UPSC में सिलेक्टेड MP के 61 युवाओं को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया सम्मानित

भोपाल में आयोजित 'सफलता के मंत्र' कार्यक्रम में UPSC चयनित 61 अभ्यर्थियों का सम्मान। अभ्यर्थियों पर केंद्रित "प्रतिभाओं का परचम" पुस्तिका के डिजिटल वर्जन का लोकार्पण।

UPSC में सिलेक्टेड MP के 61 युवाओं को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किया सम्मानित

भोपाल। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित 'सफलता के मंत्र' कार्यक्रम में सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) में चयनित मध्य प्रदेश के 61 प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों का सम्मान किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने युवाओं से संवाद करते हुए उन्हें प्रदेश का गौरव बताया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

संघर्ष से सफलता तक: छोटे शहरों के युवाओं ने रचा इतिहास

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो सालों में मध्य प्रदेश ने UPSC में चयन के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। खास बात यह रही कि इन 61 अभ्यर्थियों में से बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जो छोटे शहरों और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं। उन्होंने गर्व जताते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों से पढ़े छात्रों ने भी शीर्ष रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती।

अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन के अनुसार, इस पहल की शुरुआत साल 2020 में हुई थी, जब चयनित अभ्यर्थियों की संख्या 37 थी, जो अब बढ़कर 61 हो गई है। इनमें 20 बेटियां और 22 ऐसे छात्र शामिल हैं, जिन्होंने सरकारी कॉलेजों से पढ़ाई की है।

लोकतंत्र की खूबसूरती- चाय वाला PM-गाय वाला CM 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में लोकतंत्र की विशेषता को रेखांकित करते हुए कहा, देश की यही खूबसूरती है कि यहां एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन सकता है और एक सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है। उन्होंने युवाओं को यह भी बताया कि जहां उनका चयन एक बार के लिए स्थायी होता है। वहीं जनप्रतिनिधियों को हर पांच साल में जनता के बीच जाकर खुद को साबित करना पड़ता है।

सीएम की युवाओं से 5 अपेक्षाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि असली परीक्षा फील्ड में होती है, जहां सेवा भावना और जिम्मेदारी का सही मूल्यांकन होता है। सीएम ने नए चयनित अधिकारियों के सामने पांच महत्वपूर्ण अपेक्षाएं रखीं, जिन्हें उन्होंने सफल प्रशासन की नींव बताया:

  1. अंत्योदय: समाज के अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना
  2. नवाचार: आत्मनिर्भर भारत के लिए नए विचारों को अपनाना
  3. शुचिता: कार्य में पारदर्शिता और समय का सम्मान
  4. ईमानदारी: सत्यनिष्ठा से कभी समझौता न करना
  5. शिल्पकार: विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाना

मुख्यमंत्री ने युवाओं को देश के इतिहास से जुड़ने की सलाह देते हुए कहा कि जो अपने इतिहास को नकारता है, वह आगे नहीं बढ़ सकता। उन्होंने सुभाष चंद्र बोस और भगत सिंह का उदाहरण देते हुए कहा कि आज का समय देश के लिए जीने और समाज के वंचित वर्ग के लिए काम करने का है।

सीधी कलेक्टर और गुना एसपी को हटाए जाने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि जहां अच्छे काम होते हैं वहां अधिकारियों को प्रोत्साहित किया जाता है और जहां कमी होती है, वहां बदलाव जरूरी होता है। उनका लक्ष्य सुशासन और कल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करना है।

दिल्ली या अंग्रेजी जरूरी नहीं: टूट रहे हैं मिथक

कार्यक्रम में यह बात भी सामने आई कि अब UPSC में सफलता के लिए दिल्ली जाना या अंग्रेजी माध्यम अनिवार्य नहीं रह गया है। अनूपपुर, डिंडोरी, सतना और छतरपुर जैसे जिलों के युवाओं ने यह साबित किया है कि सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी इस परीक्षा में सफल हो सकता है।

मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं जो 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में देखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने खुद राजनीति में रहते हुए कई डिग्रियां हासिल कीं, जिससे यह साबित होता है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती।

कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी 61 अभ्यर्थियों को बधाई देते हुए कहा कि वे न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ेगी और प्रदेश के युवा इसी तरह देश की सर्वोच्च सेवाओं में अपना योगदान देते रहेंगे।