डॉ. हीरालाल अलावा ने प्रेस वार्ता कर पूर्व मंत्री संजय पाठक पर लगाया करोड़ों आरोप

कांग्रेस के मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में प्रेस वार्ता कर भाजपा के विजयराघवगढ़ विधायक और पूर्व मंत्री संजय सत्येंद्र पाठक पर लगभग 1135 एकड़ आदिवासी भूमि के घोटाले का आरोप लगाया।

डॉ. हीरालाल अलावा ने प्रेस वार्ता कर पूर्व मंत्री संजय पाठक पर लगाया करोड़ों आरोप

भोपाल: मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता और मनावर विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने आज भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक संजय पाठक पर करीब 5000 करोड़ रुपये का आरोप लगाया। डॉ. अलावा ने प्रमाणों और दस्तावेजों के साथ यह दावा किया कि संजय पाठक ने अपने चार गरीब आदिवासी कर्मचारियों के नाम पर 1143 एकड़ की बेशकीमती जमीन खरीदकर बेनामी संपत्ति का खेल खेला है। यह घोटाला मध्य प्रदेश के डिंडोरी, जबलपुर, उमरिया, कटनी, मंडला और सिवनी जिलों में फैला हुआ है।

प्रेस वार्ता में डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा, संजय पाठक ने प्रशासन और आम जनता को चूना लगाया है। उन्होंने अपनी पारिवारिक कंपनियों के जरिए गरीब आदिवासियों के नाम पर हजारों करोड़ की संपत्ति हड़प ली। यह आदिवासियों के हितों पर सीधा डाका है। हम इस मामले को विधानसभा में भी उठा रहे हैं और अब केंद्र व राज्य सरकार को भी संपूर्ण दस्तावेज के साथ शिकायत प्रस्तुत की गई है। 

चार गरीब आदिवासी जिनके नाम पर चली करोड़ों की लेन-देन की साजिश.डॉ. अलावा ने प्रेस वार्ता के दौरान चार आदिवासियों के नाम सार्वजनिक किए, जिनके नाम पर संजय पाठक की कंपनियों ने जमीनें खरीदीं।
ये नाम हैं:

  1. नत्थू कोल
  2. प्रहलाद कोल
  3. राकेश सिंह गौड़
  4. चौथा आदिवासी का नाम भी दस्तावेजों में दर्ज

हैरत की बात यह है कि इनमें से तीन आदिवासी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं। वे झुग्गी-झोपड़ियों में रहते हैं, उनके पास न तो पर्याप्त आय है और न ही कोई बड़ी संपत्ति। फिर भी इनके बैंक खातों में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ। डॉ. अलावा ने सवाल उठाया, एक झुग्गी में रहने वाला आदिवासी कैसे हजारों करोड़ की जमीन का मालिक बन जाता है? यह स्पष्ट रूप से बेनामी ट्रांजेक्शन है।

संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियां और खेल

डॉ. हीरालाल अलावा ने आरोप लगाया कि संजय पाठक की निम्नलिखित पारिवारिक कंपनियों ने इन आदिवासियों के नाम पर जमीनें खरीदीं।

  • निर्मल छाया नेचर रिसॉर्ट
  • बंगाल क्रेडिट
  • आनंद माइनिंग कार्पोरेशन
  • और अन्य संबंधित फर्म

इन कंपनियों ने आदिवासियों के बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर किए और फिर भ्रष्ट अधिकारियों से सांठगांठ कर डिंडोरी, जबलपुर, उमरिया, कटनी, मंडला एवं सिवनी जिलों में हजारों एकड़ जमीन हासिल कर ली। कुल मिलाकर 1143 एकड़ आदिवासी भूमि इस घोटाले में शामिल बताई जा रही है। साथ ही सहारा समूह से जुड़े भोपाल, जबलपुर और कटनी जिले की 309 एकड़ अतिरिक्त बेशकीमती जमीन का भी जिक्र किया गया.

व्हिसलब्लोअर दिव्यांशु मिश्रा ने की शिकायत

इस पूरे मामले का खुलासा करने वाले व्हिसलब्लोअर दिव्यांशु मिश्रा (अंशु) ने पूरे दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत निम्न महत्वपूर्ण संस्थाओं को भेजी गई:

  1. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली
  2. आयकर विभाग
  3. प्रवर्तन निदेशालय (ED)
  4. बेनामी संपत्ति विभाग, नई दिल्ली
  5. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री
  6. मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश
  7. कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी, जिला कटनी
  8. पुलिस अधीक्षक, जिला कटनी

डॉ. अलावा ने कहा कि सभी सबूत और बैंक ट्रांजेक्शन के रिकॉर्ड इन शिकायतों के साथ संलग्न हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अब जांच एजेंसियां जल्द ही कार्रवाई करेंगी।

आदिवासियों के हितों पर डाका: 

विधानसभा में भी उठाया मुद्दा, डॉ. हीरालाल अलावा ने बताया कि यह मामला सिर्फ प्रेस वार्ता तक सीमित नहीं है। वे मध्य प्रदेश विधानसभा में लगातार आदिवासियों के हितों की रक्षा के लिए यह मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, आदिवासी समाज हमारा अभिन्न हिस्सा है। उनकी जमीन उनकी रक्षा का आधार है। अगर पूर्व मंत्री जैसे लोग ही ऐसी साजिश रचते हैं तो आदिवासियों का भरोसा कैसे बचेगा।

राजनीतिक मायने और आगे क्या?

यह आरोप मध्य प्रदेश की राजनीति में तूफान खड़ा करने वाला है क्योंकि संजय पाठक पूर्व मंत्री और वर्तमान भाजपा विधायक हैं। डॉ. अलावा ने स्पष्ट कहा कि यह घोटाला न सिर्फ आर्थिक है बल्कि आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन भी है। यदि साबित हुआ तो यह मध्य प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा आदिवासी भूमि घोटाला साबित हो सकता है।
कांग्रेस पार्टी ने इस मामले में पूरी ताकत झोंकने का फैसला किया है। डॉ. अलावा ने कहा, हम तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक कि न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों को सजा नहीं होती।