प्रोबेशन में 100% वेतन के आदेश को SC में चुनौती: MP सरकार ने कहा- नियम बनाने का अधिकार राज्य का

वेतन व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट पहुंची MP सरकार, आदेश पर रोक लगाने की मांग की, एरियर से खजाने पर अतिरिक्त भार का तर्क, 2019 से लागू 70-80-90% वेतन व्यवस्था को High Court ने रद्द किया था, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूरा वेतन देने को कहा था

प्रोबेशन में 100% वेतन के आदेश को SC में चुनौती: MP सरकार ने कहा- नियम बनाने का अधिकार राज्य का

Bhopal 17 सितंबर। मध्यप्रदेश में सीधी भर्ती से नियुक्त तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के प्रोबेशन पीरियड के वेतन का मामला अब Supreme Court पहुंच गया है। Madhya Pradesh Government ने Madhya Pradesh High Court के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें प्रोबेशन के दौरान 70%, 80% और 90% वेतन देने की व्यवस्था को रद्द कर कर्मचारियों को नियुक्ति की तारीख से 100% वेतन देने का आदेश दिया गया था।

High Court की डिवीजन बेंच ने 8 सितंबर 2026 को दिए फैसले में 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में पूरे वेतन का हकदार माना था। कोर्ट ने 70-80-90% भुगतान से जुड़ी नियमों और सर्कुलर को निरस्त कर दिया था।

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा?

राज्य सरकार ने Supreme Court में दाखिल याचिका में High Court के आदेश पर रोक लगाने की मांग की है। सरकार का तर्क है कि सरकारी कर्मचारियों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से जुड़े नियम तय करने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। इसके लिए सरकार ने संविधान के Article 309 का भी हवाला दिया है।

सरकार के मुताबिक 70%, 80% और 90% भुगतान की व्यवस्था अचानक या मनमाने तरीके से लागू नहीं की गई थी। इसे Finance Department और General Administration Department में प्रक्रिया और विचार-विमर्श के बाद लागू किया गया था।

70-80-90% वेतन व्यवस्था क्या थी?

राज्य की व्यवस्था के अनुसार, गैर-MPPSC भर्ती से नियुक्त कुछ कर्मचारियों को तीन साल के प्रोबेशन के दौरान न्यूनतम पे-स्केल का 70% पहले साल, 80% दूसरे साल और 90% तीसरे साल दिया जाता था। यह व्यवस्था खास तौर पर Class III और Class IV कर्मचारियों की सीधी भर्ती से जुड़ी थी। High Court के रिकॉर्ड में 12 दिसंबर 2019 के General Administration Department के सर्कुलर और बाद के नियमों में इस व्यवस्था का उल्लेख है।

High Court ने अपने 8 सितंबर के फैसले में कहा था कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद कर्मचारी से नियमित काम लिया जाता है, इसलिए प्रोबेशन के दौरान कम वेतन देने का पर्याप्त आधार नहीं है। कोर्ट ने संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि के काम के लिए पूरा वेतन देने का निर्देश दिया।

सरकार ने एरियर का भी उठाया मुद्दा

राज्य सरकार ने Supreme Court में आर्थिक असर का भी उल्लेख किया है। यदि High Court का आदेश लागू होता है तो 2019 के बाद प्रोबेशन पर रहे पात्र कर्मचारियों को कम भुगतान और 100% वेतन के बीच का अंतर एरियर के रूप में देना पड़ सकता है।

सरकार का कहना है कि पुराने एरियर के भुगतान के साथ भविष्य में होने वाली बड़ी भर्तियों के वेतन बजट पर भी असर पड़ सकता है। याचिका में पुलिस, पटवारी और शिक्षक जैसी बड़ी भर्तियों का उदाहरण दिया गया है। सरकार के अनुसार अतिरिक्त वित्तीय बोझ का असर अन्य बजटीय मदों पर भी पड़ सकता है।

प्रोबेशन को प्रशिक्षण और दक्षता से जोड़ा

सरकार ने अपने पक्ष में यह तर्क भी दिया है कि प्रोबेशन केवल नौकरी की शुरुआत की अवधि नहीं है, बल्कि इस दौरान कर्मचारी के काम, प्रशिक्षण और दक्षता का आकलन किया जाता है। राज्य ने 1966 के सेवा नियमों और वित्तीय नियमों का हवाला देते हुए चरणबद्ध भुगतान व्यवस्था को उचित बताया है।

सरकार का कहना है कि सेवा शर्तों से जुड़े नीतिगत फैसलों में अदालत का हस्तक्षेप सीमित होना चाहिए, जब तक किसी स्पष्ट कानूनी प्रावधान का उल्लंघन न हो।

HC पहले भी दे चुका है 100% वेतन का आदेश

यह मामला पहली बार अदालत नहीं पहुंचा है। Madhya Pradesh High Court ने जनवरी 2026 में भी संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि का 100% वेतन देने का आदेश दिया था। इसके बाद कई मामलों में इसी आधार पर कर्मचारियों को राहत मिली। जुलाई 2026 के एक मामले में भी कोर्ट ने प्रोबेशन अवधि के दौरान 100% वेतन देने का निर्देश दिया था।

8 सितंबर के फैसले में High Court ने 25 नवंबर 2019 के बाद नियुक्त संबंधित कर्मचारियों को प्रोबेशन अवधि में पूरे वेतन का लाभ देने का निर्देश दिया। अब राज्य सरकार ने इस फैसले को Supreme Court में चुनौती दी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से अंतिम फैसला आने तक आगे की स्थिति न्यायिक कार्यवाही पर निर्भर करेगी।