Rajya Sabha Chunav 2026: मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द मामले में सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई। कांग्रेस ने रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को गैरकानूनी बताया है।

Rajya Sabha Chunav 2026: मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द मामले में सुप्रीम कोर्ट में कल होगी सुनवाई

भोपाल/नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज किए जाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में शुक्रवार को शीर्ष अदालत में सुनवाई होगी। कांग्रेस ने कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग करते हुए कहा है कि राज्यसभा चुनाव के लिए 18 जून को मतदान होना है, इसलिए मामले का शीघ्र निपटारा जरूरी है।

कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने रिटर्निंग अधिकारी के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई राहत या स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। वहीं, आज नाम वापसी की अंतिम तारीख होने के कारण इस मामले की अहमियत और बढ़ गई है।

देशभर में गरमाई राजनीति

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। कांग्रेस इसे लोकतंत्र पर हमला और विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश बता रही है। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि नामांकन खारिज करने का फैसला पूरी तरह कानून और चुनावी नियमों के अनुरूप लिया गया है।

राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। पार्टी अब इस मुद्दे पर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर संघर्ष की रणनीति तैयार कर रही है।

भाजपा ने उठाई थी आपत्ति

जानकारी के अनुसार, 9 जून को मध्य प्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव एवं रिटर्निंग अधिकारी अरविंद शर्मा ने मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज कर दिया था। यह फैसला भाजपा नेताओं, जिनमें राज्यसभा उम्मीदवार महेश केवट और प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी शामिल हैं, की आपत्तियों के बाद लिया गया।

भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने चुनावी शपथपत्र (फॉर्म-26) में हैदराबाद की एक अदालत में लंबित मामले की जानकारी नहीं दी। रिटर्निंग अधिकारी के आदेश के मुताबिक, नटराजन ने अक्टूबर 2025 में अदालत द्वारा जारी नोटिस का जवाब दिया था, लेकिन नामांकन के साथ दाखिल शपथपत्र में इसका उल्लेख नहीं किया।

अधूरा शपथपत्र मानकर खारिज हुआ नामांकन

रिटर्निंग अधिकारी ने अपने आदेश में कहा कि फॉर्म-26 में संबंधित जानकारी नहीं दिए जाने के कारण शपथपत्र अधूरा माना गया। इसी आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया।

हालांकि कांग्रेस इस फैसले से सहमत नहीं है। पार्टी का कहना है कि हैदराबाद की अदालत ने अभी तक उनके खिलाफ दायर निजी शिकायत पर संज्ञान नहीं लिया है। ऐसे में संज्ञान लेने से पहले जारी नोटिस को लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता और इसकी जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी निगाहें

राज्यसभा चुनाव से पहले यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट के सामने है। अदालत के फैसले का असर न सिर्फ मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट पर पड़ेगा, बल्कि चुनावी शपथपत्रों में जानकारी छिपाने या न देने से जुड़े मामलों की कानूनी व्याख्या पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल राजनीतिक दलों और चुनावी जानकारों की नजरें शीर्ष अदालत की सुनवाई पर टिकी हुई हैं।