अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, भावुक वीडियो जारी कर बोले- अब आगे बढ़ने का समय

भारतीय बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास का ऐलान किया। भावुक वीडियो शेयर कर कहा- अब आगे बढ़ने का समय है। जानिए उनके करियर की बड़ी उपलब्धियां।

अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से लिया संन्यास, भावुक वीडियो जारी कर बोले- अब आगे बढ़ने का समय

भारतीय क्रिकेट टीम के अनुभवी बल्लेबाज अजिंक्य रहाणे ने गुरुवार (30 जुलाई) को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने की घोषणा कर दी। 38 वर्षीय रहाणे ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक भावुक वीडियो जारी कर इस फैसले की जानकारी दी। भारत के लिए 85 टेस्ट, 90 वनडे और 20 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले रहाणे ने कहा कि अब उनके जीवन में आगे बढ़ने का यही सही समय है।

'हर शुरुआत का एक अंत होता है'

अपने वीडियो संदेश में रहाणे ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहना आसान फैसला नहीं था, लेकिन उन्हें लगता है कि अब आगे बढ़ने का यही सही समय है।

उन्होंने कहा,
"जिंदगी की सच्चाई यही है कि हर चीज की शुरुआत होती है और उसका अंत भी होता है। मैंने अपनी बल्लेबाजी में हमेशा टाइमिंग पर भरोसा किया है और आज मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का यही सही समय है।"

रहाणे ने भारत की जर्सी पहनने को अपने जीवन का सबसे बड़ा सम्मान बताया। उन्होंने कहा कि 2011 में टेस्ट कैप नंबर 278 मिलने से लेकर हर बार देश के लिए मैदान पर उतरना उनके लिए सपने के सच होने जैसा था।

हार ने बनाया बेहतर खिलाड़ी

रहाणे ने अपने संदेश में कहा कि उनके नाम का अर्थ 'अजिंक्य' यानी अजेय है, लेकिन करियर में उन्हें कई हार का सामना भी करना पड़ा।

उन्होंने कहा कि हार ने उन्हें निराश जरूर किया, लेकिन इन्हीं अनुभवों ने उन्हें मजबूत बनाया और एक बेहतर खिलाड़ी के साथ-साथ बेहतर इंसान भी बनाया।

बीसीसीआई, परिवार और फैंस का जताया आभार

अपने संन्यास संदेश में रहाणे ने बीसीसीआई, सभी कोच, कप्तानों, टीम के साथियों, सपोर्ट स्टाफ, परिवार और करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों का धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि क्रिकेटर के रूप में उनका एक अध्याय समाप्त हो रहा है, लेकिन क्रिकेट के साथ उनका सफर आगे भी जारी रहेगा। अब वह अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों की मदद करना चाहते हैं और अपने अनुभव साझा करेंगे।

2020-21 ऑस्ट्रेलिया दौरा बना करियर का सबसे सुनहरा पल

अजिंक्य रहाणे के करियर का सबसे यादगार अध्याय 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा रहा। एडिलेड टेस्ट में भारत के 36 रन पर ऑलआउट होने और विराट कोहली के स्वदेश लौटने के बाद रहाणे ने टीम की कप्तानी संभाली।

उन्होंने मेलबर्न टेस्ट में शानदार शतक लगाया और भारत को जीत दिलाकर सीरीज 1-1 से बराबर कराई। इसके बाद उनकी कप्तानी में टीम इंडिया ने गाबा टेस्ट जीतकर ऑस्ट्रेलिया को 2-1 से सीरीज में हराया और ब्रिस्बेन में ऑस्ट्रेलिया का 32 साल पुराना अजेय रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। यह जीत भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिनी जाती है।

2011 में डेब्यू, 2023 में खेला आखिरी टेस्ट

रहाणे ने 2011 में इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए वनडे और टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया था।

  • वनडे डेब्यू: 3 सितंबर 2011, इंग्लैंड के खिलाफ
  • टी-20 डेब्यू: 31 अगस्त 2011, इंग्लैंड के खिलाफ
  • टेस्ट डेब्यू: 22 मार्च 2013, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ, दिल्ली

उन्होंने अपना आखिरी टेस्ट मैच जुलाई 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला। वहीं आखिरी वनडे 2018 में दक्षिण अफ्रीका और आखिरी टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला 2016 में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेला था।

तीनों फॉर्मेट में की टीम इंडिया की कप्तानी

अजिंक्य रहाणे उन चुनिंदा भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने क्रिकेट के तीनों प्रारूपों में टीम इंडिया की कप्तानी की।

  • टेस्ट: 6 मैच, 4 जीत, 2 ड्रॉ
  • वनडे: 3 मैच, 3 जीत
  • टी-20: 2 मैच, 1 जीत, 1 हार

IPL में भी रहा शानदार सफर

रहाणे पिछले सीजन कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) की कप्तानी कर चुके हैं। आईपीएल में उन्होंने मुंबई इंडियंस, राजस्थान रॉयल्स, राइजिंग पुणे सुपरजायंट, दिल्ली कैपिटल्स, चेन्नई सुपर किंग्स और कोलकाता नाइट राइडर्स का प्रतिनिधित्व किया।

उन्होंने आईपीएल में 212 मैचों में 5,367 रन बनाए। इस दौरान उनका औसत 30.15, स्ट्राइक रेट 125.60 रहा। उनके नाम 2 शतक और 35 अर्धशतक दर्ज हैं।

अंतरराष्ट्रीय करियर एक नजर में

  • टेस्ट: 85 मैच, 5,077 रन, 12 शतक, 26 अर्धशतक
  • वनडे: 90 मैच, 2,962 रन, 3 शतक, 24 अर्धशतक
  • टी-20 अंतरराष्ट्रीय: 20 मैच, 375 रन, 1 अर्धशतक

38 साल की उम्र में अजिंक्य रहाणे ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया है। शांत स्वभाव, जिम्मेदार बल्लेबाजी और मुश्किल परिस्थितियों में टीम को संभालने की उनकी क्षमता हमेशा भारतीय क्रिकेट इतिहास में याद रखी जाएगी।