपवास रखते हैं, वे श्रावणी पूर्णिमा पर भगवान महाकाल के लड्डू प्रसाद को ग्रहण करके अपना उपवास खोलते हैं। ज्यादा से ज्यादा श्रद्धालुओं को प्रसाद मिल सके, इसलिए पुजारी परिवार की ओर से सवा लाख लड्डुओं का भोग लगाया जाता है।

रेशमी कपड़े और रुद्राक्ष से सजी राखी

पुजारी आकाश गुरु के अनुसार, करीब 2 फीट लंबी इस विशेष राखी को रेशमी कपड़े, रेशमी धागे और आभूषणों से तैयार किया गया है। राखी में भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय मोर पंख के साथ गौ माता को भी स्थान दिया गया है। 

इसे आकर्षक बनाने के लिए कांच वर्क, मोर पंख और रुद्राक्ष का इस्तेमाल किया गया है। इसके साथ ही बाबा महाकाल के प्रिय त्रिनेत्र, ॐ और त्रिपुंड को भी राखी के डिजाइन में शामिल किया गया है।

सबसे पहले पर्व की शुरुआत की मान्यता

धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्रमुख हिंदू पर्वों की शुरुआत सबसे पहले बाबा महाकाल के दरबार से होती है। इसी वजह से रक्षाबंधन पर भी सबसे पहले भगवान महाकाल को राखी बांधने की परंपरा मानी जाती है। 

राखी अर्पित करते समय देश और समाज की रक्षा के साथ सुख-समृद्धि और विश्व कल्याण की कामना की जाती है। श्रद्धालुओं के लिए यह परंपरा धार्मिक आस्था और लोककल्याण से जुड़ी मानी जाती है।

महाकाल को भाई मानने की परंपरा

बाबा महाकाल को राखी बांधने की एक खास मान्यता भी है। जिन महिलाओं के भाई नहीं हैं, वे भगवान महाकाल को अपना भाई मानकर उन्हें राखी बांधती हैं। 

रक्षाबंधन के दिन पुजारी परिवार की महिलाएं भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल को रक्षासूत्र अर्पित करती हैं। भक्तों की आस्था में यह परंपरा भाई-बहन के रिश्ते के साथ भगवान के प्रति विश्वास और सुरक्षा की भावना को भी दर्शाती है।

काल से परे माने जाते हैं महाकाल

धार्मिक मान्यता में भगवान महाकाल को कालजयी और काल से परे माना जाता है। इसी आस्था के कारण उन्हें भद्रा और शुभ मुहूर्त के सामान्य बंधनों से परे माना जाता है। 

रक्षाबंधन पर बाबा महाकाल को राखी अर्पित करने की परंपरा इसी विशेष धार्मिक मान्यता से भी जुड़ी हुई है। भक्तों के लिए महाकाल को रक्षासूत्र बांधना भगवान से सुरक्षा और मंगल की कामना करने का अवसर माना जाता है।

सावन पूर्णिमा पर विशेष पूजन

सावन पूर्णिमा का भगवान महाकाल की पूजा में भी विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन राखी बांधने के साथ बाबा महाकाल का विशेष पूजन किया जाता है। भगवान को महाभोग भी लगाया जाता है। सवा लाख लड्डुओं का भोग इसी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इसके बाद श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करके अपना व्रत खोलते हैं।