मऊगंज के बीला जंगल में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड नहीं पहुंचने से करोड़ों की वन संपदा जलकर खाक 

धूं-धूं कर जलता रहा जंगल। बंगले में आराम फरमाते रहे वन विकास निगम के अधिकारी। सूखी घास से भड़की आग ने देखते ही देखते बेशकीमती पौधे जलकर किए स्वाहा।

मऊगंज के बीला जंगल में लगी भीषण आग, फायर ब्रिगेड नहीं पहुंचने से करोड़ों की वन संपदा जलकर खाक 

मऊगंज से रिपोर्टर राजेंद्र पयासी 

मऊगंज। जिले के मऊगंज रेंज अंतर्गत आने वाले शिवराजपुर सब रेंज स्थित वन विकास निगम के बीला पहाड़ के बेशकीमती वन संपदा से ढके घने जंगल में 12 अप्रैल को अज्ञात कारणों के चलते अचानक आग लग गई। सूखी घास से भड़की आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया, जिसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने 112 इमरजेंसी पुलिस टीम को सूचना दी।

वन विकास निगम के डिप्टी रेंजर और बीट प्रभारी जैसे कुछ कर्मचारी, चौकीदार, ग्रामीणों सहित 112 पुलिस टीम ने आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन देखते ही देखते कई किलोमीटर क्षेत्र का एक बड़ा वन क्षेत्र जलकर खाक हो गया। सबसे बड़ी लापरवाही ये रही कि भीषण आगजनी के बीच न तो फायर ब्रिगेड टीम पहुंची और न ही वन विकास निगम के बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे।

स्थानीय लोगों की मानें तो जिम्मेदार विभाग के बड़े अधिकारियों ने भीषण आग बुझाने की व्यवस्था करना तो दूर, मौके की स्थिति का जायजा लेना तक उचित नहीं समझा। बीला जंगल में लगी भीषण आग पर काबू पाने के लिए विभाग के कुछ कर्मचारी और स्थानीय लोग प्रयास करते रहे, लेकिन आग बुझाने के लिए उन कर्मचारियों के पास कोई पर्याप्त सुविधा नहीं थी। जिससे जब तक जंगल में धधक रही आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया, तब तक जंगल का बड़ा क्षेत्र आग की चपेट में आ चुका था।

धधकता रहा जंगल, गायब रहे अधिकारी

मऊगंज जिले के शिवराजपुर स्थित बीला वन विकास निगम के जंगल में लगी भीषण आग के दौरान जब क्षेत्र की जनता जिम्मेदार आला अधिकारियों से जंगल बचाने को लेकर गुहार लगाती रही। उस दौरान देखा गया कि अपनी-अपनी जिम्मेदारी भूलकर विभाग के बड़े अधिकारी वातानुकूलित बंगलों से बाहर निकलना उचित नहीं समझ रहे थे और इधर शिवराजपुर सब रेंज का बीला नामक जंगल जलकर राख में तब्दील होता रहा।

गौरतलब है कि वन विकास निगम के ही बड़े आला अधिकारियों की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली के चलते पूरे जंगल में माफिया राज कायम है। क्षेत्र के दर्जन भर स्थानों में जगह-जगह अवैध ठोका पत्थर की खदानें संचालित हैं और वन संपदा का अवैध दोहन निरंतर चल रहा है। बता दें कि यह वही जंगल है, जहां हर साल पेड़ों की अवैध कटाई होती है और इसी जंगल में साल 2021 से लेकर आज तक कई बार आगजनी की घटनाएं घट चुकी हैं।

बीते 5 साल पहले भी इसी वन विकास निगम के जंगल को तथाकथित जिम्मेदार आला अधिकारियों द्वारा खुलेआम कटवाकर ईंट-भट्ठा व्यवसायियों के हाथ जलाऊ और इमारती लकड़ी बेच दी गई थी। जिसकी हकीकत जब समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई थी, तब जिम्मेदार आला अधिकारी जागे और काटे गए जंगल का जायजा लिया गया था। लेकिन कई साल गुजर जाने के बाद भी जांच के नाम पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

5 साल के अंतराल में इस जंगल में कई बार आग लगी और अब एक बार फिर से शिवराजपुर सब रेंज के बीला वन विकास निगम के जंगल में आग लगी है और आला अधिकारी अपनी जिम्मेदारी भूलकर मऊगंज जिला मुख्यालय से न केवल अनुपस्थित रहे। बल्कि इतनी बड़ी आगजनी के बाद भी न तो मौके पर पहुंचे और न ही आग बुझाने हेतु पुख्ता इंतजाम किए गए, जिसके कारण पूरा बीला जंगल दिनभर धूं-धूं कर जलता रहा।

नहीं पहुंची दमकल, भारी नुकसान की संभावना

रविवार को वन विकास निगम के बीला जंगल में लगी भीषण आग के कारण जंगल के बेशकीमती पेड़-पौधे जलकर खाक हो गए। सूखी घास में भड़की आग ने जंगल के बड़े क्षेत्र को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे जंगली पौधों को भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। यहां सबसे बड़ी बात यह रही कि पूरा दिन जंगल जलता रहा, लेकिन वन विकास निगम के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इसे गंभीरता से नहीं लिया गया।

इतना ही नहीं, इस 12 घंटे की अवधि में फायर ब्रिगेड यानी दमकल मशीन भी मौके पर नहीं पहुंची, जिससे वन विकास निगम के डिप्टी रेंजर सहित स्थानीय कर्मचारी, चौकीदार और ग्रामीण पेड़-पौधों और झाड़ियों से आग बुझाने का प्रयास करते रहे। स्थानीय लोगों ने कहा कि यदि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आगजनी की घटना को गंभीरता से लेते और उत्पन्न समस्या से जिला प्रशासन को अवगत कराते, तो रीवा और मऊगंज जिले के अन्य नगर परिषद क्षेत्रों से फायर ब्रिगेड मशीन पहुंचती और समय पर आग बुझ जाती, जिससे इतना बड़ा नुकसान नहीं होता।

आग बुझाने वालों पर मधुमक्खियों ने किया हमला

भीषण गर्मी के बीच जंगल में भड़की आग पर काबू पाने के लिए निहत्थे कर्मचारी और ग्रामीण अथक प्रयास में जुटे रहे। इस बीच कर्मचारियों और ग्रामीणों में उस समय भगदड़ की स्थिति निर्मित हो गई, जब आग बुझा रहे कर्मचारियों और ग्रामीणों पर मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। मधुमक्खियों के हमले से कई कर्मचारी एवं ग्रामीण घायल हो गए, जिन्हें उपचार के लिए ले जाया गया।

वन विकास निगम के बीट सहायक कृष्णमूर्ति पांडेय ने बताया कि फायर ब्रिगेड मशीन न पहुंचने के कारण आग बुझाने में भारी समस्या का सामना करना पड़ा। इस बीच कर्मचारियों पर मधुमक्खियों ने भी हमला कर दिया, जिससे कई लोग घायल हो गए। हालांकि शाम तक आग पर काबू पा लिया गया, पर आग के कारण वन संपदा को बड़ा नुकसान हुआ है।