रीवा: बारदाना नहीं, सत्यापन अधूरा, धान उपार्जन केंद्रों पर हाहाकार

रीवा जिले में धान खरीदी केंद्रों पर बारदाने की कमी और सत्यापन में देरी से किसान परेशान हैं। ठंड में किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है और तौल व पेमेंट भी अटका हुआ है।

रीवा: बारदाना नहीं, सत्यापन अधूरा, धान उपार्जन केंद्रों पर हाहाकार
AI image

रीवा जिले में धान खरीदी को लेकर किसानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सरकार कह रही है कि सब ठीक चल रहा है, लेकिन खरीदी केंद्रों पर हालात कुछ और ही हैं। कई केंद्रों पर बारदाना नहीं है और किसानों का सत्यापन भी समय पर नहीं हो पा रहा है। इसकी वजह से किसान कड़ाके की ठंड में दिन-रात केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।

परेशान हैं किसान 

करहिया मंडी के बाहुरी बांध खरीदी केंद्र पर गुरुवार को बारदाना खत्म हो गया, जिससे धान की तौल पूरी तरह बंद हो गई। केंद्र के कर्मचारियों के पास ये बताने का कोई जवाब नहीं है कि नया बारदाना कब आएगा। जिले के कई दूसरे खरीदी केंद्रों पर भी यही हाल है। किसान ट्रॉलियों में धान भरकर पहुंचते हैं, लेकिन तौल न होने की वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ता है।

ठंड में हो रही परेशानी 

केंद्रों पर ठंड से बचने के लिए अलाव या बैठने की कोई सही व्यवस्था भी नहीं है। बुजुर्ग, बच्चे और किसान खुले में रात गुजार रहे हैं। ऊपर से सत्यापन की दिक्कत ने परेशानी और बढ़ा दी है। कई किसानों का नाम तो पंजीकृत है, लेकिन सत्यापन नहीं होने से उनका धान नहीं लिया जा रहा। किसान तहसील और खाद्य विभाग के दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

नहीं हो रहा सत्यापन 

कुछ किसानों का धान तौल लिया गया है, लेकिन कंप्यूटर में एंट्री न होने से भुगतान अटका हुआ है। प्रशासन ने 19 दिसंबर को सत्यापन की आखिरी तारीख तय की है। इसके बाद जिन किसानों का सत्यापन नहीं होगा, उनका धान नहीं खरीदा जाएगा। किसानों का कहना है कि ज्यादातर लोगों का सत्यापन अभी भी बाकी है।

आंदोलन की दी चेतवनी 

किसानों का आरोप है कि कागजों में व्यवस्था ठीक दिखाई जा रही है, लेकिन हकीकत में हालात खराब हैं। बारदाने की कमी और सत्यापन में देरी से फसल खराब होने का डर सता रहा है। जिले में धान खरीदी 2 दिसंबर से शुरू हुई है और 20 जनवरी 2026 तक चलेगी, लेकिन अगर यही हाल रहा तो किसानों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्दी से बारदाने की व्यवस्था की जाए और सत्यापन की प्रक्रिया आसान बनाई जाए। किसान संगठनों ने भी चेतावनी दी है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।