ट्रम्प का ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम: होर्मुज स्ट्रेट खोलो, वरना पावर प्लांट तबाह!

मिडिल ईस्ट में युद्ध चौथे हफ्ते में प्रवेश, इजराइल पर मिसाइल हमले से 150+ घायल, तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं

ट्रम्प का ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम: होर्मुज स्ट्रेट खोलो, वरना पावर प्लांट तबाह!

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ा अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर अगले 48 घंटों में होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलकर जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल नहीं की गई, तो अमेरिका ईरान के प्रमुख पावर प्लांट्स पर हमला कर उन्हें तबाह कर देगा। ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर रविवार रात पोस्ट किया, अगर ईरान 48 घंटे के भीतर होर्मुज को बिना किसी खतरे के पूरी तरह नहीं खोलता, तो अमेरिका उनके विभिन्न पावर प्लांट्स पर हमला कर उन्हें तबाह कर देगा, शुरुआत सबसे बड़े प्लांट से होगी।



यह धमकी उस समय आई है जब यूएस-इजराइल बनाम ईरान युद्ध चौथे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है। युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य और न्यूक्लियर साइट्स पर आश्चर्यजनक हमले किए थे। होर्मुज स्ट्रेट, जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल गुजरता है, ईरान द्वारा आंशिक रूप से बंद कर दिया गया है, जिससे वैश्विक तेल कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर युद्ध 10 दिन और चला तो कीमतें 150 डॉलर तक जा सकती हैं।

ईरान का जवाब:
ईरान ने ट्रम्प की धमकी का तीखा जवाब दिया है। खातम अल-अनबिया सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फाघारी ने कहा कि अगर ईरान के पावर प्लांट्स को निशाना बनाया गया, तो ईरान मिडिल ईस्ट में अमेरिका और इजराइल से जुड़े सभी ऊर्जा ढांचों, खासकर डिसेलिनेशन प्लांट्स (समुद्री पानी को मीठा बनाने वाले प्लांट्स) और आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करेगा। ईरान ने साफ कहा कि होर्मुज स्ट्रेट उसके दुश्मनों के लिए बंद है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करते हुए विदेशी जहाजों को अनुमति लेकर गुजरने दिया जा सकता है।

ताजा हमले और नुकसान:
शनिवार रात ईरान ने इजराइल के दक्षिणी शहर डिमोना (जहां इजराइल का न्यूक्लियर रिसर्च सेंटर है) और अराद पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इन हमलों में 150 से ज्यादा लोग घायल हुए, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। इजराइली सेना के अनुसार, पिछले एक घंटे में ईरान ने तीन और मिसाइलें दागीं। इजराइल की एयर डिफेंस सिस्टम कुछ मिसाइलों को रोकने में नाकाम रही, जिससे नागरिक इलाकों में भारी नुकसान हुआ। इजराइल के पीस नाउ संगठन के नेता यारिव ओपेनहाइमर ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह ईरान की सैन्य क्षमता के बारे में जनता को गुमराह कर रही है।

ईरान ने पिछले 24 घंटों में सऊदी अरब पर 60 ड्रोन हमले भी किए, जिन्हें सऊदी एयर डिफेंस ने रोक लिया। बगदाद एयरपोर्ट के पास भी ड्रोन हमले की खबरें आईं। ईरान में इंटरनेट पिछले 4 हफ्तों से लगभग बंद है, जिससे सूचना का प्रवाह सीमित हो गया है।

वैश्विक प्रभाव:
युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। दुनिया की 20 बड़ी एयरलाइंस की वैल्यू 53 अरब डॉलर घटी है। श्रीलंका में पेट्रोल 398 रुपए और डीजल 382 रुपए प्रति लीटर पहुंच गया। G7 देशों ने कहा कि वे ऊर्जा सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए कदम उठाएंगे, जिसमें IEA के रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने का फैसला शामिल है। जापान ने माइंस हटाने में मदद की पेशकश की है, लेकिन सैनिक नहीं भेजेगा।

BRICS और क्षेत्रीय प्रयास:
ईरान के राष्ट्रपति मसूज पजशकियान ने पीएम मोदी से फोन पर बात की और BRICS से युद्ध रोकने में भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने मिडिल ईस्ट में नया सुरक्षा सिस्टम बनाने का सुझाव दिया।

ईरान के पावर प्लांट्स:
ईरान में करीब 110 गैस-बेस्ड पावर प्लांट हैं। सबसे बड़े हैं- दमावंद (2,868 MW), शाहिद सलीमी (2,215 MW) और शाहिद रजाई (2,043 MW)। देश की ज्यादातर बिजली फॉसिल फ्यूल से बनती है, जबकि बुशेहर न्यूक्लियर प्लांट एकमात्र चालू परमाणु रिएक्टर है।

ट्रम्प की यह धमकी युद्ध को नई दिशा दे सकती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ट्रम्प के फैसले अप्रत्याशित हैं, और ईरान जैसे बड़े देश को पूरी तरह नियंत्रित करना आसान नहीं। अगर हमले हुए तो क्षेत्रीय युद्ध और बड़ा हो सकता है।