SC में SIR पर सुनवाई: ममता बनर्जी ने दी दलील, कहा- मैं पार्टी के लिए नहीं, न्याय के लिए खड़ी हूं
सुप्रीम कोर्ट ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के मुद्दे पर सुनवाई की। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपनी दलील कोर्ट के सामने रखीं। कोर्ट ने चुनाव आयोग और सीईओ बंगाल समेत पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए सोमवार को अलगी सुनवाई की तारीख तय की है।
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) के मुद्दे पर सुनवाई की। इस दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी अपनी दलील कोर्ट के सामने रखीं। कोर्ट ने चुनाव आयोग और सीईओ बंगाल समेत पक्षकारों को नोटिस जारी करते हुए सोमवार को अलगी सुनवाई की तारीख तय की है।
सुनवाई के लिए सीएम ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट की संवेदनशीलता और सहयोग के लिए आभार जताया। उन्होंने कहा, जब न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा था, तब कहीं से भी समाधान नहीं मिल पा रहा था। ममता बनर्जी के मुताबिक, उन्होंने चुनाव आयोग को 6 पत्र लिखे थे। उन्होंने आगे कहा, “मैं एक बंधुआ मज़दूर की तरह हूं और सुप्रीम कोर्ट से साफ कहना चाहती हूं कि मैं यहां किसी पार्टी की ओर से नहीं, बल्कि सिर्फ न्याय के लिए खड़ी हूं।” उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि 2022 की वोटर लिस्ट से किसी भी मतदाता का नाम न हटाया जाए।
इसके बाद CJI सूर्यकांत ने कहा, 19 जनवरी को कपिल सिब्बल ने राज्य को SIR प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों के बारे में बताया था, जिसके बाद आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। आज की याचिका में भी कुछ अतिरिक्त समस्याएं सामने रखी गई हैं। उन्होंने कहा कि हर समस्या का कोई न कोई समाधान होता है और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी निर्दोष व्यक्ति मतदाता सूची से बाहर न हो।
एक उद्देश्य मृत व्यक्तियों के नाम हटाना है, दूसरा अयोग्य लोगों को हटाना, और यह भी सुनिश्चित करना है कि प्रवासी लेकिन वास्तविक और पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें।
इसके बाद CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर पश्चिम बंगाल में ‘रॉय’, ‘दत्ता’, ‘गांगुली’ जैसे नाम हटाए जा रहे हैं, तो यह भी नहीं पता कि ‘टैगोर’ का सही उच्चारण क्या है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं हो सकता कि ‘टैगोर’, टैगोर नहीं है।
इस पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जवाब देते हुए कहा कि वह उदाहरण देकर अपनी बात समझा सकती हैं। उन्होंने कहा, वह ऐसी तस्वीरें दिखा सकती हैं जो प्रमुख अख़बारों में प्रकाशित हुई हैं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल केवल नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कहा, मान लीजिए किसी बेटी की शादी हो जाती है और वह ससुराल चली जाती है, तो सवाल उठाया जा रहा है कि वह पति का सरनेम क्यों इस्तेमाल कर रही है। राज्य में ऐसी कई बेटियां हैं, जिनके नाम एकतरफा तरीके से हटा दिए गए हैं। कई बार गरीब लोग फ्लैट खरीदते हैं और स्थान बदलते हैं, लेकिन ऐसे मामलों में भी नाम हटा दिए जा रहे हैं। यह आपके आदेश का उल्लंघन है और सिर्फ ‘गलत मैपिंग’ कहकर पल्ला झाड़ लिया जा रहा है।”
ममता बनर्जी ने ERO और चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, अब ERO की कोई भूमिका नहीं रह गई है। नाम हटाने के लिए बीजेपी शासित राज्यों से माइक्रो ऑब्ज़र्वर भेजे गए हैं। पहले चरण में ही बंगाल में 58 लाख नाम हटा दिए गए, जिनमें कई लोगों को मृत घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा, “यह चुनाव आयोग नहीं, बल्कि एक ‘व्हाट्सऐप आयोग’ बन चुका है, जहां मनमाने तरीके से सब कुछ हो रहा है।”
इसके बाद ममता बनर्जी ने आधार कार्ड का मुद्दा उठाते हुए कहा कि चुनाव आयोग आधार के साथ एक और प्रमाणपत्र मांग रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि दूसरे राज्यों में डोमिसाइल या जाति प्रमाणपत्र क्यों नहीं मांगा जा रहा, जबकि पश्चिम बंगाल को चुनाव से ठीक पहले निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग दो महीने में वह काम करना चाहता है, जिसमें आमतौर पर दो साल लगते हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “आखिर पश्चिम बंगाल को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है? असम को क्यों नहीं?”
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि आधार और SIR की वैधता से जुड़े मुद्दे पर फैसला पहले ही सुरक्षित रखा जा चुका है, इसलिए इस पर टिप्पणी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड की अपनी सीमाएं हैं। गड़बड़ियों को लेकर सुझाव दिया गया कि अधिकारियों की एक टीम बनाई जाए और चुनाव आयोग के साथ मिलकर सत्यापन कराया जाए, ताकि यह देखा जा सके कि किन जगहों पर नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं। इसके लिए एक दिन का समय दिया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी ने एक और बड़ा आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रशासन ज़िला-स्तर पर काम करता है और सभी क्लास-2 अधिकारियों की सूची पहले ही दी जा चुकी है। इसके बावजूद दूसरे चरण में 1.3 करोड़ लोगों के नाम छोड़ दिए गए। माइक्रो ऑब्ज़र्वरों के ज़रिए पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और बंगाल के लोगों को कुचलने की कोशिश हो रही है। इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई सोमवार को की जाएगी। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि उन अधिकारियों की सूची अदालत को दी जाए, जिन्हें सत्यापन प्रक्रिया के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है।
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