रीवा शिक्षा महाविद्यालय में फर्जी नियुक्ति का गंभीर मामला, 32 वर्षों से एक ही पद पर शिक्षक पदस्थ

रीवा में फर्जी नियुक्तियों और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ताजा मामला शिक्षा महाविद्यालय से जुड़ा है, जहां शिक्षक बनने की शिक्षा दी जाती है, लेकिन वहीं नियुक्तियों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

रीवा शिक्षा महाविद्यालय में फर्जी नियुक्ति का गंभीर मामला, 32 वर्षों से एक ही पद पर शिक्षक पदस्थ
पब्लिक वाणी

Rewa teacher appointment scam: रीवा में फर्जी नियुक्तियों और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले लगातार सामने आ रहे हैं. ताजा मामला शिक्षा महाविद्यालय से जुड़ा है, जहां शिक्षक बनने की शिक्षा दी जाती है, लेकिन वहीं नियुक्तियों की वैधता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

जानकारी के अनुसार, शिक्षा महाविद्यालय रीवा में पदस्थ राजेश शुक्ला की नियुक्ति को लेकर लंबे समय से सवाल खड़ा हो रहा है. आरोप है कि वे पिछले 32 सालों से एक ही जगह पर पदस्थ हैं, जो विभागीय स्थानांतरण नीति का  उल्लंघन है. कई बार स्थानीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाया गया, लेकिन कथित तौर पर रसूख के चलते मामला हर बार ठंडे बस्ते में डाल दिया गया.

सबसे गंभीर सवाल यह है कि राजेश शुक्ला की नियुक्ति बिना किसी विधिवत विज्ञापन के की गई थी. यदि यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह न केवल नियमों की अनदेखी है बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.

स्थानीय नागरिकों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि एक ही व्यक्ति का तीन दशकों तक एक ही संस्थान में बने रहना प्रशासनिक मिलीभगत की आशंका को मजबूत करता है. यह मामला अब केवल एक नियुक्ति तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है.

प्राचार्य का पक्ष

इस मामले में जब शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय के प्राचार्य आर. एन. पटेल से बात की गई, तो उन्होंने विषय की गंभीरता को स्वीकार किया, लेकिन स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए. उन्होंने कहा कि मामला संज्ञान में है. दस्तावेजों की जांच की जा रही है. जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

फिलहाल, राजेश शुक्ला की नियुक्ति की वैधता, उनकी सेवा अवधि और विभागीय नियमों के पालन को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप की निष्पक्ष जांच कर पाता है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।