MP Nursing Scam : सीधी के नर्सिंग कॉलेज की मान्यता पर सवाल, NSUI ने की CBI जांच की मांग
MP Nursing Scam : NSUI ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
MP Nursing Scam : भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से चल रहें नर्सिंग कॉलेज घोटाले की वजह से हजारों नर्सिंग छात्र छात्राओं का भविष्य अभी अधर में दो बार सीबीआई जांच हो चुकी हैं और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर-चंबल संभाग के नर्सिंग कॉलेजों को भी सीबीआई जांच करवाने को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि जांच करवाना अनिवार्य हैं वहीं, दूसरी ओर मध्यप्रदेश के सीधी जिले की कुसमी तहसील के भादौरा स्थित आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), भोपाल के संयुक्त निदेशक, मुख्यमंत्री समेत विभाग के तमाम अधिकारियों को लिखित शिकायत दी है।
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों और मौके की स्थिति के आधार पर कॉलेज की मान्यता प्रक्रिया की गंभीरता से जांच आवश्यक है सीधी के भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनुप मिश्रा एवं बहू बीना मिश्रा से द्वारा निर्माण अधीन बिल्डिंग में खोले गए कॉलेज को लेकर सवाल उठाए हैं

BJP सांसद के परिवार के लोगों द्वारा कॉलेज संचालन
रवि परमार ने आरोप लगाया है कि आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज का संचालन अनुप मिश्रा , बीना मिश्रा , वैष्णवी मिश्रा , शरद पाठक , राजेश सिंह चौहान रामजियावन पटेल और रीवा के संजय द्विवेदी द्वारा सीधी चैलेंज कप टूर्नामेंट स्पोर्ट समिति सीधी के माध्यम से किया जा रहा हैं।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सांसद पुत्र और उनके करीबियों को नियम विरुद्ध नर्सिंग कॉलेज की मान्यता प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन एवं मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल रजिस्ट्रार और अधिकारियों के नियमों को ताक पर रखकर काम किया।
रवि परमार ने बताया कि NSUI ने CBI से मांग की है कि कॉलेज के स्वामित्व, संचालन, प्रबंधन, आर्थिक लेन-देन, मान्यता के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों तथा संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच की जाए।

निर्माणाधीन भवन में 120 सीटों की मान्यता कैसे?
NSUI की शिकायत के अनुसार कॉलेज द्वारा B.Sc. Nursing की 60 और GNM Nursing की 60, कुल 120 सीटों के लिए मान्यता का आवेदन किया गया था।
परमार का कहना है कि जिस समय कॉलेज की मान्यता की प्रक्रिया हुई, उस समय कॉलेज का भवन निर्माणाधीन था और वर्तमान में भी निर्माणाधीन हैं । इसके बावजूद निरीक्षण दल द्वारा कॉलेज को मान्यता के लिए उपयुक्त पाया गया।
रवि परमार ने सवाल उठाया कि यदि निरीक्षण के समय भवन, प्रयोगशालाएं और अन्य आवश्यक संसाधन निर्धारित मानकों के अनुरूप उपलब्ध नहीं थे, तो निरीक्षण दल ने किस आधार पर कॉलेज को मान्यता के योग्य पाया?

फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्र भी जांच के घेरे में
रवि ने कॉलेज द्वारा प्रस्तुत किए गए फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। संगठन का आरोप है कि शैक्षणिक फैकल्टियों के अनुभव प्रमाण-पत्र फर्जी हैं इसलिए CBI से मांग की गई है कि प्रत्येक प्रमाण-पत्र को संबंधित अस्पताल, संस्था अथवा नियोक्ता से सीधे सत्यापित कराया जाए। यदि कोई प्रमाण-पत्र फर्जी पाया जाता है तो उसके आधार पर मान्यता प्राप्त करने में शामिल सभी जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की जांच की जाए।
मान्यता देने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में हो
NSUI ने कहा कि जांच केवल कॉलेज संचालकों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। मध्यप्रदेश नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल के रजिस्ट्रार और संबंधित अधिकारियों, निरीक्षण दल के सदस्यों और मान्यता प्रक्रिया में शामिल प्रत्येक अधिकारी की भूमिका की जांच होना आवश्यक है। यह भी जांच का विषय है कि निरीक्षण के दौरान कॉलेज में वास्तव में कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध थीं और निरीक्षण रिपोर्ट में उनका क्या उल्लेख किया गया।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप
NSUI जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने कहा कि यदि किसी ऐसे संस्थान में विद्यार्थियों को प्रवेश दिया जाता है जहां आवश्यक भवन, प्रयोगशालाएं और क्लीनिकल प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ेगा।
अक्षय तोमर ने कहा कि विद्यार्थी लाखों रुपये खर्च कर नर्सिंग शिक्षा प्राप्त करते हैं। ऐसे में यदि बाद में कॉलेज की मान्यता, परीक्षा, डिग्री या पंजीयन को लेकर विवाद उत्पन्न होता है तो इसकी सबसे बड़ी कीमत विद्यार्थियों को चुकानी पड़ सकती है। रवि परमार ने कहा कि राजनीतिक रसूख की आड़ में यदि नियमों से खिलवाड़ हुआ है तो जांच जरूरी।

NSUI की मांग
- कॉलेज के मान्यता संबंधी सभी दस्तावेजों का सत्यापन कराया जाए।
- भवन एवं प्रयोगशालाओं का स्वतंत्र भौतिक सत्यापन कराया जाए।
- सभी फैकल्टी के अनुभव प्रमाण-पत्रों की जांच कराई जाए।
- निरीक्षण दल एवं संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जाए।
- मान्यता प्रक्रिया में किसी राजनीतिक अथवा प्रशासनिक प्रभाव की भूमिका की जांच की जाए।
- फर्जी दस्तावेज अथवा कूटरचना की पुष्टि होने पर संबंधित सभी व्यक्तियों के विरुद्ध FIR एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए।
- जांच के दौरान विद्यार्थियों के हितों एवं उनके शैक्षणिक भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
NSUI ने कहा कि नर्सिंग शिक्षा के नाम पर विद्यार्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। संगठन ने CBI से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक तथ्यों को सार्वजनिक किया जाए और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।

