भोपाल स्लॉटर हाउस में गोमांस मामला: नगर निगम परिषद की जबरदस्त हंगामा, वेटनरी डॉक्टर बेनीप्रसाद गौर सस्पेंड
निगम के स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मुद्दे को लेकर भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में हंगामा। कांग्रेस पार्षदों ने नारेबाजी की, BJP पार्षदों ने जमीन पर बैठकर विरोध जताया। निगम के पशु चिकित्सक बेनीप्रसाद गौर निलंबित।
भोपाल। भोपाल नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मामले ने 13 जनवरी मंगलवार को नगर निगम परिषद की बैठक को पूरी तरह से सियासी अखाड़ा बना दिया। बैठक तय समय से करीब एक घंटे की देरी से शुरू हुई, लेकिन कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक और नारेबाजी शुरू हो गई। कांग्रेस और भाजपा—दोनों दलों के पार्षदों ने इस मामले में कड़ा विरोध जताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। हालात इतने बिगड़ गए कि परिषद की कार्यवाही को 30 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।
वेटनरी डॉक्टर बेनीप्रसाद गौर सस्पेंड
मामले में कार्रवाई करते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नगर निगम के पशु चिकित्सक डॉ. बेनी प्रसाद गौर को निलंबित करने के आदेश दे दिए गए हैं। डॉ. गौर के जिम्मे ही स्लॉटर हाउस में स्लॉटिंग का काम था। उनके निलंबन को इस मामले में पहली बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई माना जा रहा है।

सदन के भीतर हंगामे के साथ-साथ शहर की सड़कों पर भी विरोध देखने को मिला। वहीं विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल समेत कई हिंदू संगठनों ने गोमांस मिलने के विरोध में प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
पोस्टर, नारे और इस्तीफे की मांग
जैसे ही बैठक शुरू हुई, कांग्रेस पार्षद हाथों में पोस्टर लेकर सदन में पहुंच गए और गोमांस मिलने के मामले को लेकर जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस पार्षदों ने महापौर मालती राय और मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) से इस्तीफे की मांग करते हुए आरोप लगाया कि इस पूरे प्रकरण में सिर्फ ठेकेदार को बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि इसके पीछे शामिल नेताओं और अधिकारियों के नाम जानबूझकर छुपाए जा रहे हैं। कांग्रेस पार्षद अध्यक्ष की आसंदी के सामने पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठकर नारेबाजी करने लगे।
भाजपा पार्षदों का भी विरोध, सदन में असंतोष
हंगामे के बीच भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव भी विरोध जताते हुए जैकेट पर कागज चस्पा कर सदन में पहुंचे। उन्होंने गोमांस मिलने को गंभीर अपराध बताते हुए कहा कि भोपाल नगर निगम ने गोहत्या जैसी घटना को कैसे होने दिया। उनका कहना था कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी का भी सवाल है। भावुक होते हुए उन्होंने सदन में इस्तीफा देने की इच्छा तक जाहिर कर दी और बैठक से बाहर निकल गए। हालांकि बाद में उनका इस्तीफा अस्वीकार कर दिया गया और वे दोबारा सदन की कार्यवाही में शामिल हुए।
भाजपा के वरिष्ठ पार्षद सुरेंद्र बाठिका और पप्पू विलास घाड़गे समेत कई अन्य भाजपा पार्षदों ने भी खुलकर नाराजगी जताई। इससे साफ हो गया कि यह मामला केवल सत्ता और विपक्ष के बीच का नहीं रहा, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर भी असंतोष गहराता जा रहा है।
जमीन पर बैठकर प्रदर्शन, फांसी की मांग
गौ हत्या के विरोध में भाजपा पार्षदों ने सदन के भीतर जमीन पर बैठकर प्रदर्शन किया। कुछ पार्षदों ने तो दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग तक रख दी। एमआईसी सदस्य रविंद्र यति ने सदन में कहा कि गाय काटने वालों को फांसी की सूली पर चढ़ाया जाना चाहिए। भाजपा पार्षदों का आरोप रहा कि भोपाल की मध्य विधानसभा से जुड़े कुछ नेताओं के संरक्षण में यह पूरी घटना हुई है। उनका कहना था कि स्लॉटर हाउस के 11 कर्मचारी सीधे तौर पर दोषी हैं और इन सभी पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए।
एमआईसी सदस्य और जांच की मांग
एमआईसी सदस्य आरके सिंह बघेल ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई और एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी और जिम्मेदार लोग बचते रहेंगे।
महापौर का सख्त रुख
महापौर मालती राय ने सदन में कहा कि इस मुद्दे पर लंबी बहस की जरूरत नहीं है, बल्कि सीधे और सख्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भोपाल में स्लॉटर हाउस बंद होना चाहिए और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। महापौर ने यह भी कहा कि टेंडर पीपीटी मोड पर बनाया गया था और टेंडर के समय कोई परिषद मौजूद नहीं थी। एमआईसी ने कभी गाय काटने की अनुमति नहीं दी थी। ऐसे में जो भी लोग इस मामले में शामिल हैं, उन पर कार्रवाई होना तय है।
नगर निगम अध्यक्ष का बयान
नगर निगम परिषद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने भी स्लॉटर हाउस के अस्तित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजधानी भोपाल को मांस की मंडी बनाने की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि नगर निगम के लिए यह बाध्यकारी नहीं है कि स्लॉटर हाउस चलाया ही जाए। निगम के पास यह विवेकाधिकार है कि किस व्यवसाय को अनुमति दी जाए और किसे नहीं। उनका स्पष्ट मत था कि स्लॉटर हाउस को राजधानी से स्थायी रूप से बंद कर देना चाहिए।
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