सतना जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही: OPD में आधे घंटे तक बंद रहीं दो छात्राएं, गेट पर लगा दिया ताला

सतना के जिला अस्पताल में कर्मचारियों की लापरवाही के चलते इलाज के लिए आई दो छात्राएं OPD भवन में ही बंद हो गईं। करीब आधे घंटे बाद शोर मचाने पर उन्हें बाहर निकाला गया।

सतना जिला अस्पताल में बड़ी लापरवाही: OPD में आधे घंटे तक बंद रहीं दो छात्राएं, गेट पर लगा दिया ताला

सतना: मध्य प्रदेश के सतना जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी और गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां के सरदार वल्लभ भाई पटेल जिला अस्पताल के नवीन ओपीडी (OPD) भवन में इलाज कराने आईं दो छात्राओं को कर्मचारियों ने अंदर ही बंद कर दिया। अस्पताल स्टाफ ने बिना जांच-पड़ताल किए और बिना यह देखे कि अंदर कोई है या नहीं, चैनल गेट पर ताला जड़ दिया। इसके चलते दोनों छात्राएं करीब आधे घंटे तक ओपीडी के भीतर ही कैद रहीं।

डॉक्टर का इंतजार कर रही थीं छात्राएं..
जानकारी के मुताबिक, दोनों छात्राएं अपनी बीमारी का इलाज कराने के लिए जिला अस्पताल पहुंची थीं। वे नवीन ओपीडी भवन के भीतर डॉक्टर के केबिन के बाहर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रही थीं।

बताया जाता है कि दोपहर 2:00 बजे के बाद ओपीडी का समय समाप्त हो जाता है और डॉक्टर ब्रेक पर चले जाते हैं, जिसके बाद ओपीडी भवन को बंद करने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। इसी दौरान ड्यूटी पर मौजूद अस्पताल स्टाफ ने घोर लापरवाही दिखाई। उन्होंने पूरे भवन का मुआयना करना भी जरूरी नहीं समझा और सीधे मुख्य द्वारों पर ताला लगाकर वहां से चले गए।

आधे घंटे तक मचाती रहीं शोर, तब जाकर खुला ताला..
ओपीडी के अंदर खुद को बंद पाकर दोनों छात्राएं बुरी तरह घबरा गईं। उन्होंने बाहर निकलने के लिए कई बार आवाज लगाई, लेकिन दोपहर का वक्त होने और स्टाफ के चले जाने के कारण काफी देर तक उनकी चीख-पुकार किसी ने नहीं सुनी।

चैनल गेट पर मचाया शोर..
करीब आधे घंटे तक अंदर फंसे रहने और परेशान होने के बाद छात्राओं ने चैनल गेट के पास आकर जोर-जोर से शोर मचाना शुरू किया।

कर्मचारियों की खुली नींद..
वहां से गुजर रहे अस्पताल के कुछ अन्य कर्मचारियों का ध्यान जब छात्राओं की आवाज पर गया, तब जाकर वे मौके पर पहुंचे। अंदर छात्राओं को फंसा देख उनके भी हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में चाबी मंगाकर ताला खोला गया, तब जाकर दोनों छात्राओं को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका।

व्यवस्था और सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल..
इस घटना ने जिला अस्पताल की सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  • दोपहर में ओपीडी बंद करते समय क्या वार्ड बॉय या सुरक्षा गार्ड्स की यह जिम्मेदारी नहीं है कि वे हर कमरे और गैलरी की जांच करें?
  • अगर इस दौरान किसी गंभीर मरीज की तबीयत अंदर ज्यादा बिगड़ जाती, तो इसका जिम्मेदार कौन होता?

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों ने इस मामले में दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज के साथ इस तरह का खिलवाड़ न हो।